एम.बी. इंटर कॉलेज मैदान हल्द्वानी में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी और सेना बैंड दल
हल्द्वानी। भारत के गौरवशाली राष्ट्रगीत “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूर्ण होने पर शुक्रवार को नैनीताल जिलेभर में उत्सव जैसा माहौल रहा। देशभक्ति के रंग में डूबे इस अवसर पर हर जगह एक स्वर में “वंदे मातरम” की गूंज सुनाई दी। जिले के सभी शिक्षण संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, विकास भवन भीमताल, जिला कार्यालय नैनीताल सहित सार्वजनिक स्थलों पर सामूहिक गायन के कार्यक्रम हुए। हर जगह तिरंगे और देशभक्ति के नारों से वातावरण ओतप्रोत रहा।

कोश्यारी ने कहा, “वंदे मातरम देश की आत्मा है”
मुख्य कार्यक्रम एम.बी. इंटर कॉलेज मैदान, हल्द्वानी में आयोजित हुआ, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान कुमाऊँ रेजीमेंट रानीखेत से आए सेना बैंड दल और खटीमा के प्रसिद्ध गायक शेरी सिंगर की देशभक्ति प्रस्तुतियों ने माहौल को जोश और गर्व से भर दिया।

अपने संबोधन में पूर्व मुख्यमंत्री कोश्यारी ने कहा कि वंदे मातरम केवल गीत नहीं, बल्कि यह भारत माता के सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक है। आज़ादी के आंदोलन में इसी गीत ने देशवासियों के दिलों में साहस और एकता की ज्वाला जगाई। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ हमें अपनी मातृभूमि के प्रति कर्तव्य और समर्पण की भावना को पुनः जागृत करने का अवसर देती है।
“वंदे मातरम” की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
“वंदे मातरम” की रचना वर्ष 1875 में महान साहित्यकार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह गीत उनकी प्रसिद्ध कृति ‘आनंदमठ’ का हिस्सा है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत क्रांतिकारियों और जनता के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। वर्ष 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति ने इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया और 1950 में भारतीय संविधान सभा ने इसे आधिकारिक राष्ट्रगीत के रूप में स्वीकार किया।
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति से सजा आयोजन
कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, विधायक बंशीधर भगत, कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। पूरा मैदान “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम” के नारों से गूंज उठा।
