लाखन सिंह नेगी पर सबकी नजर
भीमताल। उत्तराखंड के कुमाऊं में इस समय लाखन सिंह नेगी का नाम काफी तेजी से चर्चा में है। कभी रामगढ़ और नथुवाखान के स्थानीय नेता के तौर पर पहचाने जाने वाले लाखन नेगी ने अब अपने राजनीतिक दायरे को भीमताल तक फैला दिया है। हाल के जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में, भले ही उनकी पत्नी पुष्पा नेगी की कुर्सी को लेकर कानूनी और राजनीतिक रस्साकशी जारी हो, लेकिन लाखन नेगी ने अपने आक्रामक तेवर और जनसंपर्क के दम पर खुद को एक बड़े राजनीतिक खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर लिया है।

रामगढ़ से भीमताल तक का सफर
लाखन सिंह नेगी का राजनीतिक करियर रामगढ़ ब्लॉक प्रमुख के रूप में शुरू हुआ। जमीनी स्तर पर जनता से सीधे जुड़ने और आगर-चौघर पट्टी में मजबूत पकड़ के कारण उन्होंने अपने समर्थकों का एक ठोस आधार बनाया। 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में उन्होंने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में भीमताल सीट से चुनाव लड़ा और 12,508 वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे। हालांकि जीत नहीं मिली, लेकिन इस चुनाव ने उन्हें पूरे क्षेत्र में पहचान दिला दी।


जिला पंचायत चुनाव और राजनीतिक आक्रामकता
हाल ही में नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के दौरान, लाखन सिंह नेगी का नाम बार-बार सुर्खियों में रहा। मतदान के दिन हुई हिंसा, फायरिंग और 5 कांग्रेस सदस्यों के गायब होने के घटनाक्रम में भी उनकी सक्रियता साफ झलकी। उनकी पत्नी पुष्पा नेगी इस चुनाव की दावेदार रहीं, लेकिन कानूनी पेच अभी भी उलझे हुए हैं। इन सबके बीच लाखन सिंह नेगी ने अपने आक्रामक अंदाज़ और सत्ता से सीधी टक्कर लेने की छवि को और मजबूत किया।
लाखन सिंह नेगी की संपत्ति और कानूनी स्थिति
निर्वाचन आयोग में दिए हलफनामे के अनुसार –
- कुल घोषित संपत्ति: 3.51 करोड़
- ऋण: 30 लाख से अधिक
- आपराधिक मामले: 5
ये आंकड़े दिखाते हैं कि वे न सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत हैं, बल्कि राजनीतिक लड़ाई लड़ने का साहस भी रखते हैं।
2027 की राजनीतिक संभावना
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भीमताल की राजनीति लाखन सिंह नेगी के इर्द-गिर्द घूम सकती है। उनकी रणनीति साफ है , स्थानीय मुद्दों पर आक्रामक रुख, जनसंपर्क पर फोकस और भीमताल के हर हिस्से में पैठ बनाना। अगर वे कानूनी अड़चनों से बच गए, तो वे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
लाखन सिंह नेगी आज भीमताल में “स्थानीय नेता” से आगे बढ़कर राजनीतिक केंद्र बिंदु बन चुके हैं। आने वाले दो साल यह तय करेंगे कि वे सिर्फ एक प्रभावशाली जिला नेता बने रहेंगे या 2027 में विधानसभा तक पहुंचेंगे।
