देहरादून के भाऊवाला में शहीद अमित कुमार अणथ्वाल के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सम्मानित करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।
देहरादून। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को नमन करते हुए शहीद परिवारों के प्रति सम्मान और संवेदना व्यक्त की। इसी क्रम में मुख्यमंत्री शुक्रवार को देहरादून के भाऊवाला स्थित शहीद अमित कुमार अणथ्वाल के आवास पहुंचे और उनके परिजनों से आत्मीय मुलाकात की।

मुख्यमंत्री ने शहीद अमित कुमार अणथ्वाल के पिता नागेंद्र प्रसाद अणथ्वाल और परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात कर उनकी कुशलक्षेम जानी। उन्होंने वीर सपूत के चित्र पर श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को नमन किया। मुख्यमंत्री ने शहीद के परिजनों को सम्मानित भी किया।
स्वतंत्रता दिवस सिर्फ उत्सव नहीं, बलिदान को याद करने का भी दिन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस देश के लिए गौरव और उत्सव का पर्व है, लेकिन इसके साथ ही यह उन वीर जवानों को याद करने का अवसर भी है, जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया।
उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों की वजह से ही आज देशवासी सुरक्षित वातावरण में स्वतंत्रता दिवस मना पाते हैं। शहीदों का बलिदान देश के लिए अमूल्य है और राष्ट्र हमेशा उनके योगदान को याद रखेगा।
सीएम धामी ने कहा कि शहीद परिवारों के प्रति राज्य सरकार का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं है। सरकार उनके साथ संवेदनशीलता और आत्मीयता के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि शहीद परिवारों का सम्मान वास्तव में पूरे समाज और राष्ट्र का सम्मान है।
कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में आतंकियों से मुठभेड़ में दिखाया अदम्य साहस
शहीद अमित कुमार अणथ्वाल पौड़ी गढ़वाल के कल्जीखाल विकासखंड के ग्राम क्वाला के रहने वाले थे। उन्होंने भारतीय सेना में रहते हुए देश की सुरक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
अमित कुमार अणथ्वाल 9 दिसंबर 2011 को गढ़वाल राइफल्स में भर्ती हुए थे। सैन्य सेवा के दौरान उन्होंने अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया। बाद में वह 4 पैरा स्पेशल फोर्स में सेवाएं दे रहे थे।
उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा क्षेत्र में थी। अप्रैल 2020 में केरन सेक्टर में आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ के दौरान उन्होंने असाधारण साहस का परिचय दिया। अभियान के दौरान उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर पांच आतंकवादियों को मार गिराया।
इस सैन्य अभियान में अमित कुमार अणथ्वाल समेत पांच जवानों ने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।
मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित हुए अमित कुमार अणथ्वाल
देश की रक्षा के लिए शहीद अमित कुमार अणथ्वाल के अदम्य साहस और वीरता को राष्ट्र ने भी सम्मान दिया। उनके असाधारण पराक्रम के लिए उन्हें सेना मेडल (मरणोपरांत) से अलंकृत किया गया।
उनका सैन्य जीवन उत्तराखंड की उस गौरवशाली परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें पहाड़ के युवा देश की सीमाओं की रक्षा के लिए हमेशा आगे रहे हैं।
‘वीरभूमि उत्तराखंड ने देश को दिए हैं अनेक वीर सपूत’
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड को वीरभूमि के रूप में जाना जाता है। प्रदेश के अनेक वीर सपूतों ने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया है।
उन्होंने कहा कि शहीद अमित कुमार अणथ्वाल का नाम भी उत्तराखंड और देश के उन अमर वीरों में हमेशा सम्मान और गर्व के साथ लिया जाएगा, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा को अपने जीवन से भी ऊपर रखा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि शहीदों की वीरगाथाओं और उनके बलिदान की जानकारी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि युवाओं को देशभक्ति, राष्ट्रसेवा और सैन्य परंपरा से प्रेरणा लेने की जरूरत है।
शहीद परिवारों के सम्मान और कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शहीद परिवारों के सम्मान, कल्याण और आवश्यक सहयोग के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने दोहराया कि शहीदों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले सैनिकों के परिवारों के साथ सरकार खड़ी है और उनके सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती रहेगी।
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री का शहीद अमित कुमार अणथ्वाल के घर पहुंचना न केवल शहीद परिवार के प्रति सम्मान का संदेश रहा, बल्कि यह भी दर्शाता है कि राष्ट्र की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर जवानों और उनके परिवारों के प्रति समाज और सरकार की जिम्मेदारी हमेशा बनी रहती है।
एक नजर में शहीद अमित कुमार अणथ्वाल की वीरगाथा
- गांव: क्वाला, विकासखंड कल्जीखाल, पौड़ी गढ़वाल
- सेना में भर्ती: 9 दिसंबर 2011
- सेवा: गढ़वाल राइफल्स और बाद में 4 पैरा स्पेशल फोर्स
- तैनाती: कुपवाड़ा, जम्मू-कश्मीर
- वीरता का अभियान: अप्रैल 2020, केरन सेक्टर
- आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई: मुठभेड़ में पांच आतंकवादी मारे गए
- बलिदान: पांच जवानों के साथ मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान
- सम्मान: सेना मेडल (मरणोपरांत)
