यमुना नदी पर बन रही लखवाड़ जल विद्युत परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों ने बांध स्थल पर रोजगार और मुआवजे की मांग को लेकर धरना शुरू किया।
देहरादून। यमुना नदी पर बन रही 300 मेगावाट की लखवाड़ जल विद्युत बहुउद्देशीय परियोजना एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह है—परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना, जो उन्होंने शुक्रवार से बांध स्थल पर शुरू किया। धरने में शामिल ग्रामीणों, काश्तकारों और बेरोजगार युवाओं ने शांतिपूर्ण ढंग से UJVNL (उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड) के अधिकारियों के सामने अपनी कई प्रमुख मांगें रखीं।

ग्रामीणों की मुख्य मांगें
धरना स्थल पर ग्रामीणों ने कहा कि परियोजना से उनकी खेती-बाड़ी, जमीन और रोजगार पर गहरा असर पड़ा है। इसलिए प्रत्येक प्रभावित परिवार से एक व्यक्ति को रोजगार देने की मांग की गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही भूमि का मुआवजा तहसील धनोल्टी के अंतर्गत कैम्पटी बाजार की बाजारी दरों के अनुसार तय किया जाए। ग्रामीणों ने यह भी आग्रह किया कि परिवार रजिस्टर के आधार पर परिवारों की गणना हो ताकि कोई भी पात्र परिवार आर एंड आर (पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन) नीति से वंचित न रह जाए।

विस्थापन पर राय सुमारी की मांग
धरना दे रहे काश्तकारों ने स्पष्ट कहा कि परियोजना से पूर्णतः प्रभावित राजस्व गांव — कुणा, रणोगी और लोहारी का विस्थापन तभी तय किया जाए जब प्रभावित काश्तकारों की राय ली जाए।
एलएनटी कंपनी पर भी सवाल
धरना स्थल पर ग्रामीणों ने परियोजना निर्माण में लगी एलएनटी कंपनी पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने मांग की कि कंपनी द्वारा पहले हटाए गए स्थानीय श्रमिकों को तुरंत पुनः बहाल किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी टकराव के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन जब तक रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास की मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक उनका यह धरना जारी रहेगा।
ग्रामीणों की चेतावनी
धरनास्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि हम अपने हक की लड़ाई शांति से लड़ रहे हैं, लेकिन अगर हमारी बातें नहीं सुनी गईं तो आंदोलन और उग्र होगा।
