देहरादून में बालिका शिक्षा प्रोत्साहन कार्यक्रम के दौरान मेधावी छात्राओं को स्मार्टफोन देकर सम्मानित करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।
देहरादून। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में कन्याओं को शक्ति का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है, लेकिन कन्या पूजन की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब बेटियों को समाज में सम्मान मिले, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराए जाएं।

रविवार को देहरादून स्थित आईआरटीडी प्रेक्षागार में आयोजित ‘बालिका शिक्षा प्रोत्साहन कार्यक्रम’ में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली 149 मेधावी बालिकाओं को स्मार्टफोन देकर सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने छात्राओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम का उद्देश्य मेधावी छात्राओं की उपलब्धियों को सम्मान देना और दूसरी बालिकाओं को भी पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करना रहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियां केवल अपने परिवार की खुशियों का आधार नहीं हैं, बल्कि वे समाज की प्रगति और देश के उज्ज्वल भविष्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए जरूरी है कि बेटियों को शिक्षा के साथ सुरक्षा, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस और नवरात्रि के संयोग पर दिया बेटियों के सम्मान का संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस और शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन का एक साथ होना विशेष संयोग है। भारतीय परंपरा में कन्याओं को देवी शक्ति का स्वरूप मानकर पूजा जाता है। इस परंपरा का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होगा, जब समाज बेटियों को उनके अधिकार, सम्मान और समान अवसर प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा कि बेटियों को केवल प्रतीकात्मक सम्मान देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें अच्छी शिक्षा, सुरक्षित वातावरण, आर्थिक सहयोग और अपनी प्रतिभा को निखारने के अवसर मिलना भी जरूरी है। परिवार और समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने से ही उन्हें अपने सपनों को पूरा करने का आत्मविश्वास मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने बालिकाओं से भी आह्वान किया कि वे अपनी क्षमता पर विश्वास रखें, बड़े लक्ष्य निर्धारित करें और निरंतर मेहनत के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से बेटियां अपने जीवन में नए अवसर हासिल कर सकती हैं और समाज के विकास में भी योगदान दे सकती हैं।
149 मेधावी छात्राओं को स्मार्टफोन, डिजिटल शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
बालिका शिक्षा प्रोत्साहन कार्यक्रम के तहत 149 मेधावी छात्राओं को स्मार्टफोन प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान दौर में डिजिटल तकनीक शिक्षा का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। इंटरनेट और डिजिटल उपकरणों की मदद से विद्यार्थियों को पढ़ाई से संबंधित सामग्री, नई जानकारियों और कौशल विकास के अवसरों तक पहुंच बनाने में सहायता मिलती है।
उन्होंने कहा कि मेधावी बालिकाओं को स्मार्टफोन देने का उद्देश्य उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ना और उनकी पढ़ाई को अधिक सुविधाजनक बनाना है। डिजिटल संसाधनों के उपयोग से छात्राएं अपनी पढ़ाई को बेहतर ढंग से आगे बढ़ा सकती हैं तथा ज्ञान के नए क्षेत्रों से परिचित हो सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राजकीय विद्यालयों में कक्षा 10वीं और 12वीं में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को टैबलेट उपलब्ध कराने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के माध्यम से धनराशि देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा के संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ से नंदा गौरा योजना तक, बालिकाओं के लिए कई पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं और बेटियों को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं और पहल शुरू की गई हैं। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना, नारी शक्ति वंदन अधिनियम और लखपति दीदी जैसी पहलों के माध्यम से महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर देने पर जोर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी बेटियों के जन्म से लेकर उनकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार तक विभिन्न स्तरों पर सहयोग देने का प्रयास कर रही है। सरकार का उद्देश्य यह है कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी भी बेटी की पढ़ाई प्रभावित न हो और वह अपनी योग्यता के अनुसार आगे बढ़ सके।
मुख्यमंत्री ने राज्य में संचालित योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही बालिकाओं की शिक्षा और आर्थिक सहायता के लिए भी योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
नंदा गौरा योजना में जन्म पर 11 हजार और 12वीं पास करने पर 51 हजार रुपये
मुख्यमंत्री ने नंदा गौरा योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को बेटी के जन्म पर 11 हजार रुपये और 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने पर 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। उनके अनुसार, इस योजना से अब तक चार लाख से अधिक बेटियां लाभान्वित हो चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि आर्थिक सहायता का उद्देश्य बालिकाओं के जन्म को प्रोत्साहित करने के साथ उनकी शिक्षा और भविष्य को बेहतर बनाने में परिवारों की मदद करना है।
मुख्यमंत्री महालक्ष्मी योजना के माध्यम से माताओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य एवं पोषण पर ध्यान दिया जा रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के तहत कठिन परिस्थितियों में जीवनयापन करने वाले बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
सरकार की इन पहलों का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को सहयोग देना और बच्चों को बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना है।
कक्षा एक से 12वीं तक मुफ्त किताबें, छात्रवृत्ति योजनाओं से भी प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री ने कहा कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विद्यालय स्तर पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी क्रम में राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा एक से 12वीं तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना और गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को आगे पढ़ने और अपनी प्रतिभा विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इसके अलावा निःशुल्क साइकिल योजना और महिला छात्रावासों के निर्माण जैसी पहलों के जरिए भी बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इन सुविधाओं से छात्राओं को पढ़ाई जारी रखने और शैक्षणिक अवसरों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के अवसर केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। राज्य की प्रत्येक बेटी को उसकी परिस्थितियों के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलना जरूरी है।
कौशल विकास और स्वरोजगार से जोड़ी जा रहीं महिलाएं और किशोरियां
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों को शिक्षा देने के साथ-साथ उन्हें कौशल विकास, नवाचार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना भी आवश्यक है। आज के समय में केवल शैक्षणिक योग्यता ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल और तकनीकी जानकारी भी आत्मनिर्भर बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने ड्रोन दीदी योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देने के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे महिलाओं के लिए तकनीक आधारित कार्यक्षेत्रों में आगे बढ़ने की संभावनाएं खुल सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने आलम्बन आर्ट, आलम्बन गांव और आलम्बन कैफे जैसी पहलों का भी जिक्र किया। इन पहलों के माध्यम से जरूरतमंद महिलाओं और किशोरियों को आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
इसके साथ ही नव्या 2.0 कार्यक्रम के माध्यम से हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर की किशोरियों एवं युवतियों को कौशल विकास और उद्यमिता का प्रशिक्षण देने की बात कही गई। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस तरह के प्रयास महिलाओं को रोजगार के लिए तैयार करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
बेटियों की सुरक्षा पर जोर, बाल विवाह और सामाजिक बुराइयों की रोकथाम प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों को आगे बढ़ने के लिए शिक्षा और अवसर उपलब्ध कराने के साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है। राज्य सरकार बाल विवाह और अन्य सामाजिक बुराइयों की रोकथाम के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि अनाथ बच्चों को राजकीय सेवाओं में पांच प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त पॉक्सो अधिनियम के तहत प्रभावित बच्चों को कानूनी सहायता और मानसिक देखभाल उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक जनपद में सपोर्ट पर्सन की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक बेटी को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वह बिना भय के शिक्षा प्राप्त कर सके और आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य की दिशा तय कर सके। उन्होंने बेटियों की सुरक्षा को परिवार, समाज और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी बताया।
नकल विरोधी कानून और सरकारी नौकरियों का भी किया उल्लेख
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने युवाओं की मेहनत और प्रतिभा का उल्लेख करते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में योग्य अभ्यर्थियों को अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं के हितों की रक्षा और भर्ती परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर रोक लगाने के लिए राज्य में कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया गया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में राज्य के 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिली हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को मेहनत, योग्यता और आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए।
उन्होंने मेधावी छात्राओं से अपील की कि वे अपनी उपलब्धियों को आगे की सफलता का आधार बनाएं। निरंतर अध्ययन, अनुशासन और मेहनत से वे अपने सपनों को पूरा कर सकती हैं।
रेखा आर्य ने कहा- मेधावी बालिकाओं का सम्मान दूसरी छात्राओं को भी करेगा प्रेरित
कार्यक्रम में महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए लगातार काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि बालिका शिक्षा प्रोत्साहन कार्यक्रम के तहत मेधावी छात्राओं को सम्मानित करने का उद्देश्य उनकी मेहनत और उपलब्धियों को पहचान देना है। इससे अन्य छात्राओं को भी पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने और अपने लक्ष्य हासिल करने की प्रेरणा मिलेगी।
रेखा आर्य ने कहा कि बेटियों को समान अवसर उपलब्ध कराना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना समाज के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने सम्मानित छात्राओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम में ये अधिकारी और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
देहरादून के आईआरटीडी प्रेक्षागार में आयोजित बालिका शिक्षा प्रोत्साहन कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास, अपर सचिव कर्मेंद्र सिंह, महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग के निदेशक बंशीलाल राणा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के माध्यम से बालिका शिक्षा, डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता, महिला सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के लक्ष्य के साथ सरकार बेटियों को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
