सचिवालय में ऋषिकुल हरिद्वार स्थित शोध संस्थान के विकास पर बैठक करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
देहरादून। उत्तराखण्ड को भारतीय ज्ञान-विज्ञान और संस्कृति का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में एक उच्च स्तरीय बैठक कर हरिद्वार के ऋषिकुल स्थित श्री मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के समग्र विकास और विस्तार की योजनाओं की समीक्षा की।

बैठक में इस संस्थान को भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राचीन विज्ञान, संस्कृति और आधुनिक शोध का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाने पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड केवल आस्था और अध्यात्म की भूमि नहीं, बल्कि यह ऋषियों, विद्वानों और वैज्ञानिक चिंतन की भी धरती रही है। ऐसे में इस संस्थान को नई पहचान देना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संस्थान का कार्य जल्द से जल्द शुरू किया जाए और आगामी कुंभ से पहले इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा जाए। उन्होंने पर्यटन विभाग को इस परियोजना का नोडल विभाग बनाया है और प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु को नियमित प्रगति समीक्षा के लिए पाक्षिक बैठकें करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विकास कार्य में विरासत संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही राज्य के सभी जनपदों की लोक कला और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी इस संस्थान से जोड़ा जाएगा, ताकि यह केवल शोध केंद्र ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक पहचान का भी प्रमुख केंद्र बन सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्थान में वैदिक गणित, वेदों में निहित विज्ञान, उपनिषदों का दर्शन, भारतीय तर्कशास्त्र, पर्यावरण विज्ञान और जीवन मूल्यों पर आधारित शोध की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाएगी। उन्होंने बताया कि भारत ने विश्व को शून्य, दशमलव प्रणाली, बीजगणित और त्रिकोणमिति जैसे महत्वपूर्ण गणितीय सिद्धांत दिए हैं।
इस संदर्भ में महान विद्वानों आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और वराहमिहिर के योगदान को शोध और शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में खगोल विज्ञान, धातु विज्ञान, कृषि विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर विशेष अध्ययन केंद्र स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन भारत में धातु विज्ञान, जल प्रबंधन, जैविक खेती और मौसम आधारित कृषि ज्ञान अत्यंत उन्नत था, जिसे आधुनिक शोध से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में वेदों और उपनिषदों में वर्णित नैतिक शिक्षा, अनुशासन, कर्तव्यबोध और मानवीय मूल्यों को समाज तक पहुंचाना आवश्यक है। यह संस्थान केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार और राष्ट्र निर्माण का भी केंद्र बनेगा।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि संस्थान में डिजिटल पांडुलिपि संरक्षण केंद्र, अत्याधुनिक पुस्तकालय, शोध प्रयोगशालाएं, संगोष्ठी केंद्र और ई-लर्निंग सुविधाएं विकसित की जाएं।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि संस्थान को बहुआयामी रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न केंद्र स्थापित किए जाएंगे—
- श्रुति केंद्र: वेद, उपनिषद और शास्त्रीय ज्ञान परंपरा
- दर्शन केंद्र: भारतीय दर्शन और चेतना
- आयु केंद्र: आयुर्वेद और समग्र स्वास्थ्य विज्ञान
- विज्ञान केंद्र: पारंपरिक विज्ञान और ज्ञान प्रणाली
- कला केंद्र: भारतीय कला और संस्कृति
इसके अलावा पर्यटन, आयुर्वेद, ज्योतिष और योग शिक्षा को भी संस्थान के प्रमुख हिस्से के रूप में विकसित करने की योजना है, ताकि यह वैश्विक स्तर पर आकर्षण का केंद्र बन सके।
बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे और हरिद्वार के जिलाधिकारी ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।
