मुक्तेश्वर में ‘कुमाऊंनी’ कम्युनिटी रेडियो की टीम, जो पहाड़ की संस्कृति और जानकारी को जन-जन तक पहुंचा रही है।
मुक्तेश्वर। 13 फरवरी, विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर आज चर्चा का केंद्र है उत्तराखंड का गौरव ‘कुमाऊंनी’ कम्युनिटी रेडियो (90.4 MHz)। यह रेडियो स्टेशन आज न केवल सूचना का माध्यम है, बल्कि पहाड़ की आत्मनिर्भरता और संस्कृति का प्रतीक बन चुका है।

पांच स्तंभों का सामूहिक नेतृत्व
कुमाऊंनी रेडियो की यह शानदार यात्रा पांच समर्पित साथियों की टीम भावना का परिणाम है। इस टीम का नेतृत्व प्रबंधक मोहन कार्की जी कर रहे हैं, जिनके मार्गदर्शन में रेडियो ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। टीम के अन्य महत्वपूर्ण सदस्य – जितेंद्र रैकवाल, बहादुर गिनवाल और नारायण मेहता—अपनी विशेषज्ञता और मेहनत से इस स्टेशन को गांव-गांव तक पहुंचा रहे हैं।

ऐतिहासिक उपलब्धियां और सम्मान
इस टीम के प्रयासों का लोहा राष्ट्रीय स्तर पर भी माना गया है। कुमाऊंनी रेडियो ने अब तक कई प्रतिष्ठित पुरस्कार अपने नाम किए हैं:
राष्ट्रीय पुरस्कार (National Award): भारत सरकार द्वारा कृषि आधारित उत्कृष्ट कार्यक्रमों के लिए सम्मानित।
मंथन अवार्ड: डिजिटल सशक्तिकरण और सूचना तकनीक के बेहतर उपयोग के लिए प्राप्त गौरवशाली सम्मान।
विकासपीडिया (C-DAC) प्रोजेक्ट: हाल ही में टीम ने सरकारी योजनाओं को सरल कुमाऊंनी जिंगल्स में बदलकर सामुदायिक सूचना तंत्र को मजबूत किया है।
समुदाय की उपलब्धियां
रेडियो की सबसे बड़ी उपलब्धि इसका समुदाय है:
कृषि क्रांति: ‘बाजार लाए बौछार’ जैसे कार्यक्रमों से हजारों किसानों को आधुनिक तकनीक और जैविक उर्वरकों (जैसे माइकोराइजा) से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि की।
बोली का संरक्षण: लुप्त होती कुमाऊंनी बोली और लोक संगीत को एक वैश्विक मंच प्रदान किया।
सशक्त महिलाएं: स्वास्थ्य और शिक्षा पर आधारित कार्यक्रमों से ग्रामीण महिलाओं में जागरूकता का नया संचार हुआ।
इस रेडियो की सफलता के पीछे एक समर्पित टीम की निरंतर मेहनत है।
| नाम | भूमिका |
| मोहन कार्की | प्रबंधक एवं नेतृत्व |
| जितेंद्र रैकवाल | प्रबंधन एवं तकनीकी समन्वय |
| बहादुर गिनवाल | सामुदायिक जुड़ाव एवं कार्यक्रम |
| नारायण मेहता | क्षेत्रीय विस्तार एवं सहयोग |
टीम का मानना है कि रेडियो केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि समुदाय को जोड़ने वाला विश्वास का सेतु है।

यह अवॉर्ड और उपलब्धियां हमारी टीम के साथ-साथ पूरे क्षेत्र की जनता की हैं। प्रबंधक मोहन कार्की जी के नेतृत्व में हम पांचों साथी—जितेंद्र रैकवाल, बहादुर गिनवाल और नारायण मेहता—पहाड़ की इस आवाज़ को और अधिक बुलंद करने के लिए संकल्पित हैं।
निष्कर्ष: विश्व रेडियो दिवस पर ‘कुमाऊंनी’ रेडियो की यह रिपोर्ट प्रमाणित करती है कि जब स्थानीय लोग संगठित होकर प्रयास करते हैं, तो वे राष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
