हरिद्वार में त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के क्षमता विकास कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंचायतों को मजबूत बनाने और ग्रामीण विकास में जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
हरिद्वार। उत्तराखंड में गांवों के विकास को नई दिशा देने और पंचायत प्रतिनिधियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए गुरुवार को हरिद्वार में एक दिवसीय अभिमुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया। प्रदेश के सभी विकासखंडों में एक साथ 60 हजार से अधिक त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण से जोड़ने के इस प्रयास को ग्राम स्तर पर विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

मुख्यमंत्री धामी ने पंचायत प्रतिनिधियों को लोकतंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा कि ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के प्रतिनिधि सरकार तथा जनता के बीच सीधे संपर्क का माध्यम हैं। गांव की वास्तविक समस्याओं, स्थानीय जरूरतों और लोगों की प्राथमिकताओं को पंचायत प्रतिनिधि सबसे बेहतर तरीके से समझते हैं। ऐसे में सरकारी योजनाओं को पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने और विकास योजनाओं को जमीन पर उतारने में उनकी भूमिका बेहद अहम है।
‘मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी’ की भावना से काम करने का आह्वान

मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से ‘मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी’ की भावना के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि सरकार की योजनाओं की जानकारी गांव के प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचे और वास्तविक लाभार्थी को उसका लाभ मिले।
उन्होंने कहा कि पंचायतों को अपने गांव की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए। विकास योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका सीधा असर ग्रामीणों के जीवन में दिखाई देना चाहिए।
जन योजना अभियान में स्थानीय जरूरतों को मिले प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2 अक्टूबर 2026 से जन योजना अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत स्तर पर विकास योजनाएं तैयार की जा रही हैं।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि योजना तैयार करते समय स्थानीय समस्याओं, ग्रामीणों के सुझावों और उपलब्ध संसाधनों को प्राथमिकता दी जाए। प्रत्येक पंचायत को अपने विकास कार्यों के लिए स्पष्ट लक्ष्य, निर्धारित समयसीमा और अपेक्षित परिणाम तय करने चाहिए।
धामी ने कहा कि हर पंचायत की विकास योजना में पेयजल, सड़क, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों को प्रमुख स्थान मिलना चाहिए। ग्राम सभाओं में ग्रामीणों की राय ली जाए और योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा भी की जाए।
कमजोर और वंचित परिवारों तक पहुंचे योजनाओं का लाभ
मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में पात्र परिवारों तक पहुंच रहा है या नहीं। उन्होंने कमजोर और वंचित वर्गों की जरूरतों को विशेष प्राथमिकता देने की बात कही।
उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर विकास की सफलता का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि कितने काम कराए गए, बल्कि यह देखा जाना चाहिए कि इन कार्यों से ग्रामीणों के जीवन में कितना बदलाव आया।
2025-26 में 56 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को दिया गया प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री ने पंचायतों को मजबूत बनाने के लिए किए जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 56 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया गया।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड की 7,817 ग्राम पंचायतों में से 5,972 पंचायतों में पंचायत भवन ग्राम सचिवालय के रूप में संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा पिछले पांच वर्षों में 1,362 पंचायत भवनों का निर्माण किया गया है, जबकि 584 पंचायत भवनों की मरम्मत कराई गई है।
राज्य में एक हजार से अधिक ग्राम पंचायतों का कम्प्यूटरीकरण भी किया जा चुका है। इससे पंचायत स्तर पर प्रशासनिक कामकाज को अधिक सुविधाजनक और तकनीक आधारित बनाने में मदद मिल रही है।
डिजिटल पंचायत से बढ़ेगी पारदर्शिता, ई-ग्राम स्वराज पर होगी निगरानी
मुख्यमंत्री ने पंचायतों में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के माध्यम से पंचायतों की कार्ययोजनाओं, वित्तीय एवं भौतिक प्रगति तथा विकास कार्यों की जियो टैगिंग की जा रही है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल पंचायत का उद्देश्य पंचायतों के कामकाज को अधिक पारदर्शी, सरल और प्रभावी बनाना है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि पंचायत का पैसा जनता का पैसा है, इसलिए उसके खर्च का पूरा हिसाब जनता के सामने होना चाहिए। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से विकास कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा।
‘काम कितने हुए’ से ज्यादा जरूरी है ‘काम का असर’
मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों को विकास कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि केवल विकास कार्यों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह देखना जरूरी है कि उन कार्यों से ग्रामीणों को वास्तविक सुविधा मिल रही है या नहीं।
उन्होंने विशेष रूप से सड़कों की गुणवत्ता, पेयजल योजनाओं की उपयोगिता और पंचायत भवनों से मिलने वाली सेवाओं पर ध्यान देने की बात कही।
स्वच्छ और स्वस्थ गांव बनाने में पंचायतों की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ गांवों के निर्माण में पंचायतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने के लिए जिला पंचायतों को ग्रामीण मोटर मार्गों और स्थानीय बाजारों की सफाई के लिए कचरा उठाने वाली मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं।
विकासखंड स्तर पर भी कचरा प्रबंधन के लिए विशेष मशीनें स्थापित की गई हैं। मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से स्वच्छता अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम न मानकर जनभागीदारी से जोड़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि गांवों में नियमित सफाई व्यवस्था, कचरे का उचित निस्तारण और स्वच्छ वातावरण ग्रामीणों के स्वास्थ्य से सीधे जुड़े विषय हैं।
महिला समूहों और स्थानीय उत्पादों से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमिता, कृषि, बागवानी, स्थानीय उत्पादों और पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना तथा पलायन को कम करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक उत्पादों को बाजार से जोड़कर लोगों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जाने चाहिए।
मुख्यमंत्री ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण सहित उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के साथ गांवों की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी ध्यान देना जरूरी है।
पंचायत प्रतिनिधियों को गुणवत्ता, समयबद्धता और जवाबदेही का संदेश
मुख्यमंत्री धामी ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि प्रत्येक विकास कार्य में गुणवत्ता, समयबद्धता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। प्रशिक्षण के दौरान मिली जानकारी और तकनीकी ज्ञान का इस्तेमाल पंचायतों को बेहतर तरीके से संचालित करने में किया जाए।
उन्होंने कहा कि मजबूत पंचायतें ही गांवों को स्वच्छ, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं। पंचायत प्रतिनिधियों के प्रयासों से ग्रामीण विकास को गति मिलेगी और विकसित उत्तराखंड के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, रानीपुर विधायक आदेश चौहान, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, दर्जाधारी राज्य मंत्री देशराज कर्णवाल और आदेश सैनी, बहादराबाद ब्लॉक प्रमुख आशा नेगी सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
इसके अलावा जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) जितेंद्र कुमार, उप जिलाधिकारी हरिद्वार योगेश मेहरा, जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह सहित विभिन्न ग्राम पंचायतों से आए ग्राम प्रधान, पंचायत प्रतिनिधि और संबंधित विभागों के अधिकारी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
