नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में हाई-वोल्टेज ड्रामा
नैनीताल। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के दिन नैनीताल जिले में सियासी जंग सड़कों और अदालत तक पहुंच गई। सुबह से ही कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने दिखे, एक-दूसरे पर गंभीर आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए और मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट तक जा पहुंचा।

कांग्रेस का आरोप: जिला पंचायत सदस्यों का अपहरण
कांग्रेस नेताओं का दावा है कि भाजपा नेताओं ने नेता प्रतिपक्ष समेत पार्टी के कई नेताओं से मारपीट कर उनके जिला पंचायत सदस्यों का अपहरण किया। भारी बारिश के बीच कांग्रेसी नेता व कार्यकर्ता सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करते रहे और कथित अपहरण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया। कांग्रेस ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर गायब सदस्य नहीं मिले तो वे जबरदस्त आंदोलन करेंगे।

भाजपा का पलटवार: मारपीट और धमकी के आरोप
दूसरी ओर भाजपा प्रत्याशी दीपा दर्मवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने उनके साथ मारपीट की और चार जिला पंचायत सदस्यों को गायब करने का प्रयास किया। उन्होंने इस संबंध में थाने में तहरीर दी, जिसमें विधायक यशपाल आर्य, सुमित हृदयेश, भवन कापड़ी, पूर्व विधायक संजीव आर्य समेत कई कांग्रेस नेताओं के नाम हैं। साथ ही दीपा दर्मवाल का कहना है कि यह घटनाक्रम उन्हें चुनावी दबाव में लाने और डराने के लिए किया गया।

हाईकोर्ट की त्वरित दखल
कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर माना और जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल को तलब किया। कोर्ट ने आदेश दिए कि गायब सदस्यों को तत्काल खोजा जाए और उन्हें सुरक्षित मतदान स्थल तक पहुंचाया जाए।
हाईकोर्ट के मुख्य निर्देश:
- गायब सदस्यों को खोजकर आज ही मतदान कराना अनिवार्य।
- 10 जिला पंचायत सदस्यों को पुलिस सुरक्षा में मतदान कराने का आदेश।
- 5 कथित अपहृत सदस्यों को SSP नैनीताल खुद मतदान स्थल लाएं।
- जांच हो कि सदस्य खुद गए या वाकई उनका अपहरण हुआ।
- पांचों सदस्यों के बयान हाईकोर्ट में दर्ज किए जाएं।
- आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच हो।
मतदान का समय बढ़ा
कोर्ट ने आदेश दिया कि मतदान का समय 3 बजे से बढ़ाकर 5 बजे किया जाए, और अगर आवश्यकता पड़ी तो इसे और बढ़ाया जा सकता है, ताकि सभी सदस्य अपना वोट डाल सकें। अगली सुनवाई आज शाम 4 बजे तय की गई है।
माहौल तनावपूर्ण
जिले में धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है, पुलिस-पीएसी की भारी तैनाती है और दोनों दलों के समर्थकों के बीच तनातनी जारी है। हर किसी की नजर अब हाईकोर्ट के अगले आदेश और चुनावी नतीजों पर टिकी है।
