परंपरागत रीतियों और मंत्रोच्चार के बीच बदरीनाथ धाम के कपाट 2:56 बजे शीतकाल के लिए बंद किए गए।
बदरीनाथ। हिमालय की गोद में बसे विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के कपाट आज दोपहर 2:56 बजे परंपरागत विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। धाम में सुबह से ही भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और कपाट बंद होने से पहले अंतिम दर्शन कर धन्य हुए।

12 क्विंटल फूलों से सजा धाम, ‘बेडू पाको बारमासा’ की गूंज
कपाट बंद होने से पहले पूरे मंदिर परिसर को 12 क्विंटल फूलों से सजाया गया। आखिरी चरण में मंदिर प्रांगण में ‘बेडू पाको बारमासा’ गीत की मधुर गूंज के बीच भक्तों ने अंतिम झलक पाई। वातावरण भक्ति और भावनाओं से सराबोर रहा।

रावल अमरनाथ नंबूदरी ने परंपरागत रीति से किया कपाट बंद
कपाट बंद करने की परंपरा को रावल अमरनाथ नंबूदरी ने निभाया। इस दौरान वेद-मंत्रों के उच्चारण और धार्मिक विधि-विधान के साथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए आधिकारिक रूप से बंद कर दिए गए।
उद्धव–कुबेर की डोली निकली, देवी लक्ष्मी गर्भगृह में विराजमान
परंपरा के अनुसार, कपाट बंद होने से पूर्व भगवान बदरी विशाल के प्रतीक उद्धव और कुबेर की प्रतिमाओं को गर्भगृह से बाहर लाया गया। वहीं देवी लक्ष्मी को गर्भगृह में शीतकालीन प्रवास के लिए विराजमान कराया गया। भगवान बदरी विशाल को माणा महिला मंगल दल द्वारा तैयार घृत कंबल ओढ़ाया गया।
अब शीतकालीन दर्शन पांडुकेश्वर के योगध्यान बदरी में
कपाट बंद होने के साथ ही अब भगवान बदरीनाथ की पूजा-अर्चना शीतकाल में पांडुकेश्वर स्थित योगध्यान बदरी मंदिर में संपन्न होगी। तीर्थयात्रियों के लिए यही मंदिर अगले छह माह तक दर्शन हेतु खुला रहेगा।
