चमोली की बेटी अनीशा को नागालैंड के दीमापुर में आयोजित राष्ट्रीय रेड रन मैराथन 3.0 में स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
चमोली। उत्तराखण्ड के चमोली जिले के छोटे से गांव लुन्तरा (पो. नंदानगर) की बेटी कुमारी अनीशा ने राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित रेड रन मैराथन 3.0 में देशभर की प्रतिभाशाली धाविकाओं को पछाड़ते हुए प्रथम स्थान हासिल किया है। यह प्रतियोगिता स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) द्वारा नागालैण्ड के दीमापुर में आयोजित की गई थी।

10 किलोमीटर की दौड़ में अनीशा बनीं भारत की ‘रेड रन चैंपियन’
इस मैराथन में देश के 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सैकड़ों धावकों ने भाग लिया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच उत्तराखण्ड की अनीशा ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, फिटनेस और आत्मविश्वास के दम पर सभी को पीछे छोड़ दिया। उनके शानदार प्रदर्शन पर भारत सरकार की ओर से ₹50,000 की पुरस्कार राशि, प्रशस्ति पत्र और स्वर्ण पदक देकर उन्हें सम्मानित किया गया।

स्वास्थ्य सचिव ने दी बधाई
सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं शिक्षा डॉ. आर. राजेश कुमार ने अनीशा को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि अनीशा की यह सफलता पूरे उत्तराखण्ड के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने यह साबित किया है कि मेहनत और अनुशासन से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।
राज्य स्तर की विजेता बनी राष्ट्रीय मंच की प्रेरणा
इससे पहले, अनीशा ने राज्य स्तर पर आयोजित रेड रन 3.0 में 5 किलोमीटर दौड़ में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। यह आयोजन उत्तराखण्ड राज्य एड्स नियंत्रण समिति (यूसेक्स) के तत्वावधान में हुआ था। राज्य में मिली इस सफलता ने अनीशा को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचने की प्रेरणा दी।
उत्तराखंड की बेटियां बन रहीं नई प्रेरणास्त्रोत
अनीशा की इस उपलब्धि ने यह साबित किया है कि उत्तराखण्ड की बेटियाँ हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। उनकी सफलता से युवाओं को यह प्रेरणा मिलती है कि अगर लगन और मेहनत हो, तो कोई मंज़िल दूर नहीं।
यूसेक्स टीम भी रही मौजूद
दीमापुर में हुए इस आयोजन के दौरान उत्तराखण्ड राज्य एड्स नियंत्रण समिति की टीम भी मौजूद रही, जिसमें उप निदेशक (वित्त) महेन्द्र कुमार, अनिल सती, मुकेश चिन्याला, विनोद कुमार, और नोडल अधिकारी हेमन्त सिंह कण्डारी शामिल थे। टीम ने अनीशा को प्रोत्साहित करते हुए उनकी सफलता पर गर्व व्यक्त किया।
अनीशा की यह जीत सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे राज्य के आत्मविश्वास और सामर्थ्य की पहचान है।
उत्तराखण्ड की यह “रेड रन चैंपियन” आने वाली पीढ़ी के लिए एक प्रेरक उदाहरण बन चुकी हैं।
