देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ किसान-केंद्रित मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया।
देहरादून। उत्तराखंड के किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक नई पहल की गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में मनोरमा डबराल जन कल्याण समिति द्वारा तैयार किए गए किसान-केंद्रित मोबाइल ऐप ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ का शुभारंभ किया। इस ऐप को किसानों और स्वयं सहायता समूहों की रोजमर्रा की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है।

ऐप लॉन्च करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने इस पहल के लिए संस्था के पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल किसानों तक जरूरी जानकारी और सेवाएं तेजी से पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से किसानों को सही समय पर मौसम, फसल और बाजार से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
किसानों के लिए एक ही प्लेटफॉर्म पर कई सुविधाएं

‘मनोरमा कृषि रक्षक’ ऐप की खासियत यह है कि इसमें किसानों से जुड़ी अलग-अलग आवश्यकताओं को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। ऐप के जरिए किसानों को रियल टाइम मौसम की जानकारी और मौसम संबंधी अलर्ट मिलने की सुविधा दी गई है।
मौसम की जानकारी किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि बारिश, तापमान में बदलाव, तेज हवाएं या अन्य मौसम संबंधी परिस्थितियां फसलों के उत्पादन पर सीधा असर डाल सकती हैं। ऐसे में समय रहते अलर्ट मिलने पर किसान अपनी फसल और कृषि गतिविधियों को लेकर आवश्यक सावधानी बरत सकते हैं।
AI से होगी फसल रोग की पहचान
ऐप में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित फसल रोग पहचान की सुविधा भी शामिल की गई है। इसके जरिए तकनीक की मदद से फसलों में दिखाई देने वाले संभावित रोगों की पहचान करने और किसानों को फसल संबंधी आवश्यक सलाह उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।
फसल में बीमारी की समय पर पहचान होने से किसान उचित कदम उठा सकते हैं। डिजिटल माध्यम से कृषि संबंधी सलाह उपलब्ध होने से किसानों को जानकारी हासिल करने के लिए अलग-अलग स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
फसल के अनुसार मिलेगी कृषि सलाह
‘मनोरमा कृषि रक्षक’ में फसल-विशिष्ट कृषि सलाह की सुविधा भी रखी गई है। यानी अलग-अलग फसलों की जरूरत के अनुसार किसानों तक कृषि संबंधी जानकारी पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
इसमें खेती से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी उपलब्ध कराने की योजना है, जिससे किसान अपने उत्पादन से संबंधित निर्णय अधिक जानकारी के आधार पर ले सकें। तकनीक के जरिए कृषि ज्ञान को गांव और खेत तक पहुंचाना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य बताया गया है।
बाजार की जानकारी से लेकर लॉजिस्टिक्स तक की सुविधा
किसानों के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके उत्पाद को उचित बाजार तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए ऐप में कृषि और बाजार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की सुविधा भी शामिल की गई है।
इसके अलावा ऐप में परिवहन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सुविधाओं को भी शामिल करने का प्रयास किया गया है। इससे किसान अपनी कृषि उपज को बाजार तक पहुंचाने से जुड़ी आवश्यकताओं के लिए डिजिटल सहायता प्राप्त कर सकेंगे।
स्वयं सहायता समूहों को भी मिलेगा फायदा
‘मनोरमा कृषि रक्षक’ को सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और ग्रामीण उद्यमों को बाजार से जोड़ने से संबंधित सुविधाओं को भी शामिल किया गया है।
उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूह स्थानीय उत्पादों, कृषि आधारित वस्तुओं और अन्य ग्रामीण उत्पादों के निर्माण से जुड़े हैं। ऐसे समूहों के लिए बाजार तक पहुंच बनाना एक महत्वपूर्ण चुनौती होती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से इन समूहों और ग्रामीण उद्यमों को बाजार से जोड़ने की कोशिश उनके उत्पादों की पहुंच बढ़ाने में मददगार हो सकती है।
उत्पादन से बाजार तक डिजिटल सहयोग देने का लक्ष्य
समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, ऐप को विकसित करते समय किसानों की व्यावहारिक जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। इसका उद्देश्य किसानों को केवल खेती से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि कृषि उत्पादन से लेकर बाजार तक विभिन्न चरणों में डिजिटल सहयोग उपलब्ध कराना है।
किसानों को मौसम, फसल, रोग, बाजार, परिवहन और लॉजिस्टिक्स जैसी जरूरतों के लिए एक ही प्लेटफॉर्म पर सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास इसी दिशा में उठाया गया कदम है।
तकनीक के जरिए खेती को आसान बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आधुनिक तकनीक का सही उपयोग कृषि क्षेत्र को अधिक सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। किसानों को समय पर सही जानकारी मिलने से वे मौसम और फसल से जुड़े जोखिमों को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इस तरह की तकनीकी पहलें किसानों और स्वयं सहायता समूहों तक आवश्यक सेवाएं आसानी से पहुंचाने में उपयोगी साबित हो सकती हैं। राज्य में कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल भविष्य में और अधिक प्रभावी हो सकता है।
कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद
‘मनोरमा कृषि रक्षक’ ऐप के शुभारंभ के अवसर पर कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में मनोरमा डबराल जन कल्याण समिति की ओर से कमला डबराल, राजेश डबराल, अंशुल, प्रांजल नौडियाल और सूरवीर सिंह कठैत सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
