चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ जी की उत्सव डोली गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में विराजमान हुई। अब छह महीने यहीं होगी पूजा-अर्चना।
चमोली। उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल चतुर्थ केदार भगवान श्री रुद्रनाथ जी की उत्सव डोली शीतकालीन प्रवास के लिए गोपेश्वर स्थित श्री गोपीनाथ मंदिर पहुंच गई है। यहां विधि-विधान के साथ उत्सव डोली को शीतकालीन गद्दीस्थल पर विराजमान कराया गया। इस दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल रहा। सैकड़ों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान रुद्रनाथ जी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

डोली के गोपेश्वर पहुंचने पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने पारंपरिक वाद्ययंत्र ढोल-दमाऊं तथा भजन-कीर्तन के साथ स्वागत किया। भगवान रुद्रनाथ जी की उत्सव डोली के आगमन से गोपीनाथ मंदिर परिसर में धार्मिक उत्साह देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर भगवान से सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
शीतकाल के लिए बंद हुए रुद्रनाथ धाम के कपाट

चमोली जिले में स्थित चतुर्थ केदार रुद्रनाथ धाम के कपाट शनिवार देर शाम शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए थे। कपाट बंद होने के बाद भगवान रुद्रनाथ जी की उत्सव डोली परंपरागत पैदल यात्रा करते हुए अपने शीतकालीन गद्दीस्थल गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर के लिए रवाना हुई।
पैदल यात्रा पूरी करने के बाद उत्सव डोली गोपेश्वर पहुंची, जहां धार्मिक परंपराओं के अनुसार उसका स्वागत किया गया। इसके बाद विधि-विधान के साथ डोली को गोपीनाथ मंदिर में विराजमान कराया गया। इस तरह रुद्रनाथ धाम की शीतकालीन पूजा व्यवस्था शुरू हो गई है।
अब छह महीने गोपीनाथ मंदिर में होगी पूजा-अर्चना
रुद्रनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने के बाद अब आगामी छह महीनों तक भगवान रुद्रनाथ जी की नियमित पूजा-अर्चना गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में की जाएगी। इस अवधि में श्रद्धालु रुद्रनाथ धाम के बजाय गोपीनाथ मंदिर पहुंचकर भगवान के दर्शन कर सकेंगे।
उत्तराखंड की धार्मिक परंपराओं में शीतकालीन प्रवास का विशेष महत्व है। सर्दियों में ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में मौसम प्रतिकूल होने के कारण कई धामों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इसके बाद संबंधित देव विग्रहों या उत्सव डोलियों को निर्धारित शीतकालीन पूजा स्थलों पर लाया जाता है, जहां नियमित धार्मिक अनुष्ठान जारी रहते हैं।
चतुर्थ केदार के रूप में प्रसिद्ध है रुद्रनाथ धाम
भगवान रुद्रनाथ जी का धाम उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है और पंच केदार परंपरा में इसे चतुर्थ केदार के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है। हिमालयी क्षेत्र में स्थित यह धाम भगवान शिव के उपासकों के लिए गहरी आस्था का केंद्र है।
रुद्रनाथ धाम तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पैदल यात्रा करनी पड़ती है। प्राकृतिक सुंदरता, पर्वतीय रास्तों और आध्यात्मिक वातावरण के कारण यह यात्रा धार्मिक महत्व के साथ-साथ हिमालयी पर्यटन के लिहाज से भी खास मानी जाती है। हर वर्ष यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान रुद्रनाथ जी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
यात्रा सीजन में श्रद्धालुओं ने किए भगवान रुद्रनाथ के दर्शन
इस वर्ष यात्रा सीजन के दौरान भी रुद्रनाथ धाम में श्रद्धालुओं की आवाजाही रही। बड़ी संख्या में भक्तों ने धाम पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। यात्रा अवधि समाप्त होने के साथ ही अब धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं।
उत्सव डोली के गोपेश्वर पहुंचने के बाद अब श्रद्धालुओं के लिए शीतकालीन दर्शन की व्यवस्था गोपीनाथ मंदिर में रहेगी। अगले छह महीने तक यहां होने वाली पूजा-अर्चना के साथ भगवान रुद्रनाथ जी की धार्मिक परंपराएं जारी रहेंगी।
इस प्रकार रुद्रनाथ धाम में शीतकालीन प्रवास की प्रक्रिया पूरी हो गई है और भगवान रुद्रनाथ जी की उत्सव डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल पर विराजमान हो गई है।
