उत्तराखंड ने केंद्र सरकार से मांगा 5702 करोड़ का आपदा राहत पैकेज
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने इस वर्ष मानसून के दौरान हुई भारी तबाही और भविष्य में संभावित आपदाओं से बचाव के लिए केंद्र सरकार से 5702.15 करोड़ रुपये की विशेष आर्थिक सहायता मांगी है। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने गृह मंत्रालय को भेजे ज्ञापन में कहा है कि यह धनराशि राज्य की क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों की मरम्मत, पुनर्निर्माण और आपदा सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।

आपदा का खौफनाक असर
अप्रैल से अगस्त 2025 के बीच प्राकृतिक आपदा ने उत्तराखंड में भारी तबाही मचाई। इस अवधि में 79 लोगों की मौत हुई, जबकि 115 लोग घायल और 90 लोग लापता हो गए। इसके अलावा 3953 छोटे-बड़े मवेशियों की मौत भी दर्ज की गई। राज्यभर में 238 पक्के और 2 कच्चे भवन ध्वस्त हो गए, वहीं 2835 पक्के भवन और 402 कच्चे भवन गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए। सैकड़ों दुकानें, होटल, होमस्टे और रेस्टोरेंट भी इस आपदा की चपेट में आ गए।

किस विभाग को कितना नुकसान?
सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि प्राकृतिक आपदा से सबसे ज्यादा नुकसान लोक निर्माण विभाग को 1163.84 करोड़ रुपये का हुआ है। इसके अलावा सिंचाई विभाग को 266.65 करोड़, ऊर्जा विभाग को 123.17 करोड़, स्वास्थ्य विभाग को 4.57 करोड़, विद्यालयी शिक्षा विभाग को 68.28 करोड़, उच्च शिक्षा विभाग को 9.04 करोड़, मत्स्य विभाग को 2.55 करोड़, ग्राम्य विकास विभाग को 65.50 करोड़, शहरी विकास विभाग को 4 करोड़, पशुपालन विभाग को 23.06 करोड़ और अन्य विभागों को 213.46 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कुल मिलाकर लगभग 1944.15 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां सीधे तौर पर प्रभावित हुई हैं।
भविष्य में आपदाओं से बचाव के लिए 3758 करोड़ की जरूरत
ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए कई सड़कें, पुल, गांव और अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियां अब भी आपदा के खतरे में हैं। इन्हें स्थायी सुरक्षा देने और आपदा से बचाव के लिए 3758 करोड़ रुपये की आवश्यकता है।
कुल राहत पैकेज: 5702.15 करोड़ रुपये
राज्य सरकार ने केंद्र से कुल 5702.15 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद मांगी है, जिसमें 1944.15 करोड़ रुपये आपदा प्रभावित परिसंपत्तियों की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए तथा 3758 करोड़ रुपये आपदा सुरक्षा और रोकथाम के लिए शामिल हैं।
उत्तराखंड सरकार का कहना है कि यदि यह पैकेज समय पर मिल जाता है तो न केवल राज्य की आर्थिक और सामाजिक क्षति की भरपाई की जा सकेगी, बल्कि भविष्य में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
