गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में अक्टूबर 2026 का सत्र शुरू। मार्च के बाद इस साल दूसरी बार आयोजित हो रही है विधानसभा की कार्यवाही।
गैरसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आज से विधानसभा सत्र शुरू हो गया है। इस सत्र के साथ ही राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी में वर्ष 2026 के दौरान दूसरी बार विधानसभा की कार्यवाही आयोजित होने का महत्वपूर्ण घटनाक्रम जुड़ गया है। इससे पहले इसी साल मार्च में भराड़ीसैंण में बजट सत्र आयोजित किया गया था। अब अक्टूबर में एक बार फिर विधानसभा सत्र होने से गैरसैंण की विधायी गतिविधियों में अहमियत बढ़ी है।

गैरसैंण में विधानसभा सत्रों का आयोजन लंबे समय से उत्तराखंड की राजनीति, पर्वतीय क्षेत्रों के विकास और क्षेत्रीय जनभावनाओं से जुड़ा विषय रहा है। पहाड़ की भौगोलिक परिस्थितियों, दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जरूरतों और विकास से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए भराड़ीसैंण में विधानसभा की कार्यवाही को महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में वर्ष 2026 में मार्च और अक्टूबर, दोनों महीनों में सत्र आयोजित होना राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी के लिहाज से उल्लेखनीय है।
एक साल में दूसरी बार भराड़ीसैंण पहुंची विधानसभा
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में इस साल दूसरी बार विधानसभा सत्र आयोजित किया जा रहा है। मार्च में यहां बजट सत्र के बाद अक्टूबर में दोबारा विधानसभा की कार्यवाही शुरू होना इस बात को रेखांकित करता है कि गैरसैंण राज्य की विधायी गतिविधियों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

विधानसभा सत्र के दौरान प्रदेश से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा और जनहित के मुद्दों को सदन में उठाने का अवसर मिलता है। पर्वतीय जिलों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पेयजल, पर्यटन और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवालों को लेकर भी गैरसैंण में होने वाली कार्यवाही पर लोगों की नजर रहती है।
हालांकि, किसी सत्र में किन मुद्दों पर चर्चा होगी और कौन से प्रस्ताव सदन में आएंगे, यह विधानसभा की कार्यसूची और कार्यवाही पर निर्भर करता है।
2014 में शुरू हुआ था गैरसैंण में विधानसभा सत्रों का सिलसिला
गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। इसके बाद से भराड़ीसैंण में समय-समय पर विधानसभा की कार्यवाही संचालित होती रही है। हालांकि, हर साल यहां सत्र आयोजित नहीं हुआ। कुछ वर्षों में विधानसभा की बैठकें नहीं हुईं, जबकि कुछ वर्षों में एक बार सत्र बुलाया गया। वर्ष 2025 और 2026 में एक ही साल के भीतर दो-दो सत्र आयोजित होने का क्रम सामने आया है।
गैरसैंण में अब तक आयोजित विधानसभा सत्रों का वर्षवार विवरण इस प्रकार है।
गैरसैंण में कब-कब आयोजित हुए विधानसभा सत्र?
वर्ष 2014: गैरसैंण में पहली बार तीन दिवसीय विधानसभा सत्र आयोजित किया गया। यह राज्य की विधायी गतिविधियों को पर्वतीय क्षेत्र तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत थी।
वर्ष 2015: भराड़ीसैंण में दो दिन तक विधानसभा की कार्यवाही चली।
वर्ष 2016: इस वर्ष भी गैरसैंण में दो दिवसीय विधानसभा सत्र आयोजित किया गया।
वर्ष 2017: विधानसभा का दो दिवसीय सत्र हुआ।
वर्ष 2018: गैरसैंण में विधानसभा की कार्यवाही छह दिनों तक चली। उपलब्ध वर्षवार विवरण के अनुसार, यह शुरुआती वर्षों के लंबे सत्रों में शामिल रहा।
वर्ष 2019: इस वर्ष गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित नहीं हुआ।
वर्ष 2020: भराड़ीसैंण में पांच दिवसीय विधानसभा सत्र आयोजित किया गया।
वर्ष 2021: एक से छह मार्च तक गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में छह दिवसीय बजट सत्र चला।
वर्ष 2022: इस साल गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित नहीं हुआ।
वर्ष 2023: गैरसैंण में चार दिवसीय विधानसभा सत्र आयोजित किया गया।
वर्ष 2024: इस वर्ष विधानसभा की कार्यवाही तीन दिनों तक चली।
वर्ष 2025: गैरसैंण में बजट सत्र और मानसून सत्र आयोजित किए गए। इस तरह एक ही वर्ष में दो बार विधानसभा की कार्यवाही भराड़ीसैंण तक पहुंची।
वर्ष 2026: मार्च में बजट सत्र के बाद अक्टूबर में दूसरी बार विधानसभा सत्र आयोजित किया जा रहा है। इससे लगातार दो वर्षों में एक ही साल के भीतर दो बार गैरसैंण में विधानसभा की कार्यवाही होने का क्रम बना है।
पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के लिए क्यों महत्वपूर्ण है गैरसैंण?
गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा प्राप्त है। राज्य के पर्वतीय भूगोल और क्षेत्रीय विकास की जरूरतों को देखते हुए यहां विधानसभा सत्र आयोजित करने का अपना महत्व है। उत्तराखंड के कई पर्वतीय क्षेत्र आज भी सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, रोजगार, पलायन और स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसरों जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
ऐसे में गैरसैंण में विधानसभा की कार्यवाही आयोजित होने से इन विषयों पर चर्चा की अपेक्षा की जाती है। पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं को नीति निर्माण और सरकारी निर्णयों से जोड़ने के लिहाज से भी भराड़ीसैंण का महत्व है।
हालांकि, गैरसैंण में सत्र आयोजित करना अपने आप में विकास की गारंटी नहीं है। इसका वास्तविक लाभ तभी दिखाई देगा, जब यहां उठाए जाने वाले जनहित के मुद्दों पर प्रभावी चर्चा हो और संबंधित योजनाओं तथा निर्णयों को धरातल पर लागू किया जाए।
जनभावनाओं और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है गैरसैंण: मुख्यमंत्री धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गैरसैंण को उत्तराखंड की जनभावनाओं और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बताया है। उनका कहना है कि राज्य सरकार का प्रयास है कि ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित कर पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं, लोगों की अपेक्षाओं और विकास से जुड़े विषयों को प्राथमिकता दी जाए।
मुख्यमंत्री के अनुसार, गैरसैंण की भूमिका को मजबूत बनाना और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित विकास को गति देना सरकार की प्रतिबद्धता है। राज्य सरकार जनभावनाओं के अनुरूप विकास और सुशासन के संकल्प के साथ काम कर रही है।
सरकार के इस दृष्टिकोण के तहत गैरसैंण को केवल विधानसभा सत्र आयोजित करने के स्थान के रूप में नहीं, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों की जरूरतों और विकास संबंधी मुद्दों को महत्व देने वाले केंद्र के रूप में भी देखा जा रहा है।
गैरसैंण की भूमिका को मजबूत बनाने पर रहेगी नजर
वर्ष 2026 में मार्च और अक्टूबर में विधानसभा सत्र आयोजित होने से गैरसैंण एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। यह घटनाक्रम राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी में विधायी गतिविधियों को जारी रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि विधानसभा सत्र के दौरान पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं, विकास योजनाओं, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विषयों को कितनी प्राथमिकता मिलती है। साथ ही, सदन में होने वाली चर्चा और लिए जाने वाले निर्णयों का लाभ दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों तक किस तरह पहुंचता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
गैरसैंण में विधानसभा सत्रों का नियमित और प्रभावी आयोजन राज्य की क्षेत्रीय विकास संबंधी प्राथमिकताओं को मजबूत करने का माध्यम बन सकता है। इसके लिए जरूरी है कि सदन में उठने वाले मुद्दों को ठोस नीतियों, समयबद्ध कार्ययोजनाओं और प्रभावी क्रियान्वयन से जोड़ा जाए।
फिलहाल, मार्च के बाद अक्टूबर में दूसरी बार विधानसभा सत्र आयोजित होना गैरसैंण के लिए वर्ष 2026 का अहम घटनाक्रम है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी स्पष्ट किया है कि सरकार पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित विकास और जनभावनाओं के अनुरूप सुशासन को प्राथमिकता देने के लिए प्रतिबद्ध है।
