हरेला पर्व के अवसर पर आर्डन प्रोग्रेसिव स्कूल, लामाचौड़ में कुमाऊँनी वेशभूषा, लोकनृत्य, पारंपरिक व्यंजन और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत करते विद्यार्थी।
हल्द्वानी। उत्तराखंड के लोकजीवन, प्रकृति और संस्कृति से जुड़े प्रमुख पर्व हरेला को लामाचौड़ स्थित आर्डन प्रोग्रेसिव स्कूल में पूरे उत्साह, पारंपरिक रंग और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया। विद्यालय परिसर लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर नजर आया, जहां विद्यार्थियों ने पारंपरिक कुमाऊँनी वेशभूषा, लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक व्यंजन और चित्रकला के माध्यम से उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत हरेला पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए की गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि हरेला केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति, हरियाली, कृषि परंपरा और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है। इस पर्व के माध्यम से नई फसल, हरियाली और खुशहाली की कामना की जाती है।
कुमाऊँनी संस्कृति की दिखी खूबसूरत झलक

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने पारंपरिक कुमाऊँनी वेशभूषा पहनकर उत्तराखंड की लोक संस्कृति का शानदार प्रदर्शन किया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे बच्चों ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। विद्यालय परिसर में ऐसा माहौल बना मानो उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत जीवंत हो उठी हो।
पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
हरेला कार्यक्रम का सबसे विशेष आकर्षण कुमाऊँनी पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी रही। विद्यार्थियों ने विभिन्न पारंपरिक व्यंजन तैयार कर उनकी प्रदर्शनी लगाई। बच्चों ने इन व्यंजनों की विशेषताओं, उनके स्वाद, पोषण और उत्तराखंड की संस्कृति में उनके महत्व की जानकारी भी उपस्थित लोगों को दी। अभिभावकों और शिक्षकों ने बच्चों के इस प्रयास की सराहना की।
चित्रकला के माध्यम से दिया हरियाली बचाने का संदेश
हरेला पर्व के अवसर पर विद्यार्थियों ने प्रकृति, हरियाली, वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण विषय पर आकर्षक चित्र भी बनाए। बच्चों की रचनात्मकता और कल्पनाशीलता उनकी चित्रकला में साफ दिखाई दी। इन चित्रों के माध्यम से प्रकृति के संरक्षण और अधिक से अधिक पौधे लगाने का संदेश दिया गया।
लोकगीत और लोकनृत्य ने बांधा समां
सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने कुमाऊँनी लोकगीतों और लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। पारंपरिक संगीत और लोकनृत्य की प्रस्तुति ने उपस्थित सभी लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में मौजूद अभिभावकों और अतिथियों ने बच्चों की प्रतिभा की जमकर सराहना की।
प्रकृति संरक्षण का लिया संकल्प
विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों ने विद्यार्थियों को हरेला पर्व का महत्व बताते हुए पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हरेला केवल एक सांस्कृतिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का भी प्रतीक है। सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने और पर्यावरण को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने का संकल्प लिया।
विद्यालय प्रशासन ने दी शुभकामनाएं
कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय प्रशासन ने सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं दीं। साथ ही सभी से पर्यावरण संरक्षण को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाने और उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
विद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम बच्चों के लिए केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि अपनी जड़ों, लोक संस्कृति और प्रकृति के महत्व को समझने का एक प्रेरणादायक अवसर भी बना।
