देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित बन्नू बिरादरी के दशहरा महोत्सव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विजयादशमी के अवसर पर प्रदेशवासियों से भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने और सत्य, धर्म तथा मर्यादा के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। देहरादून के परेड ग्राउंड में बन्नू बिरादरी की ओर से आयोजित दशहरा महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दशहरा केवल रावण के पुतले के दहन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर मौजूद बुराइयों को पहचानने और उन्हें दूर करने का भी अवसर है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए सभी के सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, कर्तव्यनिष्ठा, संयम और आदर्श आचरण का प्रतीक है। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज में सद्भाव, नैतिक मूल्यों और परस्पर सम्मान को मजबूत किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने दशहरा महोत्सव के आयोजन के लिए बन्नू बिरादरी के पदाधिकारियों, सदस्यों और आयोजन समिति से जुड़े लोगों को बधाई भी दी। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास, बन्नू बिरादरी के पदाधिकारी, आयोजन समिति के प्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।

अहंकार और अधर्म का अंत, सत्य और धर्म की जीत का प्रतीक है विजयादशमी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विजयादशमी का पर्व हमें सत्य की शक्ति और धर्म के महत्व का संदेश देता है। भगवान श्रीराम और रावण के प्रसंग से यह सीख मिलती है कि अहंकार और अधर्म चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न दिखाई दें, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है।
उन्होंने कहा कि रावण के पास अपार संपत्ति, सामर्थ्य और विशाल सेना थी, लेकिन उसका अहंकार और मर्यादा का उल्लंघन उसके पतन का कारण बना। इसके विपरीत भगवान श्रीराम ने अपने जीवन में संयम, त्याग, कर्तव्यपालन और सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा का परिचय दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिता के वचन का सम्मान करते हुए भगवान श्रीराम ने राजसुख छोड़कर 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। यह प्रसंग बताता है कि जीवन में सिद्धांतों, कर्तव्यों और मर्यादा का कितना महत्व है। उनके आदर्श आज भी व्यक्ति, परिवार और समाज को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
केवल पुतला जलाना नहीं, अपने भीतर की बुराइयों को मिटाना भी है दशहरे का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि दशहरा आत्ममंथन और आत्मशुद्धि का भी पर्व है। जिस प्रकार रावण के पुतले का दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, उसी तरह प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, लोभ और नकारात्मक प्रवृत्तियों को समाप्त करने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाज में भ्रष्टाचार, अन्याय, नशे और महिलाओं के प्रति हिंसा जैसी बुराइयों को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। केवल सरकार के प्रयासों से ही सामाजिक बुराइयों का पूरी तरह अंत नहीं हो सकता, बल्कि इसके लिए नागरिकों की जागरूकता और सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत करने, आपसी सद्भाव बनाए रखने और हर व्यक्ति के प्रति सम्मान का भाव विकसित करने से ही बेहतर सामाजिक वातावरण तैयार किया जा सकता है।
सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने और कानून-व्यवस्था पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड में सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया है। उनके अनुसार, इस अभियान के तहत 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराया गया है।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वाले दंगाइयों से क्षतिपूर्ति वसूलने के उद्देश्य से सख्त दंगारोधी कानून लागू किया गया है। धर्म और आस्था के नाम पर लोगों को गुमराह करने तथा धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को समानता और न्याय की भावना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपराओं की रक्षा करने के साथ शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
युवाओं को रोजगार और पारदर्शी भर्ती पर मुख्यमंत्री ने रखी बात
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को उनकी योग्यता, मेहनत और प्रतिभा के आधार पर आगे बढ़ने के अवसर मिलना जरूरी है। इसके लिए भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और नकल जैसी अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि नकल रोकने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां मिली हैं।
उन्होंने शिक्षा के महत्व पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना आवश्यक है। बच्चों में ज्ञान, नवाचार और तार्किक सोच विकसित करने से उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ राज्य के विकास में उनकी भागीदारी भी बढ़ाते हैं।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और सुशासन को लेकर सरकार का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन का आधार पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता है। राज्य सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत काम कर रही है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंच सके।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की आर्थिक प्रगति के लिए निवेश, उद्यमिता और रोजगार के अवसरों का विस्तार महत्वपूर्ण है। स्थानीय व्यापारियों, उद्यमियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) का राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम योगदान है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, आर्थिक विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना चाहिए। इसके साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना और प्रदेश की विकास यात्रा में सभी की भागीदारी सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
न्याय, समानता और जनकल्याण ही रामराज्य की मूल भावना
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरित रामराज्य की अवधारणा न्याय, सुशासन, समानता और जनकल्याण पर आधारित है। ऐसी व्यवस्था में प्रत्येक व्यक्ति को न्याय मिले, समाज में नैतिक मूल्यों का सम्मान हो और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के संकल्प के साथ काम कर रही है। विकास के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान, आध्यात्मिक परंपराओं और प्राकृतिक विरासत का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराएं प्रदेश की पहचान और शक्ति हैं। इनका संरक्षण करते हुए विकास को आगे बढ़ाना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रहें।
विजयादशमी पर मुख्यमंत्री की अपील: सत्य, धर्म और मर्यादा का रास्ता अपनाएं
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से विजयादशमी के अवसर पर भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि सत्य, धर्म, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा के रास्ते पर चलकर ही समाज को बेहतर बनाया जा सकता है।
उन्होंने ऐसे उत्तराखंड के निर्माण पर जोर दिया, जहां प्रत्येक नागरिक को न्याय मिले, युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हों, महिलाओं को सुरक्षित वातावरण मिले और विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री के अनुसार, सामाजिक सद्भाव, नैतिक मूल्यों और जनकल्याण को प्राथमिकता देना भगवान श्रीराम के आदर्शों के प्रति सच्ची श्रद्धा है। विजयादशमी का पर्व भी यही संदेश देता है कि बुराई पर अच्छाई की जीत केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार और जीवन में भी दिखाई देनी चाहिए।
