पूर्व सीएम हरीश रावत ने नेपाल में लोकतंत्र को बचाने की जरूरत पर जोर दिया
देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने नेपाल में बिगड़ते राजनीतिक हालात पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि मौजूदा घटनाएं यह साबित करती हैं कि सिस्टम से नाराज लोग किस हद तक जा सकते हैं।

कट्टरपंथियों को मौका न मिले
हरीश रावत ने साफ कहा कि नेपाल की मौजूदा स्थिति का फायदा किसी भी सूरत में कट्टरपंथी ताकतों को नहीं उठाने देना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि नेपाल में लोकतंत्र बना रहेगा और यह संकट जल्द खत्म होगा।

सोशल मीडिया पोस्ट में 1990 की यादें
हरीश रावत ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि नेपाल की मौजूदा स्थिति उन्हें 1990 की याद दिलाती है, जब काठमांडू में नेपाली कांग्रेस का पहला ओवर ग्राउंड अधिवेशन हुआ था।
भारत के नेताओं के साथ किया था सम्मेलन में हिस्सा
रावत ने बताया कि इस सम्मेलन में भारत की ओर से उन्होंने, चंद्रशेखर जी, सुब्रमण्यम स्वामी, सीताराम येचुरी और वरिष्ठ पत्रकार अकबर जी के साथ प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। यह सम्मेलन राजशाही के अंत की घोषणा थी, जिसमें लगभग 5 लाख लोग शामिल हुए थे।
आज की स्थिति पर जताया दुख
हरीश रावत ने कहा कि उस समय की उम्मीदें और आकांक्षाएं आसमान छू रही थीं, लेकिन आज नेपाल में संसद भवन को जलते हुए देखना बेहद दर्दनाक है। शायद जनता के चुने हुए नेता जनता के दर्द को नहीं समझ पा रहे हैं।
