हाईकोर्ट ने डीजीपी और गृह सचिव को किया तलब
नैनीताल। नैनीताल हाईकोर्ट में मंगलवार को जिला पंचायत चुनाव और सदस्यों की कथित किडनैपिंग से जुड़े मामलों पर अहम सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस जी. नरेंद्र और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की बेंच ने जनहित याचिकाओं और री-पोल की मांग से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य प्रशासन पर सख्त टिप्पणी की।

सुनवाई के मुख्य बिंदु
- जिला निर्वाचन अधिकारी और एसएसपी नैनीताल ने एफिडेविट दाखिल कर पूरी घटना की जानकारी कोर्ट को दी।
- कोर्ट ने एसएसपी से पूछा कि क्या घटना में शामिल आरोपी हिस्ट्रीशीटर हैं? इस पर एसएसपी ने कहा कि अब तक मिली जानकारी में ऐसा नहीं है।
- एसएसपी ने कोर्ट को बताया कि आरोपियों में कुछ यूपी और कुछ उत्तराखंड के हैं, बाकी की पहचान जारी है।
- चीफ जस्टिस ने कहा कि यह पूरी घटना सिस्टम की विफलता को दर्शाती है और इस तरह का कल्चर उत्तराखंड में स्वीकार्य नहीं है।
- कोर्ट ने लाल रंग की कार के बारे में पूछताछ की, जिस पर एसएसपी ने बताया कि आरोपी कार छोड़कर बाइक से भागे।
री-पोल की मांग पर बहस

- जिला पंचायत सदस्य पूनम बिष्ट और कांग्रेस प्रत्याशी पुष्पा नेगी की ओर से री-पोल की याचिका दाखिल की गई है।
- सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने वर्चुअल रूप से बहस करते हुए कई पुराने फैसलों का हवाला दिया और री-पोल की मांग रखी।
- हाईकोर्ट ने इस याचिका पर अगली सुनवाई बुधवार, 20 अगस्त को तय की है।
हाईकोर्ट का सख्त रुख
- 14 अगस्त को हुई कथित किडनैपिंग के मामले पर कोर्ट एसएसपी के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ।
- एसएसपी ने बताया कि 14 संदिग्धों की पहचान हो चुकी है।
- इस पर हाईकोर्ट ने डीजीपी और गृह सचिव को शुक्रवार को तलब किया है।
- चीफ जस्टिस ने स्पष्ट कहा कि “इस मामले को ऐसे नहीं छोड़ा जा सकता।”
साफ है कि नैनीताल जिला पंचायत चुनाव से जुड़ा यह मामला अब और गंभीर होता जा रहा है और हाईकोर्ट प्रशासनिक व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर रहा है।
