भैया दूज पर परंपरागत पूजा-अर्चना के बाद मां यमुना की डोली यमुनोत्री से खरसाली रवाना
उत्तरकाशी। भैया दूज के पावन अवसर पर आज यमुनोत्री धाम के कपाट विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर मंत्रोच्चार और परंपरागत पूजा-अर्चना के बीच कपाटों को बंद किया गया।

कपाट बंद होने के साथ ही मां यमुना की डोली अपने शीतकालीन प्रवास के लिए खरसाली गांव रवाना हुई, जहां अगले छह माह तक श्रद्धालु मां यमुना के दर्शन कर सकेंगे। कपाट बंद होते ही पूरा यमुनोत्री धाम “जय मां यमुना” के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों और तीर्थ पुरोहितों ने भावभीनी विदाई के साथ मां यमुना की डोली को खरसाली की ओर प्रस्थान कराया।
खरसाली में मां यमुना का शीतकालीन प्रवास

यमुनोत्री धाम की देवी मां यमुना की डोली खरसाली गांव पहुंचने पर भक्तों ने दीपों से भव्य स्वागत किया। पूरा गांव भक्ति गीतों और भजन संध्याओं से जगमगा उठा। गांव में मंदिर परिसर को फूलों, रंगोली और दीपों से सजाया गया है। शीतकाल के दौरान मां यमुना यहीं विराजमान रहेंगी और श्रद्धालु इस दौरान खरसाली मंदिर में जाकर दर्शन व पूजा-अर्चना कर सकेंगे।
भक्ति और आस्था का अनोखा संगम
कपाट बंद होने के अवसर पर हजारों श्रद्धालु यमुनोत्री धाम पहुंचे। इस दौरान आचार्यों और पुजारियों ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा संपन्न कर मां यमुना से सबके कल्याण की कामना की। दीपों की रोशनी से सजी खरसाली की गलियां और जय मां यमुना के जयकारे इस अवसर को और भी पवित्र बना रहे थे।
अगले छह माह खरसाली में होंगे दर्शन
अब आने वाले छह महीनों तक मां यमुना के शीतकालीन दर्शन खरसाली गांव में ही होंगे। जब गर्मी की शुरुआत के साथ चारधाम यात्रा दोबारा शुरू होगी, तब मां यमुना की डोली को फिर से यमुनोत्री धाम लाया जाएगा।
