धामी सरकार ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना से जुड़े क्षेत्रों में लागू 400 मीटर फ्रीज जोन प्रतिबंध की समीक्षा प्रक्रिया शुरू की।
देहरादून। उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों की आर्थिक, सामाजिक और पर्यटन आधारित विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आधार मानी जा रही है। वर्षों से निर्माणाधीन यह महत्वाकांक्षी परियोजना अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। इसी बीच राज्य सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जो आने वाले समय में गढ़वाल क्षेत्र के कई इलाकों की तस्वीर बदल सकता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य सरकार ने रेलवे परियोजना के आसपास लागू 400 मीटर फ्रीज जोन प्रतिबंध की समीक्षा शुरू कर दी है। आवास विभाग ने इस संबंध में संबंधित जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। सरकार यह आकलन कर रही है कि जिन क्षेत्रों में रेलवे निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, वहां विकास गतिविधियों को किस प्रकार चरणबद्ध और सुरक्षित तरीके से अनुमति दी जा सकती है।
यह फैसला उन हजारों स्थानीय लोगों, व्यवसायियों, होटल संचालकों और निवेशकों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है, जो पिछले कई वर्षों से निर्माण प्रतिबंधों के कारण प्रभावित हो रहे थे।

क्या है रेलवे फ्रीज जोन और क्यों लगाया गया था प्रतिबंध?
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना भारत की सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वतीय रेल परियोजनाओं में से एक है। परियोजना में लंबी सुरंगें, पुल और अत्याधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने 9 जनवरी 2024 को रेलवे कॉरिडोर से जुड़े कई क्षेत्रों को फ्रीज जोन घोषित किया था।
इसके तहत रेलवे लाइन और परियोजना संरचनाओं के आसपास 400 मीटर तक निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाई गई थी। इस कदम का उद्देश्य रेलवे सुरंगों, पुलों और अन्य तकनीकी संरचनाओं को किसी भी संभावित खतरे से सुरक्षित रखना था।
किन क्षेत्रों में लागू किया गया था फ्रीज जोन?
फ्रीज जोन का प्रभाव मुख्य रूप से उन क्षेत्रों पर पड़ा जहां से रेल परियोजना गुजर रही है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- योगनगरी ऋषिकेश
- शिवपुरी
- व्यासी
- सिराला
- तिलवाड़ मल्ला
- मलेथा
- श्रीनगर
- धारीदेवी
- तिलनी
- घोलतीर
- गौचर
इन क्षेत्रों में नए भवन निर्माण, व्यावसायिक परियोजनाओं और कई प्रकार की विकास गतिविधियों पर रोक लगाई गई थी।
स्थानीय लोगों और कारोबारियों पर क्या पड़ा असर?
फ्रीज जोन लागू होने के बाद कई क्षेत्रों में विकास कार्य लगभग ठहर गए थे। पर्यटन आधारित व्यवसायों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिला।
कई प्रस्तावित होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे और व्यावसायिक परियोजनाएं शुरू नहीं हो सकीं। वहीं कई लोगों को अपने आवासीय भवनों के निर्माण या विस्तार में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
स्थानीय व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से लगातार सरकार के समक्ष यह मांग उठाई जा रही थी कि जिन क्षेत्रों में रेलवे निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, वहां प्रतिबंधों की समीक्षा की जाए।
क्यों महत्वपूर्ण है यह समीक्षा?
गढ़वाल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा पर्यटन और तीर्थाटन पर आधारित है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के शुरू होने के बाद इन क्षेत्रों तक पहुंच पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज हो जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि रेल संचालन शुरू होने के बाद—
- पर्यटन गतिविधियों में तेजी आएगी।
- होटल और होमस्टे उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
- स्थानीय उत्पादों के बाजार का विस्तार होगा।
- नए निवेशकों की रुचि बढ़ेगी।
- युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- भूमि और संपत्तियों का आर्थिक मूल्य बढ़ सकता है।
ऐसे में रेलवे कॉरिडोर के आसपास नियंत्रित विकास की अनुमति प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकती है।
सुरक्षा से समझौता नहीं, संतुलित विकास पर जोर
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की राहत तकनीकी सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर ही दी जाएगी। समीक्षा प्रक्रिया के दौरान रेलवे विशेषज्ञों, प्रशासनिक अधिकारियों और तकनीकी टीमों की रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
सरकार का फोकस उन क्षेत्रों की पहचान करना है जहां रेलवे परियोजना का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है और जहां निर्माण गतिविधियों से भविष्य में रेलवे संरचनाओं को कोई खतरा नहीं होगा।
यानी सरकार की कोशिश केवल प्रतिबंध हटाने की नहीं, बल्कि सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की है।
उत्तराखंड के लिए क्यों गेम चेंजर है ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना?
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को उत्तराखंड के सबसे बड़े बुनियादी ढांचा विकास प्रोजेक्ट्स में गिना जाता है।
इस परियोजना से—
- चारधाम यात्रा को नई गति मिलेगी।
- यात्रा समय में बड़ी कमी आएगी।
- पर्यटन और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
- आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में मदद मिलेगी।
- पर्वतीय क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी।
- स्थानीय अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
इसी कारण फ्रीज जोन समीक्षा को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पहाड़ों के आर्थिक भविष्य से जुड़ा बड़ा कदम माना जा रहा है।
सरकार की मंशा: विकास, निवेश और रोजगार को मिले नई रफ्तार
धामी सरकार लगातार बुनियादी ढांचे, पर्यटन और निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। रेलवे फ्रीज जोन की समीक्षा भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
यदि तकनीकी जांच और सुरक्षा मानकों के बाद प्रतिबंधों में आंशिक राहत दी जाती है, तो आने वाले वर्षों में रेलवे कॉरिडोर से जुड़े क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं खुल सकती हैं। इससे स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में लाभ मिलने की उम्मीद है।
डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव आवास ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर रेलवे फ्रीज जोन में लागू प्रतिबंधों की समीक्षा की जा रही है। जहां रेलवे परियोजना का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है, वहां की स्थिति का तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर आकलन कराया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि रेलवे सुरक्षा और तकनीकी मानकों से किसी प्रकार का समझौता किए बिना स्थानीय नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों को विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएं। जनहित और परियोजना हित दोनों को समान प्राथमिकता देते हुए व्यावहारिक समाधान तैयार किए जाएंगे।
