देहरादून में पंडित दीनदयाल उपाध्याय शैक्षिक उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं में शीर्ष 10 स्थान प्राप्त करने वाले 63 मेधावी छात्र-छात्राओं और छह विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को सम्मानित किया।
देहरादून। उत्तराखंड में बोर्ड परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सम्मानित किया। गुरुवार को मुख्यमंत्री के शासकीय आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय शैक्षिक उत्कृष्टता पुरस्कार वितरण समारोह में वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में प्रदेश की मेरिट सूची में शीर्ष 10 स्थान प्राप्त करने वाले 63 विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया। इसके साथ ही उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम देने वाले छह विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को भी सम्मानित किया गया।

समारोह में हाईस्कूल के 38 और इंटरमीडिएट के 25 मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। वहीं, दोनों कक्षाओं में बेहतर परीक्षा परिणाम हासिल करने वाले तीन-तीन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को प्रशस्ति पत्र और मुख्यमंत्री ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने सभी विद्यार्थियों और प्रधानाचार्यों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता उनकी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। इस उपलब्धि के पीछे शिक्षकों के मार्गदर्शन और अभिभावकों के सहयोग की भी अहम भूमिका रहती है। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तराखंड के विद्यार्थी आगे भी अपनी प्रतिभा और परिश्रम के बल पर प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे।

हाईस्कूल में 92.10% और इंटरमीडिएट में 85.11% रहा परीक्षाफल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2026 के बोर्ड परीक्षा परिणामों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड का हाईस्कूल परीक्षाफल 92.10 प्रतिशत और इंटरमीडिएट का परीक्षाफल 85.11 प्रतिशत रहा है। उन्होंने इन परिणामों को विद्यार्थियों की मेहनत, शिक्षकों के प्रयास और शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों से जुड़ी सराहनीय उपलब्धि बताया।
उन्होंने कहा कि बोर्ड परीक्षाओं में अच्छे अंक हासिल करना विद्यार्थियों के लिए आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। हालांकि, जीवन में सफलता के लिए केवल परीक्षा परिणाम ही पर्याप्त नहीं हैं। विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ अनुशासन, नैतिकता, जिम्मेदारी और व्यावहारिक कौशल भी विकसित करने चाहिए।
मुख्यमंत्री ने सम्मानित विद्यार्थियों से अपेक्षा जताई कि वे अपनी इस उपलब्धि को आगे की पढ़ाई और जीवन के लक्ष्यों की दिशा में प्रेरणा के रूप में लें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी में कुछ विशेष प्रतिभा होती है। सही मार्गदर्शन, निरंतर अभ्यास और मेहनत के माध्यम से उस प्रतिभा को निखारा जा सकता है।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का किया स्मरण
समारोह में मुख्यमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के योगदान को याद करते हुए कहा कि वे एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रमुख विचारक थे। उन्होंने समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया। शिक्षा के संदर्भ में भी उनके विचार केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे नैतिक मूल्यों, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक समरसता और व्यावहारिक समझ को महत्वपूर्ण मानते थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल परीक्षा में सफल बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करना भी है। ऐसी शिक्षा व्यवस्था आवश्यक है, जो बच्चों में ज्ञान के साथ सामाजिक दायित्व, मानवीय संवेदनाएं और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करे।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई के साथ देश और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को भी समझना चाहिए। शिक्षा के माध्यम से ही जागरूक, सक्षम और जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण किया जा सकता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 से शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, व्यावहारिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। उत्तराखंड भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, डिजिटल लर्निंग और भारतीय जीवन मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है। सरकार का जोर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर है, ताकि वे पढ़ाई के साथ तकनीकी ज्ञान, रचनात्मकता और व्यावहारिक कौशल में भी आगे बढ़ सकें।
बदलती तकनीक और रोजगार की आवश्यकताओं को देखते हुए शिक्षा व्यवस्था में नए तरीकों को अपनाना महत्वपूर्ण है। डिजिटल माध्यमों से पढ़ाई की सुविधाएं बढ़ने पर दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को भी बेहतर शैक्षिक संसाधनों तक पहुंच मिल सकती है। सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का उद्देश्य प्रदेश के विद्यार्थियों को ऐसे अवसर उपलब्ध कराना है।
500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासरूम और सेंट्रल स्टूडियो की व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने राज्य में शिक्षा सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासरूम और सेंट्रल स्टूडियो की व्यवस्था की जा रही है।
इस पहल के माध्यम से तकनीक का उपयोग कर विद्यार्थियों तक शैक्षिक सामग्री और पढ़ाई से जुड़ी सुविधाएं पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे उन क्षेत्रों के विद्यार्थियों को लाभ मिल सकता है, जहां विषय विशेषज्ञ शिक्षकों और आधुनिक शैक्षिक संसाधनों तक पहुंच सीमित रहती है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 189 अटल उत्कृष्ट विद्यालय स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही सरकारी विद्यालयों में एनसीईआरटी की पुस्तकों को अनिवार्य किया गया है। विद्यालयों की प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि विद्यार्थी केवल सैद्धांतिक पढ़ाई तक सीमित न रहें, बल्कि प्रयोगों और गतिविधियों के माध्यम से विषयों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
मुख्यमंत्री के अनुसार, शिक्षा में आधुनिक तकनीक और व्यावहारिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देना विद्यार्थियों की क्षमताओं को विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे उन्हें आगे की पढ़ाई और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी।
नंदा गौरा योजना के तहत पात्र छात्राओं को 51 हजार रुपये
मुख्यमंत्री ने बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए संचालित नंदा गौरा योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस योजना के अंतर्गत 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाली पात्र छात्राओं को 51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है।
इस तरह की योजनाओं का उद्देश्य छात्राओं को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करना और उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए सहयोग उपलब्ध कराना है। आर्थिक सहायता से पात्र परिवारों को बेटियों की शिक्षा से जुड़े खर्चों में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में प्रत्येक बच्चे को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए। आर्थिक या भौगोलिक परिस्थितियां किसी विद्यार्थी की प्रतिभा के विकास में बाधा नहीं बननी चाहिए। सरकार की कोशिश है कि शिक्षा से जुड़ी सुविधाओं का लाभ प्रदेश के अधिक से अधिक पात्र बच्चों तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री बालाश्रय योजना से अनाथ बच्चों की शिक्षा पर ध्यान
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री बालाश्रय योजना के माध्यम से अनाथ बच्चों की निःशुल्क शिक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है। इसका उद्देश्य ऐसे बच्चों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे भी अपनी प्रतिभा और क्षमताओं के आधार पर आगे बढ़ सकें।
उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रत्येक बच्चे के विकास के लिए जरूरी है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के किसी भी बच्चे को अवसरों की कमी के कारण अपनी पढ़ाई और प्रतिभा को आगे बढ़ाने से वंचित न रहना पड़े।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा को सामाजिक और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि जब बच्चों को बेहतर शिक्षा, उचित मार्गदर्शन और जरूरी संसाधन मिलते हैं, तो वे अपने भविष्य के साथ-साथ समाज और प्रदेश के विकास में भी योगदान दे सकते हैं।
उत्तराखंड के पूर्ण साक्षर राज्य बनने को बताया गौरव की उपलब्धि
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के पूर्ण साक्षर राज्य बनने की उपलब्धि का उल्लेख करते हुए इसे प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के विस्तार और साक्षरता में सुधार के लिए समाज, शिक्षकों, अभिभावकों और प्रशासन की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में युवा पीढ़ी की अहम भूमिका रहेगी। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, ज्ञान, कौशल और परिश्रम को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि प्रदेश के मेधावी छात्र-छात्राएं भविष्य में भी सफलता के नए आयाम स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की उपलब्धियां दूसरे बच्चों को भी मेहनत करने और अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित करती हैं।
विकसित भारत के संकल्प में युवाओं की होगी अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में देश के युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उत्तराखंड के विद्यार्थियों को भी अपने ज्ञान, कौशल और मेहनत के माध्यम से इस लक्ष्य में योगदान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर प्रयास करना चाहिए। सफलता के लिए धैर्य, अनुशासन और सीखने की इच्छा जरूरी है। उन्होंने सम्मानित छात्र-छात्राओं से अपेक्षा जताई कि वे अपनी उपलब्धियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा बनाएं और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझें।
समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर परिणाम देने वाले विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को सम्मानित करना भी शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन के प्रयासों को पहचान देने का अवसर रहा। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के सामूहिक योगदान को शैक्षिक उपलब्धियों का महत्वपूर्ण आधार बताया।
शिक्षा मंत्री सहित कई अधिकारी रहे मौजूद
पंडित दीनदयाल उपाध्याय शैक्षिक उत्कृष्टता पुरस्कार वितरण समारोह में शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, विधायक सविता कपूर, सचिव शिक्षा ज्योति यादव, अपर सचिव शिक्षा नमामि बंसल सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
समारोह में मेधावी विद्यार्थियों और उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम देने वाले विद्यालयों को सम्मानित कर शिक्षा के क्षेत्र में मेहनत, अनुशासन और बेहतर प्रदर्शन को प्रोत्साहित किया गया। राज्य सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करने और विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराने के प्रयासों पर जोर दिया।
