टिहरी में डबल वोटर याचिका पर शपथ ग्रहण रोक
टिहरी गढ़वाल। टिहरी गढ़वाल में गुरुवार को जिला एवं सत्र न्यायधीश अमित कुमार सिरोही की अदालत ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में शामिल कुछ निर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण पर रोक लगाने का ऐतिहासिक आदेश पारित किया है। यह कदम चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है।

किस पर लगी रोक?
अदालत ने दो निर्वाचित सदस्यों की शपथ ग्रहण और पद से संबंधित गतिविधियों में भाग लेने पर रोक लगाई है। इनमें शामिल हैं:

- कल्पना देवी, जो बिच्छु, जौनपुर विकासखंड से क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में निर्वाचित हुई हैं।
- उत्तम असवाल, जो चिलेड़ी, कीर्तिनगर विकासखंड से जिला पंचायत सदस्य के रूप में चुने गए हैं।
इस रोक का मुख्य कारण यह है कि दोनों के नाम मतदाता सूची में एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाए गए, जो चुनावी प्रक्रिया में अयोग्यता और विवाद का संकेत देता है।
अगली सुनवाई और शपथ ग्रहण की तिथियां
अधिवक्ता जयवीर सिंह रावत के अनुसार, याचिका की अग्रिम सुनवाई 11 सितंबर 2025 को होगी।
इससे पहले तय शपथ ग्रहण तिथियां इस प्रकार थीं:
- क्षेत्र पंचायत सदस्यों की शपथ ग्रहण: 29 अगस्त 2025
- जिला पंचायत सदस्यों की शपथ ग्रहण: 1 सितंबर 2025
अदालत ने इस मामले में साफ निर्देश दिए हैं कि अग्रिम आदेश तक दोनों सदस्य अपने पद से संबंधित किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं हो सकते।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता
इस आदेश को स्थानीय लोकतंत्र और चुनाव सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह कदम दिखाता है कि चुनावी प्रक्रिया में शुचिता और संवैधानिक मर्यादा को बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है।
विशेष रूप से, यह फैसला यह संदेश देता है कि किसी भी स्तर पर लोकतंत्र की गरिमा को कमजोर करने वाले प्रयासों को सहन नहीं किया जाएगा।
याचिकाकर्ता और विशेषज्ञ की प्रतिक्रिया
याचिकाकर्ता और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता शक्ति बर्त्वाल ने इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के आदेश स्थानीय चुनावों में जवाबदेही और ईमानदारी को बढ़ावा देते हैं। इससे जनता में यह विश्वास मजबूत होता है कि चुनाव निष्पक्ष और न्यायसंगत तरीके से आयोजित किए जा रहे हैं।
जनता के लिए संदेश
स्थानीय नागरिकों और मतदाताओं से अपील की गई है कि वे प्रशासन और न्यायपालिका द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। किसी भी विवाद या आपात स्थिति में तुरंत अधिकारियों से संपर्क करें और चुनाव प्रक्रिया में सक्रिय रूप से सहयोग करें।
