उत्तराखंड में आयोजित जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार शिविर में बड़ी संख्या में पहुंचे नागरिक
देहरादून। प्रदेश में सुशासन और जनसेवा को मजबूत करने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर चलाया गया ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान 45 दिनों के सफल संचालन के बाद शुक्रवार को संपन्न हो गया। इस व्यापक जनसंपर्क अभियान ने सरकारी सेवाओं को लोगों के दरवाजे तक पहुंचाने का नया मॉडल प्रस्तुत किया।

अभियान की प्रमुख उपलब्धियां
- कुल शिविर आयोजित: 681
- प्रत्यक्ष लाभार्थी: 5,33,452 से अधिक नागरिक
- प्राप्त शिकायतें: 51,053
- मौके पर समाधान: 33,755 शिकायतें
- प्रमाणपत्रों के आवेदन: 74,184
- विभिन्न सेवाओं का लाभ: लगभग 3 लाख लोग
- अंतिम दिन (शुक्रवार) आयोजित शिविर: 11
- अंतिम दिन प्रतिभागी: 8,209 नागरिक
लोगों के दरवाजे तक पहुंची सरकार

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य था कि आम जनता को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। प्रशासन स्वयं गांव-गांव और शहर-शहर पहुंचकर शिकायतें सुनें और उनका त्वरित समाधान करे। दिसंबर से शुरू हुए इस अभियान के तहत प्रदेशभर में लगातार शिविर लगाए गए, जहां नागरिकों ने न केवल अपनी समस्याएं दर्ज कराईं बल्कि विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ भी लिया।
मौके पर समाधान बना भरोसे की सबसे बड़ी वजह
अभियान के दौरान प्राप्त कुल 51,053 शिकायतों में से 33,755 का समाधान मौके पर ही कर दिया गया। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा और सरकारी तंत्र की कार्यकुशलता का सकारात्मक संदेश गया। विशेष रूप से प्रमाणपत्र, राजस्व, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, पेंशन, राशन कार्ड, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का तेजी से निस्तारण किया गया।
सुशासन की दिशा में मजबूत कदम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था को जनता के करीब लाने का प्रयास है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अभियान समाप्त होने के बाद भी जनता से सीधा संवाद बनाए रखें और शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को बिना भागदौड़ के सरकारी सेवाएं मिलना ही सुशासन की पहली सीढ़ी है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह अभियान?
- प्रशासनिक पारदर्शिता में वृद्धि
- ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक सेवाओं की पहुंच
- समय और धन की बचत
- सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता
- जनता और प्रशासन के बीच विश्वास मजबूत
निष्कर्ष
‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान ने यह साबित किया है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो तो सरकारी सेवाएं वास्तव में जनता के घर तक पहुंच सकती हैं। 5 लाख से अधिक लोगों की भागीदारी और हजारों शिकायतों के त्वरित समाधान ने इसे उत्तराखंड में सुशासन का एक सफल मॉडल बना दिया है।
