हरिद्वार के अवधूत मंडल आश्रम में संत समागम के दौरान ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर संवाद करते केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।
हरिद्वार। हरिद्वार के प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम में आयोजित संत समागम में रविवार को ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को लेकर महत्वपूर्ण संवाद हुआ। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सहभागिता की। दोनों नेताओं ने एक साथ चुनाव कराने की अवधारणा को लेकर अपने विचार रखे और इसे देश में सुशासन, विकास की निरंतरता तथा संसाधनों के बेहतर उपयोग से जोड़कर देखा।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ आज देश की जरूरत है। उन्होंने बार-बार होने वाले चुनावों को विकास की गति प्रभावित करने वाला बताते हुए संत समाज से इस विषय पर व्यापक जनजागरण करने की अपील की। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह विषय किसी राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रहित, सुशासन और जनकल्याण से जुड़ा राष्ट्रीय विषय है।
बार-बार चुनाव विकास की गति में बन रहे बाधक : शिवराज

संत समागम को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश में अलग-अलग समय पर चुनाव होते रहने से प्रशासनिक व्यवस्था पर लगातार चुनावी जिम्मेदारियों का दबाव बना रहता है। इससे विकास और जनसेवा से जुड़े कार्यों के लिए उपलब्ध प्रशासनिक समय और संसाधनों पर असर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी और सुरक्षा बल चुनावी ड्यूटी में लगाए जाते हैं। इसके अलावा चुनावी प्रक्रिया के लिए बड़े स्तर पर संसाधनों और धन की आवश्यकता होती है। ऐसे में यदि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ आयोजित किए जाएं तो समय, धन और प्रशासनिक संसाधनों की बचत की जा सकती है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि लगातार चुनावों की वजह से स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होती है और प्रशासनिक मशीनरी का बड़ा हिस्सा चुनावी तैयारियों में व्यस्त हो जाता है। उनका कहना था कि यदि चुनावी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जाए तो सरकार और प्रशासन का अधिक समय विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और जनसेवा पर लगाया जा सकता है।
‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ प्रधानमंत्री मोदी का संकल्प : शिवराज
केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को लेकर किए जा रहे प्रयासों का समर्थन करते हुए कहा कि यह किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय हित से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि देश पहले है और राजनीतिक दल उसके बाद।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यदि देश आगे बढ़ेगा तो राजनीतिक दल भी मजबूत होंगे। इसलिए देश के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए चुनावी व्यवस्था में आवश्यक सुधारों पर विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव कराने से चुनाव संबंधी खर्च और प्रशासनिक संसाधनों के उपयोग को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही चुनावी प्रक्रिया में लगने वाला समय भी बचाया जा सकता है।
संत समाज से जनजागरण की अपील
हरिद्वार के संत समागम में शिवराज सिंह चौहान ने संत-महात्माओं से विशेष रूप से जनजागरण में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संत समाज की समाज में गहरी पहुंच है और उनके विचारों का बड़ी संख्या में लोग अनुसरण करते हैं।
उन्होंने संतों से आग्रह किया कि वे अपने प्रवचनों और सामाजिक संवाद के माध्यम से ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के विचार पर लोगों को जागरूक करें। शिवराज ने कहा कि संत समाज का मार्गदर्शन इस विषय को व्यापक जनचर्चा का हिस्सा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कहा कि यह विषय राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित में चर्चा का विषय बनना चाहिए। उनके मुताबिक, व्यापक जनजागरण से देश में चुनाव सुधारों को लेकर स्वस्थ और सकारात्मक संवाद को आगे बढ़ाया जा सकता है।
धामी बोले- ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ राजनीतिक नहीं, राष्ट्रीय विषय
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ राजनीतिक विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रहित, सुशासन, जनकल्याण और देश के संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़ा राष्ट्रीय विषय है।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां चुनाव लोकतंत्र के पर्व के समान हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावों का अपना महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन निरंतर चलने वाली चुनावी प्रक्रिया का असर शासन और विकास कार्यों पर भी पड़ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग समय पर चुनाव होने के कारण बार-बार आचार संहिता लागू होती है। इसके साथ बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक, पुलिस और सुरक्षा बल चुनाव संबंधी जिम्मेदारियों में लगाए जाते हैं। इससे शासन की नियमित गतिविधियों और विकास कार्यों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
संसाधनों की बचत और विकास को मिलेगी निरंतरता
सीएम धामी ने कहा कि यदि देश में एक साथ चुनाव कराने से सार्वजनिक धन और प्रशासनिक संसाधनों की बचत होती है तथा सरकारी मशीनरी को जनसेवा और विकास कार्यों के लिए अधिक समय मिलता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
उन्होंने कहा कि विकास की निरंतर गति किसी भी देश की प्रगति के लिए जरूरी है। बार-बार होने वाली चुनावी गतिविधियों के कारण यदि शासन का समय और संसाधन लगातार चुनावी प्रक्रिया में लगते हैं, तो विकास योजनाओं की गति प्रभावित होने की संभावना रहती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के माध्यम से चुनावी प्रक्रिया और शासन व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है।
विकसित भारत-2047 के लिए विकास की निरंतर गति जरूरी : धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के विषय को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाते हुए इसे आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने के लिए विकास की निरंतर गति आवश्यक है। भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और ऐसे समय में शासन का अधिकतम समय रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचे और जनकल्याण से जुड़े कार्यों पर केंद्रित होना चाहिए।
मुख्यमंत्री के अनुसार, चुनावी सुधारों पर होने वाली चर्चा का उद्देश्य लोकतंत्र को कमजोर करना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुचारु बनाने की संभावनाओं पर विचार करना होना चाहिए।
‘देश पहले, पार्टी बाद में’
शिवराज सिंह चौहान ने संत समागम में कहा कि देश सबसे पहले है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल और राजनीति लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, लेकिन राष्ट्रहित सर्वोच्च होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ का उद्देश्य चुनावी राजनीति को खत्म करना नहीं, बल्कि चुनावों की प्रक्रिया को इस तरह व्यवस्थित करना है कि देश का शासन और विकास लगातार चलता रहे।
केंद्रीय मंत्री ने संत समाज से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस विचार को जनता तक पहुंचाने का आग्रह करते हुए कहा कि संतों के आशीर्वाद और मार्गदर्शन से इस विषय पर व्यापक जनजागरण किया जा सकता है।
वंदे मातरम को लेकर भी शिवराज का बड़ा संदेश
संत समागम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने वंदे मातरम के महत्व पर भी विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने इसे देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना से जुड़ा प्रतीक बताया।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम को किसी राजनीतिक दल या समुदाय से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, यह मातृभूमि के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना से जुड़ा विषय है।
शिवराज सिंह चौहान ने संत समाज से अपील की कि वे अपने प्रवचनों के माध्यम से वंदे मातरम के पूर्ण स्वरूप के प्रति सम्मान और राष्ट्रीय एकता का संदेश दें। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने के लिए समाज को विभाजनकारी सोच से ऊपर उठना होगा।
संत समाज से राष्ट्रहित में मार्गदर्शन का आग्रह
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी संत-महात्माओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत की सनातन परंपरा में संत समाज ने हमेशा राष्ट्र और समाज को दिशा देने का काम किया है।
उन्होंने संत समाज से ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषय पर समाज का मार्गदर्शन करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के सामने विकास, सुशासन और राष्ट्र निर्माण के बड़े लक्ष्य हैं और इन लक्ष्यों की पूर्ति के लिए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि लोकतंत्र मजबूत हो, विकास की गति निरंतर बनी रहे, संस्कृति सुरक्षित रहे और राष्ट्र सर्वोपरि रहे।
हरिद्वार से राष्ट्रीय विमर्श को मिला नया मंच
हरिद्वार के अवधूत मंडल आश्रम में आयोजित संत समागम में ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को लेकर हुई चर्चा ने इस मुद्दे को धार्मिक-सामाजिक मंच से भी जोड़ दिया। एक ओर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संत समाज से जनजागरण की अपील की, वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे राष्ट्रहित, सुशासन और जनकल्याण से जुड़ा विषय बताया।
कार्यक्रम में दिए गए संदेश का मुख्य केंद्र यही रहा कि भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के साथ-साथ शासन और विकास की निरंतरता पर भी विचार जरूरी है। ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को लेकर आगे होने वाली संवैधानिक और राजनीतिक प्रक्रिया के बीच हरिद्वार का यह संत समागम इस विषय पर जनसंवाद की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा।
