मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पांडेय की अध्यक्षता में आयोजित SARA समीक्षा बैठक में गौला और लदिया नदी के पुनर्जीविकरण तथा नौले-धारों के संरक्षण की कार्ययोजना पर चर्चा की गई।
नैनीताल। नैनीताल जिले में जल स्रोतों के संरक्षण और नदियों के पुनर्जीविकरण की दिशा में प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शुक्रवार को मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पांडेय की अध्यक्षता में स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवनेशन अथॉरिटी (SARA) की समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिले के प्राकृतिक जल स्रोतों को संरक्षित करने और उन्हें पुनर्जीवित करने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने गौला नदी और लदिया नदी के पुनर्जीविकरण के लिए संबंधित विभागों को ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने खंड विकास अधिकारियों तथा सिंचाई विभाग से कहा कि वैज्ञानिक और व्यवहारिक योजना बनाकर जल्द कार्य शुरू किया जाए, ताकि भविष्य में जल संरक्षण को मजबूत किया जा सके।
नौले-धारों के संरक्षण पर विशेष जोर

मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में पारंपरिक जल स्रोत यानी नौले और धार स्थानीय लोगों के लिए जीवनरेखा हैं। ऐसे में इनके संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए चल रहे कार्यों में तेजी लाई जानी चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों से समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।
झीलों के संरक्षण के लिए WWF से सहयोग की संभावना
बैठक में WWF Wetland India के हेड डॉ. अमित दुबे ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। उन्होंने संस्था द्वारा देशभर में किए जा रहे वेटलैंड और जल स्रोत संरक्षण कार्यों की जानकारी साझा की। साथ ही नैनीताल की झीलों के संरक्षण और पुनर्जीविकरण के लिए तकनीकी सहयोग और संयुक्त प्रयासों की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में जिला विकास अधिकारी गोपाल गिरी गोस्वामी, प्रभागीय उपनिदेशक डॉ. एस.के. उपाध्याय सहित वन विभाग, सिंचाई विभाग, लघु सिंचाई, पेयजल एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर जल संरक्षण की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया गया।
प्रशासन का लक्ष्य
प्रशासन का उद्देश्य न केवल नदियों और पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण करना है, बल्कि भविष्य में जल संकट की संभावनाओं को कम करना, भूजल स्तर को बेहतर बनाना और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करना भी है। यदि योजनाओं पर प्रभावी ढंग से अमल होता है तो इसका लाभ स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यावरण और पर्यटन क्षेत्र को भी मिलेगा।
