उत्तराखंड में सभी जिलों में शस्त्र लाइसेंस की दोबारा जांच के आदेश
देहरादून। उत्तराखंड में बढ़ती आपराधिक घटनाओं के बीच सरकार ने शस्त्र लाइसेंस को लेकर बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के बाद गृह विभाग ने सभी जिलों में लाइसेंसों की व्यापक समीक्षा और पुनः सत्यापन के आदेश जारी किए हैं। राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DM) को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने जिलों में शस्त्र लाइसेंस धारकों की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजें।

किन लाइसेंसों पर रहेगा खास फोकस?
गृह विभाग ने साफ किया है कि जांच सिर्फ औपचारिक नहीं होगी, बल्कि हर स्तर पर गहन समीक्षा की जाएगी।

जांच के दायरे में शामिल होंगे:
- दूसरे राज्यों से ट्रांसफर होकर आए शस्त्र लाइसेंस
- हाल ही में जारी किए गए नए लाइसेंस
- एक व्यक्ति के पास एक से अधिक शस्त्र होने के मामले
इन सभी मामलों में लाइसेंस की वैधता, प्रक्रिया और जरूरत का मूल्यांकन किया जाएगा।
गृह सचिव के सख्त निर्देश
गृह सचिव शैलेश बगौली ने सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि:
- हर लाइसेंस धारक का वेरिफिकेशन किया जाए
- सभी मामलों की डिटेल रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाए
- किसी भी तरह की अनियमितता मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाए
नई व्यवस्था: अब किसे मिलेंगे ज्यादा शस्त्र?
सरकार ने शस्त्र रखने के नियमों को भी सख्त किया है।
नए नियमों के तहत:
- सामान्य व्यक्ति को एक सीमित संख्या में ही शस्त्र रखने की अनुमति
- दो से अधिक शस्त्र रखने की अनुमति सिर्फ शूटिंग खिलाड़ियों को
- यह अनुमति भी खिलाड़ी के प्रदर्शन के आधार पर तय होगी
गन हाउस और कारतूस पर भी नजर
सरकार ने सिर्फ लाइसेंस ही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की निगरानी बढ़ा दी है।
इसके तहत:
- गन हाउस की नियमित जांच
- हथियारों के स्टॉक का सत्यापन
- कारतूस के उपयोग और रिकॉर्ड की निगरानी
क्यों लिया गया यह फैसला?
हाल के समय में प्रदेश में बढ़ती आपराधिक घटनाओं को देखते हुए सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है।
उद्देश्य:
- शस्त्र लाइसेंस के दुरुपयोग को रोकना
- अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाना
- प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करना
आगे क्या होगा?
इस अभियान के बाद:
- संदिग्ध लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं
- नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी
- राज्य में शस्त्र नियंत्रण की व्यवस्था और कड़ी हो सकती है
क्या कहता है यह फैसला?
सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि अब शस्त्र लाइसेंस को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह फैसला कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ प्रशासनिक जवाबदेही को भी बढ़ाएगा।
