भवाली में आयोजित कार्यक्रम में कुमाऊं वाणी के 16वें स्थापना दिवस पर अतिथियों, कलाकारों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी।
भवाली (नैनीताल)। पहाड़ की आवाज़ और स्थानीय संस्कृति को मंच देने वाले सामुदायिक रेडियो कुमाऊं वाणी (90.4 मेगाहर्ट्ज) ने 11 मार्च को अपनी प्रसारण यात्रा के 16 सफल वर्ष पूरे कर लिए। इस खास अवसर पर भवाली क्षेत्र में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता, कलाकार और स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सामुदायिक रेडियो की भूमिका, पहाड़ी समाज में इसकी उपयोगिता और पिछले 16 वर्षों में इसके योगदान को विस्तार से याद किया।
वरिष्ठ पत्रकारों और विशेषज्ञों की रही विशेष मौजूदगी

कार्यक्रम में नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिज्म (NUJ) के संरक्षक और वरिष्ठ पत्रकार त्रिलोचन भट्ट मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ दीवान सिंह (टेरी), प्रवीण शर्मा और दया जोशी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
मुख्य अतिथि त्रिलोचन भट्ट ने अपने संबोधन में कहा कि कुमाऊं वाणी जैसे सामुदायिक रेडियो स्टेशन पहाड़ के लोगों की समस्याओं और संस्कृति को सामने लाने का एक प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 16 वर्षों में इस रेडियो ने स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।
इस अवसर पर टेरी (TERI) द्वारा संचालित LABL परियोजना की भी जानकारी साझा की गई। परियोजना अधिकारी जितेन कुमार तिवारी ने टेलीफोन के माध्यम से कार्यक्रम में जुड़कर इस पहल के उद्देश्य और कार्यों पर प्रकाश डाला।
समाजसेवियों और स्थानीय प्रतिभाओं को किया गया सम्मानित
स्थापना दिवस के अवसर पर समाज में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कई लोगों को सम्मानित किया गया। इनमें प्रमुख रूप से:
- सुदर्शन शाही (अध्यक्ष, होटल एसोसिएशन)
- देवेंद्र सिंह बिष्ट
- राजेंद्र सिंह बिष्ट (अध्यक्ष, जलप्रपात समिति)
सहित कई अन्य ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को उनकी सेवाओं के लिए स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
यूट्यूब कलाकारों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी आकर्षण का केंद्र रहीं। उत्तराखंड के उभरते डिजिटल कलाकारों और यूट्यूब क्रिएटर्स ने मंच पर शानदार प्रस्तुतियाँ दीं।
इनमें प्रमुख रूप से:
- पंकज जीना
- अमित भट्ट
- हर्ष कफ़र
ने कुमाऊंनी लोक गीतों और सामाजिक विषयों पर आधारित प्रस्तुतियाँ दीं, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा। इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और भी जीवंत बना दिया।
कुशल संचालन और टीम की अहम भूमिका
कार्यक्रम का संचालन मोहन कार्की ने किया। उन्होंने अपने रोचक अंदाज में कुमाऊं वाणी के 16 वर्षों की यात्रा, संघर्ष और उपलब्धियों को सभी के सामने साझा किया।
इस मौके पर स्टेशन की पूरी टीम भी मौजूद रही, जिसमें प्रमुख रूप से:
- जितेंद्र बहादुर
- गिनवाल
- नारायण मेहता
- सुरेंद्र डंगवाल
- हरीश बिष्ट
- तारा सिंह
- गोपाल
सहित बड़ी संख्या में स्थानीय श्रोता और ग्रामीण शामिल हुए।
पहाड़ की आवाज़ बना हुआ है ‘कुमाऊं वाणी’
कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं ने कहा कि कुमाऊं वाणी सिर्फ एक रेडियो स्टेशन नहीं, बल्कि पहाड़ की संस्कृति, परंपरा और जनसरोकारों को जीवित रखने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है।
रेडियो की टीम ने संकल्प लिया कि आने वाले समय में भी यह मंच लोक संस्कृति के संरक्षण, सामाजिक जागरूकता और ग्रामीण आवाज़ को आगे बढ़ाने के अपने मिशन पर लगातार काम करता रहेगा।
