नई दिल्ली में The Economic Times World Leaders Forum 2026 को संबोधित करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।
नई दिल्ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में आयोजित The Economic Times World Leaders Forum 2026 में उत्तराखंड के विकास मॉडल और भविष्य की प्राथमिकताओं को देश-दुनिया के सामने रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाते हुए तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का फोकस केवल बड़े प्रोजेक्ट और निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को रोजगार, महिलाओं को आत्मनिर्भरता, सीमांत क्षेत्रों को बेहतर सुविधाएं और आम लोगों को सुशासन देने पर भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड आज निवेश, पर्यटन, कनेक्टिविटी, रोजगार, तकनीक, सुशासन और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी से बदलाव की ओर बढ़ रहा है। सरकार की कोशिश है कि विकास का लाभ प्रदेश के अंतिम छोर पर रहने वाले व्यक्ति तक पहुंचे और पहाड़ों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर पलायन की चुनौती को कम किया जा सके।
UCC से सुशासन और समान अधिकारों का मॉडल

मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता (UCC) को उत्तराखंड के महत्वपूर्ण सुधारों में शामिल करते हुए कहा कि राज्य ने इसे लागू कर देश के सामने समान अधिकार और सुशासन का एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार UCC लागू होने के बाद प्रदेश में सकारात्मक वातावरण बना है और महिलाओं, बच्चों तथा बुजुर्गों के अधिकारों को मजबूती मिली है।
सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड से शुरू हुई समान नागरिक संहिता की पहल अब देश के दूसरे राज्यों को भी समानता और न्याय की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है।
SDG रैंकिंग से निवेश तक, उत्तराखंड की बढ़ी साख
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग की SDG रैंकिंग में उत्तराखंड ने शीर्ष स्थान हासिल किया है। इसके साथ ही पर्वतीय और पूर्वोत्तर राज्यों की श्रेणी में निवेश के अनुकूल नीतिगत वातावरण तैयार करने में भी उत्तराखंड ने बेहतर प्रदर्शन किया है।
सरकार का लक्ष्य प्रदेश में ऐसा इकोसिस्टम तैयार करना है, जहां निवेशकों को बेहतर नीतियां और सुविधाएं मिलें तथा निवेश का सीधा फायदा स्थानीय युवाओं और उद्यमियों को रोजगार के रूप में मिले।
सरकारी नौकरियों में बढ़ी रफ्तार, 34 हजार से अधिक युवाओं को नियुक्ति
रोजगार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने सरकार की उपलब्धियों को प्रमुखता से सामने रखा। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के बाद करीब दो दशकों में लगभग 16 हजार सरकारी नियुक्तियां हुई थीं, जबकि पिछले पांच वर्षों में ही 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी गई है।
उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। पेपर लीक और नकल जैसे मामलों पर सख्त कार्रवाई की गई है। नकल माफिया के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 100 लोगों को जेल भेजा गया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार भर्ती प्रक्रिया में किए गए सुधारों से युवाओं का सरकारी भर्ती व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हुआ है।
शिक्षा व्यवस्था में समानता और गुणवत्ता पर जोर
सीएम धामी ने शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था में समानता, गुणवत्ता और आधुनिकता को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने राज्य में मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सभी वर्गों को साथ लेकर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए। मानकों के अनुरूप संचालित नहीं हो रहे 250 से अधिक मदरसों के खिलाफ कार्रवाई का भी उन्होंने जिक्र किया।
सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ अभियान
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ भी राज्य में व्यापक अभियान चलाया गया है। इसका उद्देश्य सरकारी जमीन को सुरक्षित करना और सार्वजनिक संपत्तियों का संरक्षण करना है।
उन्होंने कहा कि विकास के लिए भूमि और सार्वजनिक संसाधनों का सुरक्षित रहना जरूरी है और सरकार इस दिशा में लगातार कार्रवाई कर रही है।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद बदली औद्योगिक तस्वीर
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को उत्तराखंड की औद्योगिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में आयोजित इस समिट में 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।
सीएम धामी ने कहा कि सरकार ने निवेश प्रस्तावों को केवल MoU तक सीमित रखने के बजाय उन्हें धरातल पर उतारने पर जोर दिया। निवेशकों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से राज्य में 30 से अधिक नई नीतियां बनाई गई हैं।
इन नीतियों का उद्देश्य निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाना है।
सड़क, रेल और रोपवे से मजबूत हो रही कनेक्टिविटी
उत्तराखंड की विकास यात्रा में कनेक्टिविटी को अहम बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क, रेल और रोपवे परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है।
उन्होंने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब 125 किलोमीटर लंबी यह परियोजना आने वाले समय में उत्तराखंड की कनेक्टिविटी को नई गति देगी। इससे चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सुविधा मिलने के साथ पर्वतीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
दिल्ली-देहरादून की दूरी हुई कम
मुख्यमंत्री ने दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कॉरिडोर के शुरू होने से राष्ट्रीय राजधानी और देहरादून के बीच यात्रा का समय काफी कम हुआ है।
उन्होंने बताया कि देहरादून से देश के प्रमुख शहरों के लिए 50 से अधिक हवाई सेवाएं उपलब्ध हैं। हरिद्वार को राज्य के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल बताते हुए उन्होंने पंतनगर को कृषि और उद्योग दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण केंद्र बताया।
पंतनगर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को भी उन्होंने औद्योगिक और लॉजिस्टिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।
चारधाम और कांवड़ यात्रा से पर्यटन अर्थव्यवस्था को ताकत
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की पर्यटन क्षमता को राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा और आदि कैलाश यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार चारधाम यात्रा के प्रथम चरण में ही 47 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे, जबकि कांवड़ यात्रा में करीब 4.80 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का उल्लेख उन्होंने किया।
आदि कैलाश यात्रा को लेकर भी मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के बाद इस क्षेत्र में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।
12 महीने पर्यटन पर फोकस, विंटर टूरिज्म को बढ़ावा
उत्तराखंड सरकार अब पर्यटन को केवल गर्मियों या चारधाम यात्रा के मौसम तक सीमित नहीं रखना चाहती। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बारह महीने पर्यटन को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के साथ साहसिक पर्यटन और विंटर टूरिज्म पर विशेष जोर दिया जा रहा है। हर्षिल-मुखवा जैसे क्षेत्रों को शीतकालीन पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
इसका सीधा लाभ होमस्टे, ढाबे, छोटे होटल, परिवहन और स्थानीय उत्पादों से जुड़े लोगों को मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि सर्दियों में भी पहाड़ों में आर्थिक गतिविधियां जारी रहें और लोगों को रोजगार के लिए अपने गांव छोड़कर नीचे की ओर न जाना पड़े।
सीमांत गांवों को ‘प्रथम गांव’ के रूप में विकसित करने की योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों के विकास को सरकार विशेष प्राथमिकता दे रही है। आदि कैलाश जैसे सीमांत क्षेत्रों में बढ़ते पर्यटन को इसका उदाहरण बताते हुए उन्होंने कहा कि सीमांत गांवों को ‘प्रथम गांव’ की अवधारणा के तहत विकसित किया जा रहा है।
इन गांवों में सड़क, बिजली, पानी, इंटरनेट, पर्यटन और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर है। सरकार का उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों को केवल भौगोलिक सीमा के रूप में नहीं, बल्कि विकास और पर्यटन के नए केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
AI और तकनीक के दौर में ‘फ्यूचर रेडी’ उत्तराखंड
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के भविष्य के विकास में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), विज्ञान, तकनीक और नवाचार की भूमिका को भी रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वही राज्य आगे बढ़ेंगे जो नई तकनीकों को तेजी से अपनाएंगे। उत्तराखंड में नवाचार नीति लागू की गई है और सरकार आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ावा दे रही है।
मुख्यमंत्री के अनुसार AI और तकनीकी नवाचार का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन, उद्योग, पर्यटन और रोजगार समेत कई क्षेत्रों में बदलाव ला सकता है।
निवेशकों के लिए बेहतर माहौल, उद्योगों को मजबूत आधार
सीएम धामी ने कहा कि उद्योगों के विकास के लिए मजबूत कानून-व्यवस्था और निर्बाध विद्युत आपूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
सरकार की कोशिश है कि उत्तराखंड निवेशकों के लिए भरोसेमंद और अनुकूल डेस्टिनेशन बने। नए उद्योग स्थापित होने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
विकास के साथ पर्यावरण संतुलन पर जोर
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के विकास मॉडल को आर्थिक प्रगति और पर्यावरणीय संतुलन से जोड़ते हुए कहा कि पहाड़ी राज्य के लिए विकास की अपनी अलग चुनौतियां हैं। ऐसे में सरकार का प्रयास है कि बुनियादी ढांचे और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देते हुए पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की विकास यात्रा का उद्देश्य केवल बड़े प्रोजेक्ट और निवेश नहीं, बल्कि ऐसा समावेशी मॉडल तैयार करना है जिसमें युवाओं को रोजगार, महिलाओं को आत्मनिर्भरता, सीमांत क्षेत्रों को नई पहचान, निवेशकों को बेहतर वातावरण और आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलें।
जनवरी 2027 के हरिद्वार कुंभ का दिया न्योता
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में विकास परियोजनाओं के साथ बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की तैयारियां भी व्यापक स्तर पर की जा रही हैं।
उन्होंने जनवरी 2027 में होने वाले हरिद्वार कुंभ का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार कुंभ के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने में जुटी है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों और देशवासियों को आगामी हरिद्वार कुंभ में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया।
