मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में 101 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए।
देहरादून। उत्तराखंड के युवाओं के लिए सरकारी नौकरी से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में पशुपालन विभाग तथा गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग में चयनित 101 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इनमें 88 पशुधन प्रसार अधिकारी और 13 गन्ना पर्यवेक्षक शामिल हैं।

नियुक्ति पत्र मिलने के बाद अब ये सभी चयनित युवा प्रदेश सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बनेंगे। मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त कार्मिकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरकारी सेवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि जनसेवा का अवसर भी है। उन्होंने सभी से ईमानदारी, अनुशासन और संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपेक्षा की।
मेहनत और दृढ़ संकल्प का परिणाम है नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि नियुक्ति पत्र हासिल करना युवाओं की मेहनत, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम है। चयन के बाद आज से उनके जीवन में जिम्मेदारी का एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। उन्होंने कहा कि नवनियुक्त कार्मिक अब उत्तराखंड सरकार का अभिन्न हिस्सा हैं और उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को पूरी गंभीरता से निभाना होगा।
मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि वे अपने ज्ञान, तकनीकी समझ, ऊर्जा और नए विचारों का इस्तेमाल सरकारी कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने में करें। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों में काम करने वाले कार्मिकों का व्यवहार और कार्यशैली ही आम जनता के बीच सरकार की छवि बनाती है। इसलिए प्रत्येक कर्मचारी को अपने कार्यों के माध्यम से उदाहरण पेश करना चाहिए।
पशुपालन और गन्ना विभाग ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़
मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालन विभाग और गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग सीधे तौर पर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े हुए हैं। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालन ग्रामीण परिवारों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। बड़ी संख्या में परिवार पशुपालन और डेयरी गतिविधियों के माध्यम से अपनी आजीविका चलाते हैं।
पशुपालन का क्षेत्र ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण से भी जुड़ा है। गांवों में महिलाएं पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और उससे संबंधित गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था के साथ-साथ मातृशक्ति की आय और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिल सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पशुपालन को केवल पारंपरिक आजीविका तक सीमित रखने के बजाय इसे रोजगार, स्वरोजगार और ग्रामीण विकास का प्रभावी माध्यम बनाने की दिशा में काम कर रही है।
आंचल अमृत से लेकर पशुधन मिशन तक योजनाओं पर जोर
मुख्यमंत्री ने सरकार की ओर से पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए संचालित योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना, मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना और मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन जैसी योजनाओं के माध्यम से पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
पशुपालकों को अनुदान के आधार पर गाय, बकरी, भेड़ और मुर्गी पालन जैसी इकाइयां उपलब्ध कराने के साथ पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण और बेहतर पशु चिकित्सा सुविधाओं पर भी जोर दिया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य पशुपालकों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ उनकी आय में वृद्धि करना और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार करना है। इस व्यवस्था को धरातल पर प्रभावी तरीके से लागू करने में पशुधन प्रसार अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
गन्ना किसानों के लिए ऑनलाइन और पारदर्शी व्यवस्था
मुख्यमंत्री धामी ने गन्ना किसानों के हितों को लेकर भी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि गन्ना सर्वेक्षण की प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है। इससे किसानों को सर्वेक्षण से जुड़ी जानकारी और प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता मिलने की उम्मीद है।
किसानों को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती से जोड़ने के लिए गन्ना क्लीनिक एवं परामर्श केंद्र शुरू किए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को उन्नत गन्ना प्रजातियों, नई तकनीकों और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तराखंड में गन्ना किसानों को उत्तर प्रदेश की तुलना में 5 रुपये प्रति कुंतल अधिक गन्ना मूल्य दिया जा रहा है। सरकार का कहना है कि गन्ना उत्पादकों के हितों को ध्यान में रखते हुए लगातार आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
नवनियुक्त कर्मचारियों के सामने बड़ी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले सभी कार्मिकों को उनकी नई जिम्मेदारियों के प्रति भी सचेत किया। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं और नीतियों का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा, जब वह पात्र व्यक्ति तक समय पर पहुंचे।
उन्होंने नवनियुक्त अधिकारियों और कर्मचारियों से किसानों, पशुपालकों और ग्रामीणों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने को कहा। लोगों की समस्याओं को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें समझने और उनके समाधान के लिए संवेदनशीलता से काम करने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आम नागरिक को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें। विभागीय स्तर पर काम को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में कर्मचारियों की भूमिका अहम है।
‘सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि’ पर फोकस
मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त कार्मिकों से शासकीय कार्यप्रणाली में ‘सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि’ के मूल मंत्र को अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा में आने के बाद कर्मचारियों को केवल नियमों और प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आम लोगों की अपेक्षाओं को भी समझना चाहिए। ईमानदारी, अनुशासन और संवेदनशीलता के साथ काम करने से सरकारी व्यवस्था में जनता का विश्वास और मजबूत होगा।
मुख्यमंत्री ने सभी नवनियुक्त कार्मिकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि वे अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करेंगे और उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में प्रभावी योगदान देंगे।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, गणेश जोशी, खजानदास, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक सविता कपूर और दुर्गेश्वर लाल, सचिव एस.एन. पाण्डेय समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
