दक्षिण कोरिया को 4-1 से हराकर एशिया कप 2025 का खिताब जीतने के बाद ट्रॉफी के साथ जश्न मनाती भारतीय पुरुष हॉकी टीम।
बिहार। बिहार के राजगीर में आयोजित एशिया कप 2025 के फाइनल में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने यादगार प्रदर्शन करते हुए दक्षिण कोरिया को करारा 4-1 से मात देकर आठ साल बाद एशिया कप का खिताब वापस अपने नाम कर लिया। यह जीत न सिर्फ खिताबी खुशी लेकर आई, बल्कि 2026 हॉकी विश्व कप के लिए सीधे क्वालीफिकेशन की राह भी खोल दी।

खेल की शुरुआत से ही भारतीय खिलाड़ियों ने विपक्षी घेरा तोड़ने का संकेत दे दिया था। सुखजीत सिंह ने पहले ही मिनट में बढ़त दिलाई, जिससे भारत को आत्मविश्वास की लहर मिली। उसके तुरंत बाद दिलप्रीत सिंह ने दो गोल (28′ और 45′) कर भारतीय बढ़त को और मजबूत कर दिया, जबकि अमित रोहिदास (50′) ने चौथा गोल दागकर जीत पक्की कर दी। दक्षिण कोरिया ने 51वें मिनट में डेन सोन के द्वारा एक गोल किया, लेकिन उससे इन शानदार प्रदर्शन को रोक नहीं पाया।
इस जीत के साथ, भारत ने एशिया में फिर से अपनी ताकत साबित की। भारत का यह चौथा एशिया कप खिताब है (2003, 2007, 2017 के बाद) और सिर्फ एक खिताब कोरिया से पीछे है, जिसने पांच खिताब जीते हैं।

टूर्नामेंट का सफर: चुनौतियों से पार, शिखर तक
भारतीय टीम का सफर फाइनल तक आसान नहीं था। सुपर-4 चरण में कोरिया से ड्रॉ (2-2) खेलने के बाद मलेशिया को 4-1 और चीन को 7-0 से हराकर टीम फाइनल में पहुँची। इस जीत ने दर्शाया कि भारत खाने-पीने की दहशत और शुरुआती कमजोरी को पार कर एक निडर और संयमित टीम बनकर उभरा।
देश के लिए गौरव: प्रधानमंत्री
इस ऐतिहासिक जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीम को हार्दिक बधाई दी और इसे भारतीय हॉकी और खेल का गौरव बताया। केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया और पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर ने भी टीम का जोरदार स्वागत करते हुए उसे सराहा।
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टीम की रणनीति और भविष्य की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने जिस एकरूपता और समन्वय का प्रदर्शन किया, वह उसकी अगली बड़ी प्रतियोगिता — 2026 हॉकी विश्व कप — के लिए चाहरंभ संदेश है।
अब आने वाली चुनौती — विश्व कप में वापसी
इस जीत ने टीम को आत्मविश्वास से ओत-प्रोत कर दिया है। अब 2026 विश्व कप की तैयारी शुरू हो चुकी है—जहाँ भारत ने क्वालीफाई कर लिया है। पहले लक्ष्य में बदलाव नहीं होगा, लेकिन चुनौती और बड़ी होगी। खेल प्रेमियों को फिर से भारतीय हॉकी की वो चमक देखने को मिली है, जो कभी उसका स्वर्णिम युग थी — अब यह चमक लौट आई है!
