मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हर्रावाला रेलवे स्टेशन से 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के तहत वेरावल (सोमनाथ) के लिए विशेष रेल यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। छह दिवसीय यात्रा में लगभग 700 श्रद्धालु शामिल हुए।
देहरादून। देहरादून के हर्रावाला रेलवे स्टेशन से सोमवार को ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अवसर पर वेरावल (गुजरात) स्थित सोमनाथ धाम के लिए विशेष रेल यात्रा का शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरी झंडी दिखाकर इस विशेष ट्रेन को रवाना किया। छह दिन की इस यात्रा में उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से लगभग 700 श्रद्धालु शामिल हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने यात्रा पर जाने वाले सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय स्वाभिमान और सनातन परंपरा से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
विभिन्न वर्गों के श्रद्धालु बने यात्रा का हिस्सा

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस विशेष यात्रा में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं, विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थी, संत समाज के प्रतिनिधि तथा समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग शामिल हुए हैं। उन्होंने इस पहल के लिए संस्कृति विभाग की सराहना करते हुए सभी यात्रियों की सुखद, सुरक्षित और मंगलमय यात्रा की कामना की।
उन्होंने कहा कि इस तरह की यात्राएं लोगों को देश की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक महत्व से जोड़ने के साथ-साथ सामाजिक समरसता को भी मजबूत करती हैं।
‘सोमनाथ भारत के स्वाभिमान और पुनर्जागरण का प्रतीक’
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल सोमनाथ मंदिर भारत की अटूट आस्था, अदम्य विश्वास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई बार मंदिर पर आक्रमण हुए, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ। यह भारत की उस शक्ति का प्रतीक है, जो हर चुनौती के बाद और अधिक मजबूती से आगे बढ़ती है।
उन्होंने कहा कि ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि राष्ट्रबोध, सांस्कृतिक गौरव और भारतीय सभ्यता के सम्मान का उत्सव है।
देश में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर दिया जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और धार्मिक स्थलों के विकास को नई गति मिली है। अयोध्या, काशी विश्वनाथ, केदारनाथ, बद्रीनाथ, महाकाल और सोमनाथ जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों का व्यापक विकास भारत की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा दे रहा है।
उन्होंने कहा कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थान नहीं हैं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा की जीवंत पहचान भी हैं।
उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में तेजी
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लक्ष्य पर तेजी से कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं—
- केदारखंड और मानसखंड मंदिर क्षेत्रों का विकास एवं सौंदर्यीकरण।
- हरिपुर कालसी स्थित यमुनातीर्थ का पुनरुद्धार।
- हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर परियोजना।
- शारदा कॉरिडोर परियोजना।
- भारतीय संस्कृति और दर्शन के अध्ययन के लिए दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज की स्थापना।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना है।
सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए सरकार के प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और मूल स्वरूप को सुरक्षित रखने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून और दंगारोधी कानून लागू किए गए हैं। इसके अलावा अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाकर 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार यह केवल सरकारी भूमि को मुक्त कराने का अभियान नहीं, बल्कि देवभूमि की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को सुरक्षित रखने का प्रयास भी है।
समान नागरिक संहिता और शिक्षा सुधार का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे सभी नागरिकों के लिए समान कानून और समान न्याय व्यवस्था सुनिश्चित हुई है।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए किए गए कदमों का भी जिक्र किया और कहा कि राज्य में अवैध मदरसों पर कार्रवाई की गई है तथा शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
श्रद्धालुओं से किया विशेष आह्वान
मुख्यमंत्री ने यात्रा पर जा रहे सभी श्रद्धालुओं से कहा कि वे जहां भी जाएं, वहां उत्तराखंड की संस्कृति, संस्कार और ‘अतिथि देवो भवः’ की परंपरा का परिचय दें।
उन्होंने कहा कि सभी यात्री केवल सोमनाथ के दर्शन के लिए नहीं जा रहे हैं, बल्कि वे देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपरा और सकारात्मक पहचान के प्रतिनिधि भी हैं। उन्होंने सभी से अपने व्यवहार और आचरण के माध्यम से उत्तराखंड की गरिमा को और मजबूत बनाने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
इस अवसर पर विधायक बृज भूषण गैरोला, देहरादून के मेयर सौरभ थपलियाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
