पर्यटन स्वरोजगार योजना का लाभ लेकर हल्द्वानी के ऊंचापुल में ‘रॉयल होटल’ शुरू करने वाले प्रशांत बड्सिलिया।
हल्द्वानी। उत्तराखंड में पर्यटन को रोजगार और स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बनाने की दिशा में राज्य सरकार की योजनाएं युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रही हैं। सरकारी योजनाओं के जरिए युवाओं को कारोबार शुरू करने के लिए आर्थिक और संस्थागत सहयोग मिल रहा है। ऐसी ही एक योजना ने हल्द्वानी के ऊंचापुल निवासी प्रशांत बड्सिलिया को अपना व्यवसाय खड़ा करने और आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई है।

प्रशांत ने बीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना का लाभ उठाकर होटल व्यवसाय में कदम रखा। योजना के सहयोग से उन्होंने ऊंचापुल क्षेत्र में करीब 99 लाख 32 हजार रुपये की परियोजना लागत से ‘रॉयल होटल’ की शुरुआत की। आज होटल व्यवसाय उनके लिए आय का साधन बनने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता का आधार भी बन चुका है।
नौकरी तलाशने के बजाय बनाया अपना रोजगार

प्रशांत की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणादायक है जो अपना कारोबार शुरू करना चाहते हैं, लेकिन पूंजी और सरकारी योजनाओं की जानकारी के अभाव में कदम नहीं उठा पाते।
प्रशांत बताते हैं कि बीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना उनके लिए काफी मददगार साबित हुई। योजना के माध्यम से मिले सहयोग ने होटल व्यवसाय शुरू करने के उनके सपने को जमीन पर उतारने में अहम भूमिका निभाई।
होटल शुरू होने के बाद उन्हें नियमित आय का जरिया मिला। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने की संभावना भी बनी। इस तरह सरकारी योजना का लाभ लेकर शुरू किया गया व्यवसाय अब उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बन गया है।
हल्द्वानी में पर्यटन कारोबार की बड़ी संभावनाएं
हल्द्वानी को कुमाऊं के प्रमुख प्रवेश द्वार के तौर पर जाना जाता है। नैनीताल, भीमताल, मुक्तेश्वर और कुमाऊं के अन्य पर्यटन स्थलों की यात्रा करने वाले पर्यटकों के लिए हल्द्वानी एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने के साथ होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट, ट्रैवल और आतिथ्य क्षेत्र में कारोबार की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। ऐसे में पर्यटन आधारित स्वरोजगार योजनाएं स्थानीय युवाओं को इस क्षेत्र से जोड़ने का काम कर रही हैं।
ऊंचापुल क्षेत्र में शुरू किया गया प्रशांत का ‘रॉयल होटल’ भी इसी बढ़ती पर्यटन अर्थव्यवस्था का हिस्सा है।
योजना ने आसान किया व्यवसाय शुरू करने का रास्ता
प्रशांत का कहना है कि अगर उन्हें योजना के माध्यम से सहयोग नहीं मिलता तो होटल व्यवसाय शुरू करने का सपना पूरा करना आसान नहीं होता। सरकारी सहायता ने उन्हें अपने व्यवसाय को स्थापित करने के लिए जरूरी आधार उपलब्ध कराया।
उनके मुताबिक, बीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना सिर्फ व्यवसाय शुरू करने में मदद करने वाली योजना नहीं है, बल्कि यह युवाओं को अपने पैरों पर खड़े होने और रोजगार मांगने वाले के बजाय रोजगार देने वाला बनने के लिए प्रेरित करती है।
प्रशांत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की ऐसी योजनाओं से युवाओं को अपने भविष्य को लेकर नए अवसर दिखाई दे रहे हैं।
पर्यटन से जोड़कर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य में नैनीताल, मुक्तेश्वर, भीमताल समेत अनेक पर्यटन स्थल हर साल बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
सरकार का प्रयास है कि पर्यटन से होने वाली आर्थिक गतिविधियों का लाभ स्थानीय लोगों और युवाओं तक भी पहुंचे। इसके लिए पर्यटन आधारित स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली योजनाओं पर जोर दिया जा रहा है।
बीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के जरिए युवाओं को पर्यटन क्षेत्र में होटल, होमस्टे और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
सरकारी योजना से बनी आत्मनिर्भरता की नई राह
प्रशांत बड्सिलिया की कहानी यह बताती है कि सरकारी योजनाओं का प्रभाव सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है। सही लाभार्थी तक योजना का लाभ पहुंचने पर वह रोजगार का साधन तैयार कर सकता है और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकता है।
करीब 99.32 लाख रुपये की परियोजना से शुरू हुआ ‘रॉयल होटल’ प्रशांत के लिए सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।
उनकी सफलता यह संदेश भी देती है कि अगर युवा अपने हुनर, मेहनत और उपलब्ध सरकारी योजनाओं का सही इस्तेमाल करें तो उत्तराखंड में रहकर भी स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
धामी सरकार का फोकस- पर्यटन बने रोजगार का आधार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यटन को स्थानीय युवाओं की आजीविका से जोड़ने पर लगातार जोर दे रही है। सरकार की सोच है कि उत्तराखंड के प्राकृतिक और पर्यटन संसाधनों का लाभ स्थानीय लोगों को मिले और युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर जाने के बजाय अपने राज्य में ही व्यवसाय शुरू कर सकें।
प्रशांत बड्सिलिया की सफलता इसी सोच की एक मिसाल के रूप में सामने आती है। पर्यटन स्वरोजगार योजना के माध्यम से शुरू किया गया उनका होटल व्यवसाय न केवल उनके लिए आय का जरिया बना, बल्कि यह भी दिखाता है कि सरकारी योजनाओं का प्रभावी इस्तेमाल युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
