मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सचिवालय में उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की 22वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि उत्तराखंड में वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ मानव जीवन और संपत्ति की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को गंभीर चुनौती बताते हुए मुख्यमंत्री ने इसके नियंत्रण के लिए और अधिक प्रभावी, तकनीकी और समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए।

मंगलवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की 22वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भालू, गुलदार, बाघ और हाथी प्रभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जाए।
संवेदनशील क्षेत्रों में संयुक्त निगरानी के निर्देश

मुख्यमंत्री ने वन विभाग और जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि संवेदनशील इलाकों में संयुक्त निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। नियमित पेट्रोलिंग, डिजिटल निगरानी, कैमरा ट्रैप और अर्ली वार्निंग सिस्टम को पूरी तरह सक्रिय रखा जाए, ताकि समय रहते किसी भी संभावित खतरे से निपटा जा सके।
ग्राम स्तर पर सुरक्षा उपाय अनिवार्य
मुख्यमंत्री श्री धामी ने निर्देश दिए कि मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित ग्रामों में सोलर फेंसिंग, बायो-फेंसिंग, हनी बी फेंसिंग, वॉच टावर और अन्य सुरक्षात्मक उपाय अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएं। साथ ही ग्रामीणों को सतर्क और जागरूक करने के लिए नियमित जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जाए तथा रैपिड रिस्पॉन्स टीम (QRT) को लगातार सक्रिय रखा जाए।
वन्यजीव कॉरिडोर संरक्षण को शीर्ष प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में हाथी और बाघ कॉरिडोर सहित सभी वन्यजीव कॉरिडोरों का संरक्षण शीर्ष प्राथमिकता पर रखा जाए। वन्यजीवों के पारंपरिक आवागमन मार्गों पर एनिमल पास, अंडरपास और ओवरपास की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मौजूदा वन्यजीव संरक्षण नियमों में संशोधन की आवश्यकता हो, तो संबंधित विभाग परीक्षण कर संशोधन प्रस्ताव शीघ्र शासन को भेजें।
हॉट स्पॉट मैपिंग और कचरा प्रबंधन पर जोर
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित वन्यजीव समन्वय समिति को सक्रिय रखा जाए। संवेदनशील जिलों, ब्लॉकों और ग्रामों की हॉट स्पॉट मैपिंग तत्काल पूरी की जाए। स्कूलों, आंगनबाड़ियों, जलस्रोतों और पैदल मार्गों के आसपास सुरक्षा प्रबंध मजबूत किए जाएं। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया, ताकि भालू और अन्य वन्यजीव मानव आबादी की ओर आकर्षित न हों।
ईको-टूरिज्म और पशु चिकित्सा व्यवस्था को मजबूती
मुख्यमंत्री ने कहा कि ईको-टूरिज्म को सुदृढ़ बनाने के लिए रिजर्व फॉरेस्ट के साथ-साथ वाइल्डलाइफ सेंचुरी और कंजरवेशन रिजर्व क्षेत्रों में भी कार्य किए जाएं। मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से टेरिटोरियल फॉरेस्ट डिविजन में पशु चिकित्सकों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
9 वन भूमि प्रस्तावों को मंजूरी, 22 प्रस्ताव NBWL को संदर्भित
बैठक में वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े 9 प्रस्तावों पर सहमति प्रदान की गई। इनमें:
- केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य की 6 पेयजल योजनाएं
- राजाजी नेशनल पार्क क्षेत्र से जुड़ी 2 मोटरमार्ग योजनाएं
- रामनगर वन प्रभाग से संबंधित 1 ऑप्टिकल फाइबर प्रस्ताव शामिल हैं।
इसके अलावा संरक्षित क्षेत्रों की 10 किमी परिधि में उपखनिज चुगान से जुड़े 22 प्रस्तावों को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के विचारार्थ संदर्भित करने का निर्णय लिया गया।
पिछली बैठक के निर्णयों पर हुई कार्रवाई की जानकारी
प्रमुख वन संरक्षक श्री रंजन कुमार मिश्र ने बताया कि राज्य वन्यजीव बोर्ड की 21वीं बैठक के निर्णयों के तहत:
- चौरासी कुटिया पुनर्विकास
- मंसादेवी मंदिर और पहुंच मार्ग पुनर्निर्माण
- ऋषिकेश-नीलकंठ महादेव रोपवे परियोजना
- लालढांग–चिल्लरखाल वन मोटरमार्ग पुनरुद्धार
को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्टैंडिंग कमेटी से स्वीकृति मिल चुकी है।
उन्होंने बताया कि जुलाई से दिसंबर 2025 तक 56 वन भूमि हस्तांतरण प्रस्तावों के वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट प्लान स्वीकृत किए गए हैं और 29 प्रस्तावों पर एनओसी जारी की गई है। मानव-वन्यजीव संघर्ष में मृत्यु के मामलों में अनुग्रह राशि 6 लाख से बढ़ाकर 10 लाख की गई है। राज्य के 32 वन प्रभागों में 93 क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) गठित की गई हैं। पिथौरागढ़, चम्पावत और रुद्रप्रयाग में वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर की स्थापना हेतु प्रस्ताव भेजे गए हैं।
वन मंत्री का बयान
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि बैठक में लिए गए निर्णय वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में दूरदर्शी कदम हैं, जिससे उत्तराखंड में वन्यजीव प्रबंधन व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
