रानीबाग में एनडीएमए-यूएसडीएमए प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान NCC कैडेट्स भूस्खलन और रेस्क्यू तकनीक सीखते हुए।
हल्द्वानी। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित युवा आपदा मित्र योजना के तहत यूएसडीएमए और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण नैनीताल द्वारा आयोजित सात दिवसीय आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम का दूसरा दिन महत्वपूर्ण गतिविधियों से भरा रहा। प्रशिक्षण सत्र हल्द्वानी के रानीबाग क्षेत्र में आयोजित किया गया।

भूस्खलन और खोज-बचाव तकनीकों पर विशेष फोकस
प्रशिक्षण के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने भूस्खलन की स्थितियों को समझने से लेकर स्थल पर होने वाली चुनौतियों, खोज (Search) के प्रकार, खोज के दौरान अपनाई जाने वाली रणनीतियों और उपकरणों के व्यवस्थित उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। कैडेट्स को बताया गया कि किसी भी आपदा स्थल पर सुरक्षित, तेज और प्रभावी कार्रवाई कैसे की जाती है।

गांठें, फंदे और जंमरिंग का व्यावहारिक अभ्यास
रेस्क्यू ऑपरेशन में अनिवार्य मानी जाने वाली गांठों और फंदों का अभ्यास कैडेट्स ने विशेषज्ञों की देखरेख में किया। पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में उपयोग होने वाली जंमरिंग तकनीक का भी कैडेट्स को लाइव डेमो दिया गया, जिससे वे ऊंचाई पर चढ़ने-उतरने की प्रक्रिया को सुरक्षित तरीके से समझ सकें।
70 NCC कैडेट्स सक्रिय रूप से ले रहे भाग
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 70 एनसीसी कैडेट्स भाग ले रहे हैं, जिन्हें मास्टर ट्रेनर नवीन चंद्र, खोज एवं बचाव विशेषज्ञ एसआई मनीष भाकुनी, सुरेंद्र कुमार, अमन और हर्ष (एसडीआरएफ टीम) द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रशिक्षण 15 दिसंबर 2025 तक निरंतर चलेगा, जिसमें प्रत्येक दिन कैडेट्स को विभिन्न आपदा स्थितियों के अनुसार अलग-अलग कौशल सिखाए जाएंगे।
आपदा प्रबंधन में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में प्रशिक्षित कर हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार करना है। प्रशिक्षकों ने बताया कि आपदा के दौरान समय पर की गई कार्रवाई जीवन बचाने में सबसे अहम होती है, इसलिए कैडेट्स को व्यावहारिक कौशलों में दक्ष बनाया जा रहा है।
