महंगी किताबें और अतिरिक्त शुल्क वसूली के आरोप में नैनीताल जिले के 12 और निजी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी।
हल्द्वानी। Haldwani में निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल ने 12 और निजी विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

इस कार्रवाई के बाद अब जनपद नैनीताल में नोटिस पाने वाले निजी स्कूलों की संख्या बढ़कर 101 हो गई है। इससे पहले हल्द्वानी, लालकुआं, भीमताल, भवाली और रामनगर क्षेत्र के 89 विद्यालयों को नोटिस भेजे जा चुके थे।
किन स्कूलों को जारी हुआ नोटिस

कारण बताओ नोटिस प्राप्त करने वाले स्कूलों में शामिल हैं:
- St. Lawrence School
- Dikshant International School
- KVM Public School
- Mount Litera Zee School
- Delhi Public School
- Orom The Global School
- Jas Govin School
- DAV School
- Naini Valley School
- Gurukul International School
- Shivalik International School
- TRV School
क्या हैं स्कूलों पर लगे मुख्य आरोप
जांच में सामने आया है कि कई निजी स्कूलों ने एनसीईआरटी की सस्ती और निर्धारित पुस्तकों के बजाय महंगी निजी प्रकाशनों की किताबें अनिवार्य कर दी थीं। इससे अभिभावकों पर हजारों रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा था।
इसके अलावा कुछ स्कूलों पर आरोप है कि वे अभिभावकों को तय दुकानों या विक्रेताओं से ही किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री खरीदने के लिए अप्रत्यक्ष दबाव बना रहे थे।
प्रशासन ने यह भी पाया कि कई स्कूल अपनी वेबसाइट पर फीस संरचना, पुस्तक सूची और अन्य जरूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं कर रहे थे, जो नियमों का उल्लंघन माना गया है।
किन कानूनों के तहत हो रही कार्रवाई
जिला प्रशासन की यह कार्रवाई निम्न प्रावधानों और आदेशों के तहत की जा रही है:
- बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019
- माननीय उच्च न्यायालय के आदेश
प्रशासन का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, सस्ती और अभिभावक हितैषी बनाना प्राथमिकता है।
स्कूलों को दिए गए बड़े निर्देश
मुख्य शिक्षा अधिकारी की ओर से संबंधित विद्यालयों को 15 दिनों के भीतर कई निर्देशों का पालन करने को कहा गया है:
1. NCERT किताबों को प्राथमिकता
विद्यालयों को संशोधित पुस्तक सूची जारी कर एनसीईआरटी पुस्तकों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
2. तय दुकानों की बाध्यता खत्म
किसी विशेष विक्रेता या दुकान से किताबें खरीदने की बाध्यता तत्काल समाप्त करनी होगी।
3. वेबसाइट पर पूरी जानकारी देना जरूरी
स्कूलों को अपनी वेबसाइट पर फीस स्ट्रक्चर, पुस्तक सूची और अन्य अनिवार्य जानकारी सार्वजनिक करनी होगी।
4. अभिभावकों को राहत
जो अभिभावक पहले ही अनावश्यक किताबें खरीद चुके हैं, उनके लिए धनवापसी या फीस में समायोजन की व्यवस्था करनी होगी।
5. अतिरिक्त शुल्क का समायोजन
शिक्षण शुल्क के अलावा लिए गए अवांछित शुल्कों को आगामी महीनों की फीस में एडजस्ट करना होगा।
जांच के लिए बनाई गई संयुक्त समिति
जिलाधिकारी के निर्देश पर विकासखंड स्तर पर संयुक्त जांच समितियां गठित की गई हैं। ये समितियां संबंधित स्कूलों की जांच कर 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेंगी।
नियम नहीं माने तो हो सकती है बड़ी कार्रवाई
प्रशासन ने साफ किया है कि यदि तय समय सीमा के भीतर आदेशों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित स्कूलों के खिलाफ:
- मान्यता निलंबन
- मान्यता निरस्तीकरण
- कानूनी कार्रवाई
- दंडात्मक कार्रवाई
जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे।
अभिभावकों में बढ़ी उम्मीद
जिला प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अभिभावकों में राहत और उम्मीद का माहौल है। लंबे समय से निजी स्कूलों में महंगी किताबों, अतिरिक्त शुल्क और मनमानी खरीद व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं।
अब प्रशासन के सख्त रुख से अभिभावकों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
