घर से बेबी सूट बनाने का काम शुरू करने वाली नैनीताल की सबाना अब महिलाओं को Embroidery और Applique Work का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बना रही हैं।
नैनीताल। उत्तराखंड में महिलाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बीच नैनीताल की सबाना की कहानी मेहनत, हुनर और अवसर के बेहतर तालमेल की प्रेरक मिसाल बनकर सामने आती है। कभी घर से सीमित संसाधनों के बीच छोटे स्तर पर बेबी सूट तैयार करने से शुरू हुआ उनका काम आज न केवल उनकी अपनी आय का जरिया बन चुका है, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी रोजगार और आत्मनिर्भरता का रास्ता तैयार कर रहा है।

सबाना ने अपने हुनर को केवल अपने तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने प्रशिक्षण के माध्यम से Embroidery (कढ़ाई) और Applique Work सीखा और धीरे-धीरे अपने काम का विस्तार किया। आज वह स्वयं एक प्रशिक्षक के रूप में अन्य महिलाओं को इन पारंपरिक और रचनात्मक कौशलों का प्रशिक्षण दे रही हैं।
छोटे स्तर से शुरू हुआ सफर

सबाना ने अपने काम की शुरुआत घर से की थी। शुरुआत में संसाधन सीमित थे और काम भी छोटे स्तर पर था। उन्होंने बेबी सूट तैयार करने से अपने हुनर को आजमाना शुरू किया।
शुरुआत भले ही छोटी थी, लेकिन आगे बढ़ने का उनका हौसला बड़ा था। उन्होंने अपने काम को बेहतर बनाने के लिए नए कौशल सीखने पर ध्यान दिया। इसी दौरान उन्हें Embroidery और Applique Work का प्रशिक्षण मिला।
प्रशिक्षण के बाद उन्होंने घर पर अलग-अलग तरह के कपड़ों और अन्य उत्पादों पर कढ़ाई तथा एप्लिक वर्क करना शुरू किया। धीरे-धीरे उनके उत्पादों में गुणवत्ता और विविधता आने लगी और उन्हें अपने काम को बाजार तक पहुंचाने के अवसर मिलने लगे।
Artisan Card ने बढ़ाए बाजार के रास्ते
सबाना को हस्तशिल्प विभाग की ओर से Artisan Card मिलने के बाद उनके लिए बाजार तक पहुंच के नए रास्ते खुले। स्थानीय स्तर पर घर से उत्पाद तैयार करने के बाद उन्हें विभिन्न प्रदर्शनियों और मेलों में अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और बेचने का अवसर मिला।
इन आयोजनों ने उनके उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे उन्हें न केवल अपने उत्पाद बेचने का अवसर मिला, बल्कि ग्राहकों की पसंद और बाजार की मांग को समझने में भी मदद मिली।
NABARD के सहयोग से मिला बड़ा मंच
सबाना के काम को आगे बढ़ाने में NABARD के सहयोग से आयोजित विभिन्न मेलों और प्रदर्शनियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन आयोजनों के माध्यम से उन्हें अपने उत्पादों को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने और बाजार उपलब्ध कराने के अवसर मिले।
एक छोटे घरेलू काम से शुरू हुआ सफर अब धीरे-धीरे बाजार से जुड़ने लगा। इससे सबाना का आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने अपने काम को आगे ले जाने का निर्णय लिया।
अपने साथ दूसरी महिलाओं को भी जोड़ा
सबाना की सफलता की खास बात यह है कि उन्होंने अपने हुनर और रोजगार के अवसर को केवल खुद तक सीमित नहीं रखा। जब उनका काम बढ़ने लगा तो उन्होंने आसपास की अन्य महिलाओं को भी Embroidery और Applique Work का प्रशिक्षण देना शुरू किया।
प्रशिक्षण लेने वाली महिलाएं अब उनके साथ मिलकर विभिन्न ऑर्डर तैयार करने में सहयोग करती हैं। इस तरह एक महिला की ओर से घर से शुरू किया गया छोटा काम धीरे-धीरे कई महिलाओं के लिए रोजगार और आय का माध्यम बन गया।
यह मॉडल महिला सशक्तिकरण की उस सोच को मजबूती देता है, जिसमें महिलाओं को केवल रोजगार पाने वाला नहीं, बल्कि रोजगार उपलब्ध कराने वाला बनाने पर जोर दिया जाता है।
अब खुद प्रशिक्षक बनकर सिखा रहीं हुनर
सबाना आज स्वयं Trainer के रूप में महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही हैं। उनका प्रयास है कि अधिक से अधिक महिलाएं अपने हुनर को पहचानें, उसे बेहतर बनाएं और उसे आय के साधन में बदलें।
वह महिलाओं को Embroidery और Applique Work जैसे कौशल सिखाने के साथ उन्हें उत्पाद तैयार करने और बाजार की जरूरत के अनुसार काम करने के लिए भी प्रेरित करती हैं।
सबाना का मानना है कि यदि महिलाओं को सही प्रशिक्षण, उचित अवसर और बाजार उपलब्ध हो तो वे घर से ही अपना काम शुरू कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
बड़े बाजार तक उत्पाद पहुंचाने का लक्ष्य
सबाना का सफर अभी थमा नहीं है। उनका लक्ष्य आने वाले समय में अधिक से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार से जोड़ना है। इसके साथ ही वह अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाना चाहती हैं।
स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले हस्तशिल्प उत्पादों को बेहतर बाजार मिलने से कारीगर महिलाओं की आय बढ़ सकती है। साथ ही स्थानीय हुनर और पारंपरिक कला को भी नई पहचान मिल सकती है।
आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
सबाना की कहानी यह दिखाती है कि आत्मनिर्भरता के लिए हमेशा बड़े निवेश या बड़े कारोबार से शुरुआत जरूरी नहीं होती। कई बार घर में मौजूद हुनर, सीखने की इच्छा और सही अवसर मिलकर छोटे काम को भी रोजगार के बड़े माध्यम में बदल सकते हैं।
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में महिलाओं की स्वरोजगार में भागीदारी ग्रामीण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हस्तशिल्प, कढ़ाई, स्थानीय उत्पाद और अन्य पारंपरिक कौशलों को बाजार से जोड़कर महिलाओं के लिए आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
सबाना की कहानी इसी बदलाव की एक तस्वीर है—घर से शुरू हुआ काम, प्रशिक्षण से निखरा हुनर, बाजार से मिली पहचान और अब दूसरी महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का प्रयास।
उनकी सफलता यह संदेश देती है कि हुनर को अवसर और बाजार मिल जाए तो छोटा प्रयास भी आत्मनिर्भरता की बड़ी कहानी लिख सकता है।
