आर्डन प्रोग्रेसिव स्कूल लामाचौड़ में कुमाऊँनी भाषण एवं स्वरचित कविता प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थी और अतिथि।
हल्द्वानी। आर्डन प्रोग्रेसिव स्कूल, लामाचौड़ में कुमाऊँनी भाषा और संस्कृति के संरक्षण तथा नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा से जोड़ने के उद्देश्य से कुमाऊँनी भाषण एवं स्वरचित कविता प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। समाज सेविका एवं सौहार्द जन सेवा समिति की अध्यक्ष श्रीमती विद्या महतोलिया के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने कुमाऊँनी भाषा में अपनी रचनात्मकता, वक्तृत्व क्षमता और सामाजिक सरोकारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने पूरे कार्यक्रम को कुमाऊँनी भाषा, लोक संस्कृति और सामाजिक चेतना से जोड़ दिया। प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने विभिन्न समसामयिक और सामाजिक विषयों को अपनी मातृभाषा के माध्यम से सामने रखा।
कुमाऊँनी में विद्यार्थियों ने बेबाकी से रखे विचार

प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण, नशा मुक्ति, महिला सशक्तिकरण, देशप्रेम और मातृभाषा के संरक्षण जैसे विषयों पर कुमाऊँनी भाषा में भाषण और स्वरचित कविताएं प्रस्तुत कीं।
विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में सामाजिक समस्याओं को लेकर चिंता के साथ-साथ सकारात्मक बदलाव का संदेश भी दिखाई दिया। उन्होंने अपनी कविताओं और भाषणों के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया कि मातृभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि किसी भी समाज की संस्कृति, परंपरा और पहचान को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
मातृभाषा से जुड़ाव पर दिया जोर
कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि तेजी से बदलते दौर में स्थानीय भाषाओं और बोलियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। स्कूलों में इस तरह की प्रतियोगिताएं बच्चों को अपनी जड़ों, लोक संस्कृति और मातृभाषा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
कुमाऊँनी भाषा में विद्यार्थियों की प्रस्तुति ने यह भी दिखाया कि यदि बच्चों को अपनी स्थानीय भाषा में अभिव्यक्ति का अवसर दिया जाए तो वे सामाजिक और समसामयिक विषयों पर बेहद प्रभावी तरीके से अपनी बात रख सकते हैं।
ये रहे कार्यक्रम में मौजूद अतिथि
कार्यक्रम में विद्यालय के ट्रस्टी श्री भुवन चंद्र उपाध्याय, प्रधानाचार्य श्री वीरेंद्र सिंह, समाज सेविका एवं सौहार्द जन सेवा समिति की संरक्षक श्रीमती नीरजा बोरा, उपाध्यक्ष श्रीमती पूर्णिमा पांडे, मीडिया प्रभारी श्री मोहन जोशी, सदस्य श्रीमती पुनीता पाण्डे एवं श्रीमती गीता लोशाली मौजूद रहीं।
अतिथियों ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनकी प्रस्तुतियों की सराहना की और मातृभाषा एवं लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे आयोजनों को उपयोगी बताया।
साहित्यकार और लोकगायिका ने किया प्रतिभागियों का मूल्यांकन
कुमाऊँनी भाषण एवं स्वरचित कविता प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन वरिष्ठ साहित्यकार श्री गोविन्द बल्लभ बहुगुणा और प्रसिद्ध लोकगायिका सुश्री लता कुंजवाल ने किया।
निर्णायकों ने विद्यार्थियों की भाषा, विषय की समझ, प्रस्तुति शैली, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति के आधार पर उनकी प्रतिभा का आकलन किया। विद्यार्थियों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रस्तुतियां दीं।
सामाजिक मुद्दों को कविता और भाषण से जोड़ा
प्रतियोगिता की खास बात यह रही कि विद्यार्थियों ने केवल मनोरंजन तक अपनी प्रस्तुतियों को सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को अपनी रचनाओं का आधार बनाया।
नशा मुक्ति के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया, वहीं पर्यावरण संरक्षण पर आधारित प्रस्तुतियों में प्रकृति और पहाड़ों को बचाने की अपील की गई। महिला सशक्तिकरण से जुड़ी प्रस्तुतियों में महिलाओं की भूमिका और अधिकारों को रेखांकित किया गया। वहीं देशप्रेम तथा मातृभाषा संरक्षण से संबंधित प्रस्तुतियों ने विद्यार्थियों की सामाजिक और सांस्कृतिक समझ को सामने रखा।
शैक्षणिक सलाहकार ने जताया आभार
विद्यालय के शैक्षणिक सलाहकार डा. बी.एस. भाकुनी ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी अतिथियों, निर्णायकों, शिक्षकों और प्रतिभागी विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि मातृभाषा किसी भी समाज की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। नई पीढ़ी को अपनी भाषा और संस्कृति से जोड़ने के लिए विद्यालय स्तर पर ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाने चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि प्रतियोगिताएं बच्चों में आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित करने का बेहतर माध्यम हैं।
उत्कृष्ट प्रतिभागियों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के अंत में प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए।
आयोजकों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा, लोक संस्कृति और सामाजिक मूल्यों से जोड़ना भी है। कुमाऊँनी भाषा में विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
मातृभाषा को मंच मिला तो बच्चों की प्रतिभा भी निखरी
आर्डन प्रोग्रेसिव स्कूल में आयोजित कुमाऊँनी भाषण एवं स्वरचित कविता प्रतियोगिता ने यह संदेश दिया कि स्थानीय भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए विद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में बोलने, लिखने और रचनात्मक अभिव्यक्ति का मंच मिलने से उनमें अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति जुड़ाव भी मजबूत होता है।
ऐसे आयोजन कुमाऊँनी भाषा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ उत्तराखंड की लोकभाषा और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।
