नई दिल्ली में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात के दौरान उत्तराखंड की ऊर्जा जरूरतों, अतिरिक्त बिजली आवंटन, BESS और ADB सहायतित पारेषण परियोजना पर चर्चा करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।
नई दिल्ली। उत्तराखंड की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं, भविष्य की बिजली मांग और राज्य की जल विद्युत क्षमता के बेहतर उपयोग को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर से महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच राज्य की ऊर्जा परियोजनाओं, अतिरिक्त बिजली आवंटन, पम्प्ड स्टोरेज योजनाओं, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और पिटकुल की एशियाई विकास बैंक (ADB) सहायतित पारेषण परियोजना समेत कई अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने राज्य की विद्युत आवश्यकताओं को पूरा करने में केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर दिए जा रहे सहयोग के लिए केंद्रीय मंत्री का आभार व्यक्त किया और कहा कि आने वाले महीनों में उत्तराखंड को अतिरिक्त ऊर्जा समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।
एल-नीनो और कम बारिश से बिजली उत्पादन प्रभावित होने की आशंका

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमानों के अनुसार एल-नीनो जैसी परिस्थितियों के कारण वर्षा में कमी आने की संभावना है। इससे राज्य के जलाशयों में जलागम घट सकता है और जल विद्युत उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड की बड़ी ऊर्जा क्षमता जल विद्युत परियोजनाओं पर आधारित है। ऐसे में यदि बारिश सामान्य से कम होती है तो बिजली उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाएगी।
चारधाम यात्रा और कांवड़ यात्रा से बढ़ेगी बिजली की मांग
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और आगामी कांवड़ यात्रा के दौरान भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसके चलते बिजली की खपत में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से जुलाई 2026 की शेष अवधि के लिए 150 मेगावाट और अगस्त 2026 के लिए 200 मेगावाट अतिरिक्त बिजली केंद्रीय पूल से उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
10 गीगावाट पम्प्ड स्टोरेज क्षमता विकसित करने की योजना
बैठक में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड को देश के ऊर्जा भंडारण केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना भी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि राज्य में लगभग 10 गीगावाट पम्प्ड स्टोरेज क्षमता विकसित करने की संभावनाएं हैं।
इसके लिए मुख्यमंत्री ने अगले पांच वर्षों में 7,800 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता अथवा वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और राष्ट्रीय ग्रिड को भी लाभ मिलेगा।
BESS क्षमता बढ़ाने की मांग
मुख्यमंत्री धामी ने राज्य में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में स्वीकृत 500 मेगावाट आवर क्षमता उत्तराखंड की भविष्य की जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने केंद्र सरकार से BESS क्षमता को बढ़ाकर 665 मेगावाट आवर करने और इसके लिए अतिरिक्त वायबिलिटी गैप फंडिंग उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
पिटकुल की 3,638 करोड़ रुपये की ADB परियोजना पर विशेष चर्चा
बैठक में पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) की 3,638.26 करोड़ रुपये लागत वाली एडीबी सहायतित पारेषण परियोजना भी प्रमुख विषय रही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के तहत लगभग 2,910.61 करोड़ रुपये का एडीबी ऋण प्रस्तावित है। उन्होंने अनुरोध किया कि परियोजना के लिए पहले से प्रस्तावित 80:20 वित्तीय पैटर्न को बरकरार रखा जाए।
80:20 वित्तीय व्यवस्था बनाए रखने पर जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) परियोजना को तकनीकी रूप से उपयुक्त मान चुका है और विद्युत मंत्रालय ने भी एडीबी सहायता पर कोई आपत्ति नहीं जताई है।
हालांकि एडीबी हिस्सेदारी को 60 प्रतिशत तक सीमित करने का सुझाव सामने आया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि वित्तीय पैटर्न में बदलाव किया गया तो उत्तराखंड जैसे विशेष श्रेणी के हिमालयी राज्य को मिलने वाले वित्तीय लाभ प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि मूल 80:20 वित्तीय व्यवस्था को यथावत रखते हुए परियोजना को मंजूरी दी जाए।
ऊर्जा आत्मनिर्भर भारत में उत्तराखंड निभाएगा बड़ी भूमिका
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के विजन को साकार करने में उत्तराखंड की जल विद्युत क्षमता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का सहयोग मिलने से राज्य में ऊर्जा क्षेत्र, पारेषण अवसंरचना और सतत विकास परियोजनाओं को नई गति मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री ने दिया सकारात्मक आश्वासन
बैठक के अंत में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत सभी प्रस्तावों पर सकारात्मक विचार और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। इससे उत्तराखंड की ऊर्जा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में नई उम्मीद जगी है।
