गाजियाबाद में विद्या भारती के 37वें अखिल भारतीय खेलकूद समारोह के समापन अवसर पर विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।
गाजियाबाद। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि खेल केवल जीत और हार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये देश की अलग-अलग संस्कृतियों, भाषाओं और परंपराओं को एक-दूसरे से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी हैं। जब देश के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों से आने वाले खिलाड़ी एक मंच पर जुटते हैं, तो वहां पूरे भारत की विविधता और एकता की झलक दिखाई देती है। हिमालय के सीमांत क्षेत्रों से लेकर कन्याकुमारी और पश्चिमी सीमाओं से लेकर पूर्वोत्तर तक के खिलाड़ियों की एक साथ मौजूदगी वास्तव में लघु भारत का दर्शन कराती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बुधवार को गाजियाबाद में विद्या भारती की ओर से आयोजित 37वें अखिल भारतीय खेलकूद समारोह-2026 के समापन समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया और विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। मुख्यमंत्री ने प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले सभी खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
उन्होंने कहा कि इस तरह के राष्ट्रीय स्तर के खेल आयोजनों से खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। साथ ही अलग-अलग राज्यों से आए युवाओं को एक-दूसरे के रहन-सहन, भाषा, संस्कृति और परंपराओं को करीब से जानने का मौका भी मिलता है।

खेल का मैदान देश की विविधता को एकता में बदलने का माध्यम: धामी
मुख्यमंत्री ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सांस्कृतिक विविधता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में भाषाएं, पहनावे, खानपान और परंपराएं भले ही अलग हों, लेकिन राष्ट्रीय एकता की भावना सभी को एक सूत्र में बांधती है।
उन्होंने कहा कि गाजियाबाद में आयोजित इस खेल समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए खिलाड़ियों को एक साथ देखकर उन्हें बेहद खुशी हो रही है। हिमालयी क्षेत्रों से लेकर दक्षिण भारत के कन्याकुमारी तक और पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्रों से लेकर पूर्वोत्तर भारत तक के खिलाड़ियों की भागीदारी इस आयोजन को खास बनाती है।
मुख्यमंत्री ने अपने विद्यार्थी जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि छात्र जीवन में खेलों का अपना अलग महत्व होता है। खेल का मैदान ऐसा स्थान है, जहां व्यक्ति की पहचान उसकी भाषा, वेशभूषा या क्षेत्र से नहीं, बल्कि उसकी मेहनत, अनुशासन और प्रदर्शन से होती है।
उन्होंने कहा कि खेल प्रतियोगिताएं युवाओं को आपसी सहयोग, टीम भावना, अनुशासन और एक-दूसरे का सम्मान करने की सीख देती हैं। इस तरह के आयोजनों से राष्ट्रीय एकता की भावना भी मजबूत होती है।
शिक्षा के साथ संस्कार और राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा रही विद्या भारती
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विद्या भारती के शैक्षिक और सामाजिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि संस्था केवल बच्चों को शिक्षा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके भीतर संस्कार, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का भी काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1952 में गोरखपुर में पहले सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना के साथ शुरू हुई विद्या भारती की यात्रा आज देश के अनेक राज्यों और क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, संस्था सीमांत क्षेत्रों, ग्रामीण इलाकों, जनजातीय क्षेत्रों और समाज के वंचित वर्गों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उत्तराखंड में भी विद्या भारती के विद्यालय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी देश का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी पर निर्भर करता है। युवाओं को अच्छी शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार, अनुशासन और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने की प्रेरणा देना भी जरूरी है।
स्वस्थ शरीर ही जीवन के लक्ष्यों को हासिल करने का आधार
मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति और परंपरा में शारीरिक स्वास्थ्य को दिए गए महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ शारीरिक विकास भी व्यक्ति के सर्वांगीण विकास का जरूरी हिस्सा है।
उन्होंने भारतीय शास्त्रों के प्रसिद्ध वाक्य ‘शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्’ का उल्लेख करते हुए इसका अर्थ समझाया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर ही जीवन के कर्तव्यों को पूरा करने और अपने लक्ष्यों को हासिल करने का आधार है।
धामी ने कहा कि खेलकूद से बच्चों और युवाओं में शारीरिक क्षमता विकसित होती है। इसके साथ ही उनमें आत्मविश्वास, धैर्य, संघर्ष करने की क्षमता और कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का साहस पैदा होता है।
उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ खेलों को भी पर्याप्त महत्व दिया जाना चाहिए, ताकि युवा शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से मजबूत बन सकें।
निषाद कुमार का उदाहरण देकर खिलाड़ियों को दिया सफलता का मंत्र
मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने के लिए पेरिस पैरालंपिक-2024 में रजत पदक जीतने वाले भारतीय पैरा एथलीट निषाद कुमार का उदाहरण भी दिया।
उन्होंने कहा कि निषाद कुमार की उपलब्धि यह बताती है कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, यदि व्यक्ति के भीतर दृढ़ संकल्प, लगातार अभ्यास और मेहनत करने की इच्छाशक्ति है, तो वह बड़ी से बड़ी सफलता हासिल कर सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलों में सफलता पाने के लिए प्रतिभा के साथ अनुशासन, नियमित अभ्यास और आत्मविश्वास भी जरूरी है। किसी भी खिलाड़ी को अपनी असफलताओं से निराश होने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने उम्मीद जताई कि 37वें अखिल भारतीय खेलकूद समारोह में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ी भी आने वाले समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे और देश का नाम रोशन करेंगे।
खेलो इंडिया और फिट इंडिया से बढ़ रही खेलों के प्रति जागरूकता
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ जैसी पहल ने युवाओं के बीच खेल और फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इन योजनाओं और अभियानों के माध्यम से देश में खेल संस्कृति को मजबूत करने के साथ युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले खेलों में आगे बढ़ने के अवसर सीमित माने जाते थे, लेकिन अब सामान्य और ग्रामीण परिवारों से आने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भी अपनी क्षमता साबित करने के लिए बेहतर मंच मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि खेलों को केवल मनोरंजन या शौक के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इन्हें युवाओं के करियर और देश की प्रतिष्ठा से जोड़कर भी समझना चाहिए।
उत्तराखंड में खेल सुविधाओं के विस्तार पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी प्रदेश में खेलों को प्रोत्साहित करने और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने, प्रशिक्षण की बेहतर व्यवस्था करने और खेल संसाधनों का विस्तार करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों में भी प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि इन युवाओं को सही समय पर उचित प्रशिक्षण, संसाधन और अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों के खिलाड़ी भी राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपनी पहचान बना सकें। उन्होंने कहा कि युवाओं को खेलों में बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रोत्साहित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
विजेता खिलाड़ियों को दी बधाई, आयोजकों के प्रयासों को सराहा
समारोह के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सभी विजेता खिलाड़ियों को बधाई दी। उन्होंने प्रतियोगिता में शामिल हुए अन्य खिलाड़ियों की भी सराहना करते हुए कहा कि किसी भी खेल आयोजन में भागीदारी अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि होती है।
उन्होंने खिलाड़ियों से अपील की कि वे जीत से उत्साहित रहें और हार से सीख लेकर अपनी तैयारी जारी रखें। निरंतर अभ्यास और मेहनत के जरिए ही खेलों में बेहतर मुकाम हासिल किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने 37वें अखिल भारतीय खेलकूद समारोह के सफल आयोजन के लिए विद्या भारती के पदाधिकारियों, आचार्यों, प्रशिक्षकों और आयोजन से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं की भी प्रशंसा की।
कार्यक्रम में श्री महेश गुप्ता, विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के महामंत्री देशराज शर्मा, अखिल भारतीय सह-संगठन मंत्री यतीन्द्र कुमार शर्मा, अखिल भारतीय संयोजक खेल विभाग मुक्तेश बगेशा, डॉ. विजय पाल सहित संस्था के पदाधिकारी, शिक्षक और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
