मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर भीमताल में आयोजित आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यशाला में मंत्री मदन कौशिक ने आधुनिक तकनीक और त्वरित रिस्पॉन्स आधारित आपदा प्रबंधन पर जोर दिया।
भीमताल। भूस्खलन, बादल फटना, अतिवृष्टि और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में अब आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने नई पहल तेज कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रदेश के सभी जिलों में “आपदा जोखिम न्यूनीकरण” (Disaster Risk Reduction) विषय पर एक दिवसीय कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को भीमताल स्थित विकास भवन सभागार में विस्तृत कार्यशाला आयोजित हुई, जिसमें आपदा प्रबंधन को आधुनिक तकनीक, बेहतर समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया के जरिए अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।

कार्यशाला का शुभारंभ प्रदेश के पंचायती राज, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, आयुष, आयुष शिक्षा, पुनर्गठन एवं जनगणना मंत्री मदन कौशिक ने किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने पिछले वर्षों में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है और आज देश के अन्य राज्य भी उत्तराखंड के अनुभवों से सीख ले रहे हैं।
‘आपदा प्रबंधन सिर्फ संसाधन नहीं, उनका सही समय पर उपयोग भी जरूरी’

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल संसाधनों की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनौती के समय उनका अधिकतम और प्रभावी उपयोग करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लगातार आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने में जुटी है। आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है, सूचना तंत्र को मजबूत किया जा रहा है और राहत एवं बचाव दलों के रिस्पॉन्स टाइम को कम करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में आई बड़ी-बड़ी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान प्रशासन, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, सेना और अन्य एजेंसियों ने बेहतर समन्वय के साथ कार्य किया, जिससे जन-धन की हानि को काफी हद तक कम किया जा सका।
हर जिले में आयोजित हो रही हैं विशेष कार्यशालाएं
मदन कौशिक ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य के सभी जनपदों में इस प्रकार की कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, ताकि विभिन्न विभागों, संस्थाओं और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल विकसित हो सके।
उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी है। यदि समुदाय जागरूक और प्रशिक्षित होगा तो आपदाओं से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सामुदायिक भागीदारी को बताया सबसे बड़ी ताकत
मंत्री ने कहा कि प्रभावी आपदा प्रबंधन के लिए सामुदायिक सशक्तिकरण अत्यंत आवश्यक है। राज्य सरकार इस दिशा में लगातार नई पहल कर रही है और नवीन तकनीकों को अपनाकर लोगों को आपदा के प्रति जागरूक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए राज्य का लक्ष्य केवल राहत एवं बचाव तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि आपदा जोखिम को पहले से कम करने की दिशा में भी व्यापक कार्य किया जाएगा।
‘मुख्यमंत्री आपदा प्रबंधन को लेकर बेहद संवेदनशील’
राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला ने कहा कि कार्यशालाओं का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करना और अधिकारियों को आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं से प्रशिक्षित करना है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आपदा प्रबंधन को लेकर बेहद संवेदनशील हैं और किसी भी आपदा की स्थिति में स्वयं मॉनिटरिंग करते हुए त्वरित निर्णय लेते हैं।
पूर्व सैनिकों के अनुभव का मिलेगा लाभ
राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) रघुवीर सिंह भंडारी ने कार्यशाला में खोज एवं बचाव अभियान, राहत कार्य, त्वरित प्रतिक्रिया और आपदा प्रबंधन की व्यावहारिक रणनीतियों पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूर्व सैनिकों, अर्धसैनिक बलों के सेवानिवृत्त अधिकारियों और जवानों को भी आपदा प्रबंधन तंत्र से जोड़ने की योजना पर कार्य कर रही है ताकि उनके अनुभव का लाभ आपदा के समय मिल सके।
अधिकारियों को दिया गया आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण
अपर सचिव आपदा प्रबंधन प्रकाश चन्द्र ने बताया कि उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) द्वारा आयोजित इन कार्यशालाओं का उद्देश्य विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की क्षमता का विकास करना है।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को निम्न विषयों पर जानकारी दी जा रही है—
- आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction)
- प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Early Warning System)
- Incident Response System (IRS)
- जीआईएस आधारित आपदा प्रबंधन
- सचेत मोबाइल ऐप का उपयोग
- IDRN पोर्टल
- राहत एवं बचाव कार्यों का समन्वय
- क्षमता विकास एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण
विशेषज्ञों ने साझा किए आधुनिक आपदा प्रबंधन के मॉडल
तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दीं।
- डॉ. पी.डी. माथुर ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फ्रेमवर्क पर जानकारी दी।
- डॉ. वेदिका पंत ने Incident Response System (IRS) के प्रभावी संचालन की जानकारी साझा की।
- रोहित कुमार ने GIS प्रणाली एवं सचेत ऐप के उपयोग को समझाया।
- निखिल पुनिया ने IDRN पोर्टल, क्षमता विकास और मोबाइल आधारित आपदा प्रबंधन प्रणाली की जानकारी दी।
इसके अलावा पूर्व चेतावनी प्रणाली, आपदा से पूर्व तैयारी, राहत एवं बचाव अभियान तथा व्यवहारिक प्रबंधन पर भी विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की।
जिलाधिकारी ने मानसून के नुकसान और राहत कार्यों की दी जानकारी
कार्यक्रम की शुरुआत में जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने मंत्री मदन कौशिक का स्वागत किया और मानसून के दौरान जिले में प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान, राहत एवं पुनर्वास कार्यों तथा पुनर्निर्माण के लिए विभिन्न विभागों को उपलब्ध कराई गई धनराशि की जानकारी प्रस्तुत की।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में विधायक सरिता आर्या, जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरमवाल, राज्य आपदा सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष विनय रुहेला एवं रघुवीर सिंह भंडारी, दर्जा राज्य मंत्री भावना मेहरा, ब्लॉक प्रमुख हरीश बिष्ट, मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पांडे, अपर जिलाधिकारी सौरभ असवाल, विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
