बागेश्वर के मंडलसेरा स्थित विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में बाल विज्ञान महोत्सव का शुभारंभ करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।
बागेश्वर। उत्तराखंड में स्कूली विद्यार्थियों के बीच विज्ञान, तकनीक, शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बागेश्वर में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मंडलसेरा स्थित विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) के तत्वावधान में आयोजित पांचवें सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव का मुख्यमंत्री ने शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने सीमांत जनपद विज्ञान महोत्सव और इससे जुड़े कार्यक्रमों के लिए एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश की STEM लैब्स को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जोड़ने, सभी विकासखंडों में एक-एक ‘लैब ऑन व्हील्स’ स्थापित करने की दिशा में काम करने और प्रदेश के सभी जिलों में विज्ञान एवं नवाचार केंद्र स्थापित करने की भी घोषणा की। इन पहलों का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों, नई तकनीकों और प्रयोग आधारित शिक्षा से जोड़ना है।
दो दिवसीय इस महोत्सव में चमोली, चंपावत, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ के कुल 240 चयनित बाल वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को अपनी वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और नए विचारों को सामने रखने का अवसर मिल रहा है।

STEM लैब्स में AI, हर ब्लॉक में लैब ऑन व्हील्स की तैयारी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विज्ञान शिक्षा को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बनाने पर जोर देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को स्कूल स्तर से ही नई तकनीकों से परिचित कराना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार विद्यालयों में विज्ञान एवं तकनीक आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए काम कर रही है।
उन्होंने STEM लैब्स को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जोड़ने की दिशा में काम करने की घोषणा की। STEM शिक्षा में विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित को एक साथ जोड़कर विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता है। इससे बच्चों को केवल किताबों तक सीमित रहने के बजाय प्रयोगों और वास्तविक समस्याओं के समाधान के माध्यम से सीखने का अवसर मिलता है।
इसके साथ ही सभी विकासखंडों में एक-एक ‘लैब ऑन व्हील्स’ स्थापित करने की दिशा में काम किया जाएगा। इस पहल के जरिए आधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाओं की सुविधाओं को विद्यार्थियों तक पहुंचाने की योजना है। खासतौर पर पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को विज्ञान के प्रयोगों और तकनीकी गतिविधियों से जोड़ने में ऐसी व्यवस्था उपयोगी हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी जनपदों में विज्ञान एवं नवाचार केंद्र स्थापित करने की भी घोषणा की। इन केंद्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने, नए विचारों पर काम करने और शोध की संभावनाओं को समझने का अवसर उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।
240 बाल वैज्ञानिकों की भागीदारी, छह पर्वतीय जिलों के विद्यार्थी शामिल
बागेश्वर के मंडलसेरा स्थित विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में आयोजित पांचवें सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव में छह जिलों के चयनित विद्यार्थी हिस्सा ले रहे हैं। इनमें चमोली, चंपावत, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ के कुल 240 बाल वैज्ञानिक शामिल हैं।
दो दिवसीय आयोजन का उद्देश्य सीमांत और पर्वतीय क्षेत्रों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को विज्ञान, तकनीक और नवाचार के लिए प्रोत्साहित करना है। ऐसे कार्यक्रम बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, नए विचार साझा करने और दूसरे विद्यार्थियों के अनुभवों से सीखने का अवसर प्रदान करते हैं।
महोत्सव के उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री ने बाल वैज्ञानिकों से संवाद किया और उनकी जिज्ञासाओं के जवाब दिए। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने के साथ-साथ नई चीजें सीखने, प्रयोग करने और सवाल पूछने की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए जिज्ञासा और लगातार सीखने की इच्छा महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को किसी विषय को केवल याद करने के बजाय उसे समझने और उसके पीछे के वैज्ञानिक कारणों को जानने का प्रयास करना चाहिए।
AI, रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक से जुड़ेगी स्कूली शिक्षा
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों को इन तकनीकों की जानकारी देना और उन्हें इनके व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराना जरूरी है।
राज्य सरकार विद्यालयी शिक्षा में आधुनिक तकनीक के समावेश को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को भविष्य में सामने आने वाली तकनीकी चुनौतियों और रोजगार की संभावनाओं के लिए तैयार करना है।
रोबोटिक्स के माध्यम से विद्यार्थी मशीनों और स्वचालित प्रणालियों को समझ सकते हैं, जबकि ड्रोन तकनीक का उपयोग कृषि, सर्वेक्षण, आपदा प्रबंधन और अन्य क्षेत्रों में किया जा सकता है। इसी तरह AI तकनीक के माध्यम से डेटा विश्लेषण, समस्या समाधान और विभिन्न कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाएं विकसित हो रही हैं।
मुख्यमंत्री ने विज्ञान और तकनीक को शिक्षा से जोड़ने के साथ महिला विकास एवं विज्ञान विषय पर सम्मेलन आयोजित करने की बात भी कही। इसका उद्देश्य विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी, अवसरों और योगदान से जुड़े विषयों पर चर्चा को प्रोत्साहित करना है।
‘आज के बाल वैज्ञानिक ही बनेंगे देश के भविष्य के वैज्ञानिक’
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बाल वैज्ञानिकों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि आज के विद्यार्थी ही भविष्य में देश के प्रमुख वैज्ञानिक, इंजीनियर और शोधकर्ता बन सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि बच्चों को बचपन से ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और नए प्रयोग करने के अवसर मिलें।
उन्होंने विद्यार्थियों से पूर्व राष्ट्रपति और प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन और विचारों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए और उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर मेहनत करनी चाहिए।
उन्होंने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि इस लक्ष्य को साकार करने में युवा पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में विद्यार्थियों की भागीदारी देश को आगे बढ़ाने में योगदान दे सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत एवं पर्वतीय क्षेत्रों में आयोजित विज्ञान महोत्सव विद्यार्थियों की प्रतिभा को सामने लाने के साथ उनमें रचनात्मकता, तार्किक सोच और नवाचार की भावना विकसित करने का माध्यम हैं।
देहरादून में साइंस सिटी, चंपावत में विकसित हो रहा साइंस सेंटर
मुख्यमंत्री ने विज्ञान के क्षेत्र में राज्य में विकसित की जा रही सुविधाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि देहरादून में साइंस सिटी और चंपावत में साइंस सेंटर विकसित किया जा रहा है।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य विज्ञान के प्रति आम लोगों और विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाना तथा वैज्ञानिक अवधारणाओं को अधिक सरल और व्यावहारिक तरीके से समझने के अवसर उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान एवं तकनीक का उपयोग केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। इनके माध्यम से सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और स्मार्ट कृषि जैसी व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाने की संभावनाएं भी विकसित की जा रही हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक तकनीक का लाभ समाज के अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
कृषि, बागवानी और होमस्टे में स्वरोजगार की संभावनाओं पर जोर
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय उत्पादों और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन, मौन पालन और होमस्टे जैसे क्षेत्रों में स्वरोजगार की संभावनाओं को बढ़ावा देने की बात कही। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल के आधार पर आजीविका के अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार, विज्ञान और तकनीक का उपयोग इन क्षेत्रों में काम करने के तरीकों को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से कृषि उत्पादन, संसाधनों के बेहतर उपयोग और स्थानीय उत्पादों की पहचान को मजबूत करने की संभावनाएं हैं।
विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षक सम्मानित
बाल विज्ञान महोत्सव के दौरान विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने कविता हरकोटिया, दीप चंद जोशी, हरिमोहन ऐठाणी और ख्याली दत्त को पुरस्कार प्रदान किए।
शिक्षकों की भूमिका विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने और उन्हें प्रयोग आधारित शिक्षा के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे आयोजनों में शिक्षकों को सम्मानित करने से विज्ञान शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को पहचान मिलती है।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों, शिक्षकों और बाल वैज्ञानिकों की उपस्थिति रही।
इस अवसर पर कपकोट विधायक सुरेश गड़िया, बागेश्वर विधायक पार्वती दास, दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री शिव सिंह बिष्ट, भूपेश उपाध्याय, जिला पंचायत अध्यक्ष शोभा आर्या, भाजपा प्रदेश महामंत्री कुंदन सिंह परिहार, यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत, जिलाधिकारी अपूर्वा पाण्डे, पुलिस अधीक्षक जितेंद्र मेहरा, मुख्य विकास अधिकारी नरेश कुमार और विद्यालय के प्रधानाचार्य अव्वल सिंह तोपाल सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक एवं बाल वैज्ञानिक मौजूद रहे।
विज्ञान शिक्षा को मजबूत करने पर जोर
बागेश्वर में आयोजित पांचवां सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव विज्ञान शिक्षा को विद्यार्थियों के अधिक करीब लाने के प्रयासों का हिस्सा है। मुख्यमंत्री की घोषणाओं में STEM लैब्स को AI से जोड़ना, सभी विकासखंडों में लैब ऑन व्हील्स स्थापित करने की दिशा में काम करना और सभी जिलों में विज्ञान एवं नवाचार केंद्र स्थापित करना प्रमुख है।
इन घोषणाओं को लागू करने की प्रक्रिया और इनके क्रियान्वयन से जुड़ी विस्तृत जानकारी आगे सामने आने पर यह स्पष्ट होगा कि इन सुविधाओं का लाभ विद्यार्थियों तक किस प्रकार और किस समय-सीमा में पहुंचेगा। फिलहाल, महोत्सव के माध्यम से पर्वतीय जिलों के विद्यार्थियों को विज्ञान, शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
