समीर आर्य ने नई प्रदेश कार्यकारिणी में अनुसूचित जाति वर्ग की उपेक्षा पर पार्टी नेतृत्व को घेरा
देहरादून। उत्तराखंड भाजपा की हाल ही में घोषित 42-सदस्यीय प्रदेश कार्यकारिणी पर पार्टी के भीतर असंतोष गहराने लगा है। अनुसूचित जाति मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष समीर आर्य ने संगठन पर आरोप लगाया है कि अनुसूचित जाति वर्ग, जिसकी आबादी राज्य में लगभग 19% है, को न्यायोचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया।

समीर आर्य का आरोप: “हमें मिला सिर्फ एक पद”
समीर आर्य ने प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को लिखे पत्र में कहा कि कार्यकारिणी में अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष के अलावा इस वर्ग को सिर्फ एक पद—प्रदेश उपाध्यक्ष—मिला है। उन्होंने तर्क दिया कि राज्य में अपेक्षाकृत कम जनसंख्या वाले वर्गों को पांच–छह पद दिए गए, जो सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

राजनीतिक असर की चेतावनी
समीर आर्य ने कहा कि राज्य की लगभग हर विधानसभा में अनुसूचित जाति मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। उनकी अनदेखी राजनीतिक रूप से घातक साबित हो सकती है, खासकर 2027 विधानसभा चुनाव से पहले।
प्रदेश अध्यक्ष की सफाई
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि भाजपा अनुसूचित वर्ग का सम्मान करती है। समीर आर्य ने जो मुद्दे उठाए हैं, उनकी जानकारी लेकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
जनसंख्या बनाम प्रतिनिधित्व
2011 की जनगणना के मुताबिक, उत्तराखंड में अनुसूचित जाति की आबादी करीब 19% है। इसके बावजूद पार्टी की शीर्ष संरचना में उनका प्रतिनिधित्व सीमित है, जो राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
भाजपा में मचे घमासान के संकेत
समीर आर्य के पत्र के बाद भाजपा के भीतर सामाजिक संतुलन और संगठनात्मक समावेशिता पर बहस छिड़ गई है। अब यह देखना होगा कि पार्टी इस असंतोष को कैसे संभालती है।
