उत्तराखण्ड में जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार अभियान के तहत शिविर में जनता की समस्याएं सुनते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
देहरादून। उत्तराखण्ड में शासन और जनता के बीच की दूरी को समाप्त करने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में एक ऐतिहासिक पहल की जा रही है। राज्य सरकार द्वारा शुरू किया गया “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान प्रशासन को सीधे आम नागरिकों के द्वार तक ले जा रहा है।

यह व्यापक जनसेवा अभियान 17 दिसंबर 2025 से पूरे प्रदेश में संचालित किया जा रहा है। अभियान का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ उनके क्षेत्र में ही उपलब्ध कराना तथा जनसमस्याओं का मौके पर त्वरित और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है।
45 दिनों तक प्रदेशव्यापी बहुउद्देश्यीय शिविर
यह अभियान 45 दिनों की अवधि में उत्तराखण्ड के सभी 13 जनपदों में न्याय पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर पर बहुउद्देश्यीय शिविरों के माध्यम से चलाया जा रहा है। अब तक सैकड़ों शिविरों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें ग्रामीण, पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों के हजारों लोगों ने भाग लिया।
इन शिविरों में प्रशासनिक अधिकारियों की प्रत्यक्ष मौजूदगी में जनता की शिकायतें सुनी जा रही हैं और अनेक मामलों का तत्काल निस्तारण किया गया है। लंबित प्रकरणों को संबंधित विभागों को सौंपते हुए समयबद्ध समाधान के निर्देश भी दिए जा रहे हैं।
सरकारी सेवाएं अब जनता के द्वार पर
अभियान के तहत नागरिकों को—
- आय, जाति, निवास जैसे प्रमाण पत्रों के आवेदन,
- सामाजिक सुरक्षा पेंशन,
- आर्थिक सहायता योजनाओं,
- रोजगार, स्वरोजगार और आजीविका से जुड़ी सेवाओं
का लाभ एक ही स्थान पर मिल रहा है।
अब तक लाखों नागरिक इस अभियान से सीधे जुड़ चुके हैं और राज्य सरकार की योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री स्वयं कर रहे निगरानी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं भी कई जिलों में जाकर इन शिविरों का निरीक्षण कर चुके हैं। उन्होंने स्थानीय नागरिकों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और मौके पर ही समाधान के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर से पूरे अभियान की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।
सुशासन और संवेदनशील प्रशासन का मॉडल
“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान उत्तराखण्ड में सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जवाबदेह व्यवस्था का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभरा है। इस पहल का लक्ष्य है कि आम नागरिक को सरकारी कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें, बल्कि प्रशासन स्वयं जनता के द्वार पहुंचे और समस्याओं का समाधान करे।
इस प्रक्रिया से न केवल शासन और जनता के बीच विश्वास बढ़ा है, बल्कि लोगों में सरकार के प्रति सकारात्मक भावना और भरोसा भी मजबूत हुआ है। यह अभियान उत्तराखण्ड को पारदर्शी, जनकेंद्रित और जवाबदेह शासन की दिशा में आगे ले जाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।
