मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जीजीआईसी चंपावत में बालिकाओं के साथ मिड-डे मील का आनंद लिया, लेकिन व्यवस्था पर कई सवाल उठे।
चंपावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बुधवार को राजकीय बालिका इंटर कॉलेज चंपावत पहुंचे, जहां उन्होंने छात्राओं के साथ बैठकर मिड–डेमील (Mid-Day Meal) का आनंद लिया। मौके पर साफ थालियाँ, जूस, अच्छी बैठने की व्यवस्था और स्वादिष्ट भोजन देखकर सभी प्रभावित नजर आए। लेकिन अब इसी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सवाल उठाए हैं कि —
1. क्या बच्चों को रोज इसी तरह बैठकर भोजन कराया जाता है?

2. क्या रोज इतनी साफ-सुथरी थालियाँ दी जाती हैं?
3. क्या रोज जूस परोसा जाता है?
4. क्या रोज इतना ही अच्छा और पौष्टिक खाना बनता है?
स्कूलों में मिड-डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है, लेकिन कई जगहों से अकसर शिकायतें आती रही हैं कि बच्चों को निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं मिलता।
मिड-डे मील योजना पर बड़ा सवाल
राज्य सरकार और शिक्षा विभाग अक्सर बेहतर व्यवस्था के दावे करते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत कई बार इन दावों से मेल नहीं खाती। मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान भोजन और व्यवस्था में विशेष सुधार साफ दिखा। यही वजह है कि अब जनता पूछ रही है कि क्या यह व्यवस्था केवल “एकदिनकीशोभा” थी या बच्चों की “रोजकीहकीकत”? वहीं कुछ अभिभावकों और लोगों ने कहा कि स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता और सुविधाएं नियमित रूप से जांची जानी चाहिए। सिर्फ वीआईपी विजिट पर ही नहीं, बल्कि हर दिन बच्चों को समान और पौष्टिक भोजन मिलना चाहिए।
