देहरादून में आयोजित संविधान हत्या दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके परिजनों को सम्मानित किया।
देहरादून। संविधान हत्या दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल को एक काला अध्याय बताते हुए कहा कि उस दौर में नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन किया गया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास हुआ। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के साहस, संघर्ष और त्याग के कारण ही देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की पुनर्स्थापना संभव हो सकी।

गुरुवार को देहरादून के जीएमएस रोड स्थित एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिजनों को सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सभी सेनानियों को नमन करते हुए उनके योगदान को देश और समाज के लिए अमूल्य बताया।
‘आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय’

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि 25 जून 1975 को लागू किया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐसा दौर था, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि उस समय सत्ता को बचाने के लिए नागरिक स्वतंत्रताओं को सीमित किया गया, प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया और संविधान की मूल भावना को आघात पहुंचाने का प्रयास हुआ।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनता में निहित होती है और देश की जागरूक जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देते हुए लोकतंत्र की पुनर्स्थापना सुनिश्चित की।
लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए हजारों लोगों ने संघर्ष किया, जेल गए और अनेक कठिनाइयों का सामना किया। आज उन्हीं लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष की बदौलत देश मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों का योगदान केवल इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि वह वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। इसलिए उनके संघर्ष और बलिदान की गाथा को युवाओं तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
‘संविधान ने दिए हैं अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक अधिकार’
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और लोकतांत्रिक अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान इन मूल अधिकारों को सीमित करने का प्रयास किया गया था, लेकिन लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले लोगों ने इसका मजबूती से विरोध किया।
उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए नागरिकों का सजग और जागरूक रहना बेहद आवश्यक है।
मोदी सरकार की नीतियों का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के सिद्धांतों पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ देश के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अंत्योदय और राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ भारत निरंतर विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है।
लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान के लिए राज्य सरकार की पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान और कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में लोकतंत्र सेनानियों को दी जाने वाली सम्मान निधि को 16 हजार रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया।
इसके अलावा आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले लोकतंत्र सेनानियों तथा उनके आश्रित जीवनसाथियों को विशेष पहचान-पत्र भी उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि उन्हें विभिन्न सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल सके।
विकसित भारत और श्रेष्ठ उत्तराखंड के निर्माण का आह्वान
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा, संविधान के सम्मान और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने सभी लोगों से विकसित भारत और श्रेष्ठ उत्तराखंड के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया गया और उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, खजान दास, विधायक सविता कपूर, उमेश शर्मा काऊ, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेन्द्र बिष्ट, भाजपा प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार तथा महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
