नैनीताल के सूपी गांव में आयोजित औषधीय पौधों की खेती पर एक दिवसीय किसान कार्यशाला में शामिल किसान और विशेषज्ञ।
नैनीताल। जनपद नैनीताल के ग्राम सूपी स्थित त्रिषा फार्म में बुधवार को औषधीय वृक्षों और पौधों के संरक्षण तथा उनकी खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय किसान कार्यशाला और संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इस कार्यशाला का आयोजन The Energy and Resources Institute (TERI) द्वारा किया गया। कार्यक्रम को Dabur India Limited और Jeevanti Welfare Charitable Trust के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) फंड से सहयोग मिला।
औषधीय पौधों की खेती पर जागरूकता बढ़ाना था मुख्य उद्देश्य

कार्यशाला का मुख्य विषय “औषधीय पौधों की खेती एवं उनका संरक्षण” रखा गया था। कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय किसानों को पारंपरिक कृषि के साथ-साथ औषधीय पौधों की व्यावसायिक खेती के प्रति जागरूक करना था।
विशेषज्ञों ने बताया कि उत्तराखंड की जलवायु और जैव-विविधता औषधीय पौधों की खेती के लिए बेहद अनुकूल है। यदि किसान वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर इन पौधों की खेती करें, तो यह उनके लिए आय का एक स्थायी और लाभदायक स्रोत बन सकता है।
किसानों को मिला तकनीकी प्रशिक्षण
कार्यशाला के दौरान कृषि और वनस्पति विशेषज्ञों ने किसानों को औषधीय पौधों की खेती से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं। इनमें प्रमुख रूप से:
- औषधीय पौधों के रोपण की वैज्ञानिक विधियाँ
- पौधों की देखभाल और संरक्षण के तरीके
- वैज्ञानिक तरीके से कटाई और प्रसंस्करण
- बाजार में इन उत्पादों की मांग और संभावनाएँ
इन विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
जैव विविधता संरक्षण पर दिया गया विशेष जोर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड में पाई जाने वाली कई औषधीय प्रजातियाँ धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं। इसलिए इन पौधों का संरक्षण और वैज्ञानिक तरीके से खेती करना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसान इन पौधों को अपने खेतों में उगाना शुरू करें तो इससे जैव विविधता का संरक्षण भी होगा और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
कॉर्पोरेट सहयोग से बढ़ेगी किसानों की संभावनाएँ
कार्यशाला में यह भी बताया गया कि डाबर इंडिया लिमिटेड और जीवन्ती वेलफेयर चैरिटेबल ट्रस्ट (साहिबाबाद) के सहयोग से किसानों को औषधीय पौधों के लिए बाजार से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
किसानों को बताया गया कि औषधीय पौधों की खेती में सप्लाई चेन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग की बड़ी संभावनाएँ मौजूद हैं।
50 प्रगतिशील किसानों ने लिया भाग
इस कार्यशाला का संचालन TERI मुक्तेश्वर की टीम द्वारा किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के करीब 50 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया।
किसानों ने औषधीय खेती से जुड़ी चुनौतियों, बाजार तक पहुंच और तकनीकी जानकारी से संबंधित सवाल भी विशेषज्ञों के सामने रखे, जिनका समाधान विस्तार से बताया गया।
आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टि से फायदेमंद
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने कहा कि यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ औषधीय पौधों की खेती को अपनाते हैं तो यह न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करेगा बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बना सकता है।
इस तरह की कार्यशालाएँ किसानों को नई तकनीक और बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
