हल्द्वानी विकासखंड में 30 महिलाओं को सौर उपकरणों के उत्पादन, वायरिंग, मरम्मत और रखरखाव का प्रशिक्षण दिया गया।
हल्द्वानी। उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में अब महिलाओं की भागीदारी पारंपरिक आजीविका तक सीमित नहीं रह गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प के साथ महिलाएं अब तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा और हरित रोजगार जैसे नए क्षेत्रों में भी कदम बढ़ा रही हैं।

इसी कड़ी में हल्द्वानी विकासखंड में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 30 महिलाओं को सौर ऊर्जा से संबंधित तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को सौर उपकरणों के उत्पादन, संचालन, वायरिंग, सामान्य खराबियों की पहचान, मरम्मत और रखरखाव जैसी व्यावहारिक तकनीकी जानकारी देकर उन्हें स्वरोजगार के नए अवसरों से जोड़ना है।
यह प्रशिक्षण नाबार्ड द्वारा श्रद्धा महिला बाल विकास संस्थान के माध्यम से आयोजित किया गया। पहल की खास बात यह रही कि महिलाओं को केवल अचार, पापड़, सिलाई, हस्तशिल्प या खाद्य प्रसंस्करण जैसी पारंपरिक गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें तेजी से बढ़ते सौर ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से जोड़ा गया।

पारंपरिक काम से आगे बढ़कर तकनीकी क्षेत्र में महिलाओं की एंट्री
स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण और स्थानीय महिलाओं को लंबे समय से स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। आमतौर पर इन गतिविधियों में खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई-कढ़ाई, हस्तशिल्प और घरेलू उत्पादों का निर्माण शामिल रहता है।
लेकिन बदलते समय के साथ रोजगार के स्वरूप भी बदल रहे हैं। सौर ऊर्जा का क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और गांवों तथा छोटे शहरों में सोलर सिस्टम, उपकरणों और संबंधित तकनीक की मांग बढ़ रही है।
इसी जरूरत को देखते हुए महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देने की पहल की गई। इससे महिलाओं के सामने स्वरोजगार का एक ऐसा विकल्प खुला है, जिसमें वे अपने कौशल का इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर सेवाएं उपलब्ध कराने में कर सकती हैं।
30 महिलाओं को मिला सौर उपकरणों का व्यावहारिक प्रशिक्षण
हल्द्वानी विकासखंड में प्रशिक्षण लेने वाली 30 महिला सदस्यों को सौर उपकरणों से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय महिलाओं को व्यावहारिक तरीके से काम करने का प्रशिक्षण दिया गया।
महिलाओं को सौर उपकरणों के संचालन और संयोजन के साथ-साथ वायरिंग, कनेक्शन की जांच, सामान्य तकनीकी खराबियों की पहचान, मरम्मत और नियमित रखरखाव के बारे में जानकारी दी गई।
इस प्रशिक्षण से महिलाओं में तकनीकी काम को लेकर आत्मविश्वास बढ़ने के साथ-साथ उन्हें भविष्य में इसी क्षेत्र को अपनी आजीविका का माध्यम बनाने का अवसर भी मिला है।
सोलर सिस्टम की मरम्मत से लेकर रखरखाव तक कर सकेंगी काम
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद महिलाएं स्थानीय स्तर पर सौर उपकरणों और प्रणालियों से जुड़ी कई सामान्य सेवाओं में सहयोग कर सकती हैं।
इनमें सौर उपकरणों की स्थापना में सहयोग, सामान्य मरम्मत, वायरिंग और कनेक्शन की जांच, बैटरी से जुड़ी देखरेख तथा सौर प्रणालियों के रखरखाव जैसे कार्य शामिल हैं।
स्थानीय स्तर पर ऐसी सेवाओं की उपलब्धता से लोगों को छोटी-छोटी तकनीकी समस्याओं के लिए दूर के विशेषज्ञों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वहीं प्रशिक्षित महिलाओं के लिए भी सेवा आधारित आय का रास्ता तैयार हो सकता है।
महिलाओं के लिए खुलेंगे स्वरोजगार और माइक्रो एंटरप्राइज के रास्ते
इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रशिक्षण को केवल कौशल हासिल करने तक सीमित नहीं रखा गया है। इसके माध्यम से महिलाओं के लिए सेवा आधारित स्वरोजगार और सूक्ष्म उद्यम विकसित करने की संभावनाएं तैयार हुई हैं।
यदि प्रशिक्षित महिलाओं को आगे बैंक ऋण, जरूरी उपकरण, कार्यस्थल और बाजार से जोड़ा जाता है, तो वे सौर उपकरणों की मरम्मत एवं रखरखाव को स्थायी व्यवसाय में बदल सकती हैं।
महिलाएं समूह के स्तर पर भी काम शुरू कर सकती हैं। एक समूह सौर उपकरणों की सर्विसिंग, दूसरा इंस्टॉलेशन में सहयोग और तीसरा रखरखाव जैसी सेवाओं को संभाल सकता है। इससे स्वयं सहायता समूहों की आर्थिक गतिविधियों का दायरा और बढ़ सकता है।
हरित रोजगार से जुड़ेगी महिला शक्ति
सौर ऊर्जा को स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के प्रमुख स्रोतों में माना जाता है। ऐसे में महिलाओं को इस क्षेत्र से जोड़ना केवल रोजगार सृजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन्हें हरित अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित तकनीकी मानव संसाधन की आवश्यकता भी बढ़ सकती है। ऐसे में अभी से महिलाओं को इस क्षेत्र का प्रशिक्षण देना भविष्य के रोजगार अवसरों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
धामी सरकार के महिला सशक्तिकरण अभियान को मिल रही नई दिशा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने पर लगातार जोर दे रही है। महिला स्वयं सहायता समूहों को स्थानीय उत्पादों, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों से जोड़ने के साथ अब तकनीकी क्षेत्रों में उनकी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
सौर ऊर्जा का प्रशिक्षण इसी सोच का हिस्सा माना जा सकता है। इसका सीधा उद्देश्य महिलाओं को केवल रोजगार तलाशने वाली नहीं, बल्कि कौशल के आधार पर रोजगार और स्वरोजगार पैदा करने वाली शक्ति के रूप में तैयार करना है।
तकनीकी प्रशिक्षण से बढ़ा महिलाओं का आत्मविश्वास
सौर उपकरणों जैसे तकनीकी क्षेत्र में प्रशिक्षण लेने से महिलाओं में यह विश्वास भी बढ़ा है कि वे उन कार्यों को सीख और कर सकती हैं, जिन्हें अब तक मुख्य रूप से पुरुषों से जुड़ा माना जाता रहा है।
वायरिंग, उपकरणों की जांच, खराबी की पहचान और मरम्मत जैसे काम सीखकर महिलाओं ने तकनीकी क्षेत्र में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। इससे उनके लिए भविष्य में नए कौशल सीखने और दूसरे तकनीकी क्षेत्रों में आगे बढ़ने का रास्ता भी खुल सकता है।
बैंक ऋण और बाजार से जुड़ाव मिला तो बन सकता है बड़ा मॉडल
इस पहल को लंबे समय तक सफल बनाने के लिए प्रशिक्षण के बाद की सहायता सबसे महत्वपूर्ण होगी। यदि इन महिलाओं को बैंकिंग सहायता, ऋण, आधुनिक उपकरण, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से सीधा संपर्क उपलब्ध कराया जाता है, तो यह मॉडल बड़े स्तर पर विकसित किया जा सकता है।
महिलाओं के स्वयं सहायता समूह मिलकर सोलर सर्विस सेंटर या छोटे तकनीकी उद्यम भी शुरू कर सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा होने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सौर उपकरणों के रखरखाव की सुविधा भी उपलब्ध हो सकती है।
आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में महिलाओं की नई भूमिका
हल्द्वानी में 30 महिलाओं को दिया गया सौर तकनीक का प्रशिक्षण एक छोटे स्तर की पहल जरूर है, लेकिन इसका संदेश व्यापक है। उत्तराखंड की महिलाएं अब केवल पारंपरिक आजीविका गतिविधियों तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। वे तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा और आधुनिक रोजगार के क्षेत्रों में भी अपनी जगह बना रही हैं।
सौर ऊर्जा जैसे भविष्य के क्षेत्र में महिलाओं को प्रशिक्षित करने से महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार, कौशल विकास और हरित रोजगार—इन सभी लक्ष्यों को एक साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प के लिहाज से यह पहल इस बात का संकेत है कि राज्य में महिला स्वयं सहायता समूहों की भूमिका अब केवल पारंपरिक उत्पादों के निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी। आने वाले समय में तकनीकी कौशल से लैस महिलाएं स्थानीय अर्थव्यवस्था और हरित रोजगार के नए अवसरों की महत्वपूर्ण भागीदार बन सकती हैं।
