दिवाली के बाद देहरादून और अन्य मैदानी शहरों में वायु गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की गई।
देहरादून। दीपावली का पर्व भले ही बीत चुका हो, लेकिन इसका असर अब उत्तराखंड की हवा में साफ दिख रहा है। पटाखों और उत्सव के दौरान बढ़े प्रदूषण का असर दीपावली के बाद भी जारी है। उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदेशभर में वायु गुणवत्ता के ताज़ा आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, पर्व के दौरान और उसके बाद राज्य के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में वायु गुणवत्ता में बड़ा फर्क देखने को मिला है।

बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि ऋषिकेश और टिहरी जैसे पहाड़ी शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 50 से 100 के बीच दर्ज किया गया, जो “संतोषजनक श्रेणी” में आता है। यानी यहां की हवा सांस लेने के लिए फिलहाल सुरक्षित है।
वहीं दूसरी ओर, देहरादून, रूड़की, काशीपुर और हल्द्वानी जैसे मैदानी इलाकों में AQI 101 से 200 के बीच रिकॉर्ड किया गया। यह “मध्यम श्रेणी” में आता है और प्रदूषण में साफ बढ़ोतरी को दर्शाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पटाखों के धुएं और जले कचरे की वजह से यह स्थिति बनी है।

पहाड़ी इलाकों में राहत
जहां पहाड़ी शहरों में दिवाली के दौरान पटाखों की मात्रा अपेक्षाकृत कम रही, वहीं स्वच्छ वातावरण और कम यातायात की वजह से हवा में प्रदूषण नहीं बढ़ा। इस वजह से इन इलाकों में लोग दीपावली के बाद भी राहत की सांस ले पा रहे हैं।
मैदानी इलाकों में बढ़ा खतरा
वहीं मैदानी शहरों में दीपावली की रात पटाखों का अधिक उपयोग और ट्रैफिक के चलते प्रदूषण स्तर में इजाफा दर्ज किया गया। बोर्ड ने लोगों को कम प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को अपनाने और जरूरत पड़ने पर मास्क पहनने की सलाह दी है।
क्या बोले अधिकारी
डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि दीपावली पर पटाखों और अन्य गतिविधियों से मैदानी इलाकों में वायु गुणवत्ता पर असर पड़ा है।हम लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं और नागरिकों से भी अपील है कि प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग करें।
