आदि कैलाश परिक्रमा रन 2.0 की तैयारियों का जायजा लेने ज्योलिंगकोंग पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी। आयोजन में करीब 1,300 धावकों के शामिल होने की संभावना है।
पिथौरागढ़। उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित होने वाली आदि कैलाश परिक्रमा रन 2.0 की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। 24 से 26 अक्टूबर 2026 तक प्रस्तावित इस आयोजन में इस बार करीब 1,300 धावकों के हिस्सा लेने की संभावना है। पिछले वर्ष की तुलना में प्रतिभागियों की संख्या लगभग दोगुनी होने के अनुमान के बीच जिला प्रशासन ने व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करने की कवायद तेज कर दी है।

जिलाधिकारी आशीष भटगांई के निर्देशों के क्रम में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दीपक सैनी, उपनिदेशक पर्यटन अतुल भंडारी और उपजिलाधिकारी धारचूला आशीष जोशी ने आदि कैलाश क्षेत्र का दौरा किया। अधिकारियों ने करीब 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित ज्योलिंगकोंग पहुंचकर आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए सभी तैयारियां निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी करने को कहा गया।
1,300 धावकों की भागीदारी का अनुमान, पिछले साल से दोगुनी होगी संख्या

आदि कैलाश परिक्रमा रन के दूसरे संस्करण में इस वर्ष बड़ी संख्या में धावकों के पहुंचने की उम्मीद है। प्रशासन के अनुसार, करीब 1,300 प्रतिभागी इस आयोजन का हिस्सा बन सकते हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले प्रतिभागियों की संख्या लगभग दोगुनी होने की संभावना को देखते हुए आयोजन की तैयारियों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रतिभागियों की संख्या बढ़ने के साथ उनके आवागमन, ठहरने, सुरक्षा और अन्य जरूरी सुविधाओं का बेहतर प्रबंधन करना भी महत्वपूर्ण हो गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुटा है।
14,500 फीट की ऊंचाई पर ज्योलिंगकोंग पहुंचे अधिकारी
तैयारियों का जायजा लेने के लिए अधिकारियों ने ज्योलिंगकोंग का दौरा किया। करीब 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह क्षेत्र आदि कैलाश यात्रा और सीमांत पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने आयोजन से संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा की और संबंधित विभागों को जरूरी निर्देश दिए। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि आयोजन के दौरान धावकों को आवश्यक सुविधाएं मिलें और कार्यक्रम को सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया जा सके।
छियालेख से कुटी तक तैयारियों की समीक्षा
मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दीपक सैनी ने छियालेख से बूदी, गर्ब्यांग, नपलचु, गुंजी, नाबी, रोकांग और कुटी समेत विभिन्न सीमांत गांवों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने आदि कैलाश परिक्रमा रन 2.0 के आयोजन से जुड़ी तैयारियों का जायजा लिया।
निरीक्षण में धावकों की सुविधा, सुरक्षा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि आयोजन से पहले सभी जरूरी इंतजाम पूरे कर लिए जाएं, ताकि प्रतिभागियों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
सीमांत क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और अधिक ऊंचाई को देखते हुए आयोजन की व्यवस्थाओं में विभागीय तालमेल की अहम भूमिका रहेगी। ऐसे में प्रशासन समय रहते सभी संबंधित विभागों को अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने के निर्देश दे रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों से सहयोग की अपील
आयोजन को सफल बनाने के लिए प्रशासन स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर भी जोर दे रहा है। भ्रमण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने ग्रामीणों से बातचीत की और उनसे कार्यक्रम के सफल संचालन में सहयोग करने की अपील की।
उन्होंने स्थानीय ग्राम प्रधानों और जनप्रतिनिधियों से भी आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाने तथा प्रशासन को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का आग्रह किया। सीमांत क्षेत्रों में स्थानीय लोगों की सहभागिता से आयोजन संबंधी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने और क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सेना, आईटीबीपी और पर्यटन विभाग के साथ समन्वय
निरीक्षण के दौरान सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) और पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ स्थानीय ग्राम प्रधान एवं ग्रामीण भी मौजूद रहे।
आदि कैलाश जैसे सीमांत और ऊंचाई वाले क्षेत्र में आयोजन के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक है। इसी उद्देश्य से संबंधित अधिकारियों को व्यवस्थाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा करने और आयोजन के दौरान जरूरी सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर प्रशासन का जोर
आदि कैलाश परिक्रमा रन 2.0 का उद्देश्य केवल दौड़ का आयोजन करना ही नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं को भी व्यापक पहचान दिलाना है। आदि कैलाश क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, पर्वतीय भूगोल और धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व के कारण पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है।
ऐसे आयोजनों के माध्यम से सीमांत क्षेत्रों को साहसिक पर्यटन के नए गंतव्य के रूप में पहचान दिलाने की संभावनाएं बढ़ती हैं। साथ ही स्थानीय लोगों की भागीदारी से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल सकता है।
जिला प्रशासन का लक्ष्य आदि कैलाश परिक्रमा रन 2.0 को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सफलतापूर्वक संपन्न कराना है। 24 से 26 अक्टूबर तक प्रस्तावित इस आयोजन के लिए तैयारियां लगातार आगे बढ़ाई जा रही हैं। अब सभी की निगाहें आयोजन पर टिकी हैं, जिसमें करीब 1,300 धावकों की भागीदारी सीमांत उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
